टीम मप्र भाजपा : वीडी के सामने सबको साधने की चुनौती !

  • शिवराज का मंत्रिमंडल तैयार, अब वीडी की टीम का इंतजार
  • युवा टीम पर फोकस

Update: 2020-07-19 02:30 GMT

भोपाल। शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार और विभाग वितरण के बाद भी भाजपा की आंतरिक राजनीति ठहरने का नाम नहीं ले रही। अब पार्टी के सामने एक और चुनौती उसके द्वारा संगठन को नई शक्ल देने की है, यहां गौरतलब यह है कि पिछले 5 सालों से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष तो बदले हैं, लेकिन उनकी टीम में किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिला। चूंकि इस बार के हालात पहले के हालात से काफी अलग हैं, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि विष्णुदत्त शर्मा की संभावित टीम पार्टी संगठन में एक तरह के बदलाव की द्योतक होगी, और तो और इसे अगर हम पीढ़ी परिवर्तन भी करार दें, तो इसमें कोई बेमानी नहीं होगी। भाजपा संगठन के इस विस्तार या यूं कहें नव निर्माण को लेकर पार्टी में आंतरिक स्तर पर कवायदों का दौर शुरू हो गया है, और इसे लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विष्णुदत्त शर्मा और सुहास भगत के बीच लंबा मंथन भी हो चुका है, इस बैठक में पार्टी के तीनों दिग्गजों ने संगठन विस्तार को लेकर एक ब्लू प्रिंट तैयार किया था, जिस पर संगठन को अंतिम शक्ल देने की कोशिशें जारी है। आइए अब जानते हैं, उन पहलुओं के बारे में जिनकी विष्णुदत्त शर्मा की नई टीम में प्रमुख छाप देखने को मिलेगी।

सबको साथ लेने और साधने की कोशिश

जिस तरह शिवराज मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को महत्व दिया गया, ठीक वैसे ही संगठन में भी पार्टी पर संबंधित धड़े को उपकृत करने का दबाव होगा, लेकिन इस दबाव से उबरते हुए किस तरह संगठन में पदों का विभाजन करना है, यह भी एक बड़ी चुनौती है। वह भी उस स्थिति में जब कांग्रेस से पलायन कर नये पूर्व विधायक पार्टी से जुड़ रहे हैं। हालांकि भाजपा की मंशा सिंधिया समर्थकों को उपचुनाव में मजबूती से जोड़ने की है। लेकिन अपने पुराने साथियों की इच्छाओं का ध्यान रखना भी पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी है। अतः विष्णुदत्त शर्मा सिंधिया को साधते हुए अपने पुराने साथियों को संगठन में अहम पद देकर उपकृत कर सकते हैं। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की कोशिश करेंगे, चूंकि संगठन कार्यकारिणी में मंत्रिमंडल की तरह किसी तरह की संख्या सीमा निर्धारित नहीं है, ऐसे में पार्टी के ऐसे वरिष्ठ नेता भी संगठन में शामिल हो सकते हैं, जो किसी कारण से मंत्री नहीं बन सके।

युवा टीम पर फोकस

वर्तमान राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत विचार-विमर्श कर रहे हैं। वे ऐसी टीम बनाएंगे, जो आने वाली चुनौतियों, चुनाव और संगठन को मजबूत करने की दिशा में बेहतर काम करेगी। पार्टी सूत्रों की मानें, तो भाजपा संगठन इस बार अपने युवा रूप में सामने आ सकता है । खबर तो यह तक है, कि पार्टी द्वारा अहम जिम्मेदारी भी युवा सदस्यों के कंधों पर ही डाली जाएंगी। शायद यही कारण हैं, कि विष्णुदत्त शर्मा की नई टीम को भाजपा के पीढ़ी परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है।

जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण पर फोकस

जातिगत और भौगोलिक संतुलन के साथ-साथ गुटीय संतुलन की भी रणनीति तय की जा रही है। गौरतलब है कि प्रदेश संगठन में पिछले पांच वर्षों से नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने नंदकुमार सिंह चौहान की टीम के साथ ही काम किया था। 2015 के बाद अब प्रदेश भाजपा की नई टीम तैयार होगी। खबर है, कि भाजपा के संगठन में महाकौशल क्षेत्र को अधिक महत्व दिए जाने की संभावना है, इसके पीछे की मुख्य वजह मंत्रिमंडल में इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व न मिलना भी है। मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज महाकौशल नेताओं को संगठन में समाहित किया जा सकता है। एक तरफ जहां विधायकों और सांसदों को मौका न मिले, उसके चलते महाकौशाल के नेताओं को समाहित करना चुनौती है, तो दूसरी तरफ विधायकों की गाइड लाइन को लिया जाता है, तो इसमें सर्वाधिक प्रतिनिधित्व महाकौशल का रहेगा, इसमें संदेह नही है। लेकिन महाकौशल को प्रतिनिधित्व देने के लिए संभावना है कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों खास कर ग्वालियर-चम्बल अंचल को नई कार्यकारिणी में उतना स्थान न मिल पाए जितना अब तक मिलता रहा।

नाराज नेताओं को मिलेगा यथोचित सम्मान

मध्यप्रदेश की राजनीति में बदले राजनीतिक परिवेश में सबसे अधिक प्रभावित अगर कोई हुआ है, तो वह है, भाजपा के वह नेता या यूं कहें वह विधायक जो कहीं न कहीं शिवराज मंत्रिमंडल में स्थान पाने के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन संगठन के फैसले के आगे उन्हें अपनी इच्छाओं का मारना पड़ा। अब इनकी कोशिश होगी कि संगठन में इन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिले। परन्तु इनका संगठन में कैसे और कहां उपयोग किया जाए इस पर भी विचार किया जा रहा है। जो उम्मीद लगाए हैं कि संगठन में उन्हें काम मिलेगा। पार्टी की कोशिश है, कि ऐसे नेताओं को खुद से बांधकर रखा जा सके, जिन्हें उपकृत करते हुए पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपने की कवायद चल रही है।

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