इंदौर में दूषित पानी का कहर जारी, दो और मौतों से 35 पर पहुंचा आंकड़ा, जांच आयोग गठित
इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौत का आंकड़ा 35 पर पहुंच गया है। हाई कोर्ट के आदेश पर जांच आयोग बना है।
इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार रात 75 वर्षीय शालिग्राम ठाकुर और मंगलवार सुबह दो साल की मासूम रिया की मौत के बाद इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। लगातार हो रही मौतों से इलाके में डर और गुस्सा दोनों गहराता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत 26 दिसंबर को हुई थी, जब उल्टी-दस्त से पहली मौत सामने आई। इसके बावजूद समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शुरुआती चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और प्रशासन की सुस्ती की वजह से कई जिंदगियां चली गईं।
अस्पतालों में अब भी कई मरीज भर्ती
दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में लोग डायरिया, उल्टी और पेट दर्द की चपेट में आए हैं। कई मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इलाके में मौजूद हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि राहत और इलाज की रफ्तार नाकाफी है।
हाईकोर्ट के आदेश पर जांच आयोग गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट के निर्देश पर गठित आयोग की अध्यक्षता एमपी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता कर रहे हैं।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
जांच आयोग यह पता लगाएगा कि पेयजल कैसे और किन कारणों से दूषित हुआ? किस स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही हुई? इस पूरे मामले के लिए कौन जिम्मेदार है? दोषियों पर किस तरह की कार्रवाई बनती है? दूषित पानी का लोगों की सेहत पर क्या असर पड़ा? साथ ही अब तक कितनी जनहानि हुई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं।
आयोग ने जारी की सूचना
आयोग ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना भी जारी की है। प्रभावित परिवारों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, डॉक्टरों, अस्पतालों, सामाजिक संगठनों, ठेकेदारों, सरकारी अधिकारियों और ऐसे किसी भी व्यक्ति से अपील की गई है, जिसके पास मामले से जुड़ी जानकारी, दस्तावेज या साक्ष्य हों।
आयोग ने कहा है कि आम लोगों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी से सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
12 किमी दूर खोला गया जांच आयोग ऑफिस
जिस भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौतों और गंभीर बीमारी के मामलों की जांच होनी है, उसी जांच आयोग का कार्यालय इलाके से करीब 12 किलोमीटर दूर खोल दिया गया है। प्रशासन की ओर से आयोग के लिए स्कीम नंबर-140 क्षेत्र में जगह उपलब्ध कराई गई है, जिससे अब पीड़ितों और उनके परिजनों को शिकायत दर्ज कराने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।भागीरथपुरा से स्कीम-140 तक का यह सफर अब चर्चा और सवालों का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है या जो खुद बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके लिए इतनी दूर जाकर अपनी बात रखना आसान नहीं होगा।