भोजशाला विवाद: SC ने बसंत पंचमी पर पूरे दिन पूजा की अनुमति, नमाज पर भी बोले

भोजशाला मामले में SC का बड़ा आदेश। बसंत पंचमी पर हिंदुओं को दिनभर पूजा, मुस्लिम पक्ष को 1–3 बजे नमाज की अनुमति।

Update: 2026-01-22 13:29 GMT

धारः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को धार की भोजशाला से जुड़े मामले में एक बड़ा अहम और संतुलित आदेश दिया। अदालत ने 23 जनवरी, यानी बसंत पंचमी के दिन, हिंदू को दिन निकलने से लेकर दिन ढलने तक मां सरस्वती की पूजा की परमिशन दी है। साथ ही मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की अनुमति दी है। इसके साथ ही प्रशासन को शांति बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान करने की पूरी छूट दी गई है। वहीं, मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति होगी। दोनों समुदायों के लिए परिसर के भीतर अलग-अलग स्थान और अलग प्रवेश-निकास मार्ग तय किए जाएंगे।

इस याचिका पर सुनाया फैसला

यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। अदालत ने प्रशासन को विशेष पास व्यवस्था लागू करने और कानून-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है।

मंगलवार को रहेगी पूरे दिन फ्री एंट्री

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू समुदाय को प्रत्येक मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक नि:शुल्क प्रवेश की अनुमति रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु पूजा के लिए एक-दो फूल और चावल के दाने साथ ले जा सकेंगे। अन्य दिनों में भोजशाला परिसर पर्यटकों के लिए खुला रहेगा, जहां प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति 1 रुपए होगा, जबकि 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा।

सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने बताया कि बसंत पंचमी पर दिनभर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। वहीं मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता, लेकिन नमाज के बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदायों से आपसी सम्मान और संयम बनाए रखने की अपील भी की।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

भोजशाला मामले में लगाई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि बसंत पंचमी शुक्रवार को है। ऐसे में प्रशासन को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हमने याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील सलमान खुर्शीद, भारत सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और मध्य प्रदेश राज्य की ओर से महाधिवक्ता को सुना। केएम नटराज ने ASI की ओर से भी पक्ष रखा। इसी प्रकार, आवेदक की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की दलीलें भी सुनी गईं।

एएसजी और महाधिवक्ता ने सुझाव दिया कि जब यह स्पष्ट हो जाए कि शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच जुमे की नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोग आने वाले हैं, तो उसी परिसर के भीतर एक अलग और विशिष्ट स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय में नमाज अदा की जा सके। इसी प्रकार, पूर्व प्रथा के अनुसार, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करने हेतु हिंदू समुदाय को भी अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए।

कलेक्टर ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा

कोर्ट के आदेश के बाद धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भोजशाला पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि आदेश की आधिकारिक प्रति मिलने के बाद सभी पक्षों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अलग-अलग व्याख्या न करने की अपील की है। फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर धार में करीब 8 हजार पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात किए गए हैं।

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