हरिद्वार से गूंजा सनातन संदेश: अमित शाह बोले-भारतीय परंपराओं में निहित है विश्व कल्याण का मार्ग

अमित शाह ने हरिद्वार में कहा, सनातन परंपराएं विश्व कल्याण का मार्ग हैं, आत्म-सुधार जरूरी।

Update: 2026-01-22 17:08 GMT

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार की पावन धरती पर गुरुवार को आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय परंपराएं केवल आस्था का आधार नहीं, बल्कि विश्व की समस्याओं का समाधान भी अपने भीतर समेटे हुए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उद्बोधनों ने इस आयोजन को आध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माण के संगम का स्वरूप प्रदान किया।

गृह मंत्री का संदेश: परंपरा में समाधान

गृहमंत्री अमित शाह ने आचार्य श्रीराम शर्मा के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने सनातन धर्म की विकृतियों को दूर कर आध्यात्मिकता को सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। शाह ने स्पष्ट किया कि “व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण” का विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने आचार्य जी के संदेश “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” को मानव कल्याण का मूल मंत्र बताते हुए इसे जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।


अमित शाह ने बीते दस वर्षों में देश की कार्य-संस्कृति और सोच में आए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी गौरवशाली विरासत और संस्कृति के कारण विश्व में आदर भाव से देखा जा रहा है। स्वामी विवेकानंद और अरविंद घोष जैसे युगपुरुषों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के उत्कर्ष से मानवता का उत्कर्ष सुनिश्चित होगा। हरिद्वार की आध्यात्मिक अनुभूति और गायत्री मंत्र की चेतना को उन्होंने राष्ट्र सेवा और सद्भाव का प्रेरक बताया। युवाओं से उन्होंने आत्म-सुधार को सबसे बड़ी सामाजिक सेवा मानकर जीवन में अपनाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गायत्री परिवार को एक वटवृक्ष की संज्ञा दी, जो समाज को शांति और सकारात्मकता की छाया प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान को नए स्वरूप में पुनः स्थापित कर रहा है। सनातन संस्कृति का विराट संदेश विश्व तक पहुंचे, इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। धामी ने गायत्री परिवार की भूमिका को आध्यात्मिक जनजागरण का आधार बताया।

आधुनिक युग में सनातन धर्म की प्रासंगिकता

गायत्री परिवार से जुड़े डॉ. चिन्मय पांड्या ने कहा कि संस्थान का मूल दर्शन समाज से विमुख होना नहीं, बल्कि समाज में रहकर मानव कल्याण और सामाजिक उत्थान के कार्यों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि वेद, उपनिषद और गीता से प्रेरणा लेते हुए संस्थान आधुनिक तकनीक को आत्मसात कर शिक्षा, प्रशिक्षण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए राष्ट्र धर्म की रक्षा अनिवार्य है।

आयोजन में शामिल प्रमुख व्यक्ति

इस भव्य आयोजन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह, विधायक मदन कौशिक सहित देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में गायत्री साधक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने यह प्रमाणित किया कि गायत्री परिवार का संदेश केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर आध्यात्मिक चेतना का विस्तार कर रहा है।

हरिद्वार का यह आयोजन भारतीय परंपराओं की जीवंतता और उनकी वैश्विक प्रासंगिकता का प्रतीक बन गया। गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के विचारों ने यह स्पष्ट किया कि सनातन संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है। गायत्री परिवार का शताब्दी समारोह इस बात का साक्षी बना कि जब व्यक्ति सुधरेगा, समाज सुधरेगा और राष्ट्र के साथ-साथ संपूर्ण मानवता का कल्याण सुनिश्चित होगा।

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