देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों को स्वावलंबी बनाना आवश्यक : नरेंद्र सिंह तोमर

Update: 2020-08-31 11:51 GMT

नईदिल्ली।  देश को आत्मनिर्भर बनाने में देश के गांवों को स्वावलंबी बनाना आवश्यक है। इसके लिए ग्राम पंचायत में सुशासन, ग्रामों का विकास, ग्रामिण इलाकों में अधोसंरचना का विकास और रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। इस दिशा में भारत सरकार ने कई प्रयास किए हैं। यह बात ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने "गांवों की आत्मनिर्भरता तथा पंचायती राज" विषयक राष्ट्रीय ई-सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।   

उन्होंने कहा कि ग्रामों में सामुदायिक भाव ग्राम विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जिन ग्रामों में सामुदायिक भाव प्रबल है वहां सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सरल हो जाता है।तीसरी सरकार अभियान की ओर आयोजित किए गए इस वेबिनार में तोमर ने कहा कि केन्द्र सरकार ने ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक सुधार की दिशा में कई प्रयास किए हैं। अब ज्यादातर ग्रामों में सचिवों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि आज के समय में ग्राम पंचायतों के पास धन का अभाव नहीं रहा है। पिछले पांच सालों में सरकार ने ग्राम पंचायतों को 2 लाख 292 करोड़ रुपये जारी किए हैं। केन्द्रीय वित्त आयोग व राज्य वित्त आयोग से पंचायतों को धन का आवंटन हुआ है। मनरेगा का भी कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से हो रहा है।

ग्राम स्वराज्य का सपना अधूरा -

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि सरकार सौभाग्य योजना के माध्यम से बिजली, उज्जवला योजना के माध्यम से गैस और आवास योजना के माध्यम से लोगों को घर मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामों में रोजगार और आजीविका के साधन बढ़ाने की जरूरत है और उसके लिए स्वयं सहायता समूहों का भी सहयोग जरूरी है। कार्यक्रम में अध्यक्ष के तौर पर सम्मिलित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि गांधी जी के ग्राम स्वराज्य का सपना अधूरा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर धीरे-धीरे अपने प्रयासों से इस सपने को पूरा करने में लगे हुए हैं।

ग्रामों में न्याय पंचायतों का प्रावधान 

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को पंचायतों को स्व सरकार के रूप में परिभाषित करना चाहिए। हमें राज्य वित्त आयोग की ओर से दी जा रही सिफारिशों पर भी ध्यान देना चाहिए। जम्मू-कश्मीर के पंचायती कानून को बेहतरीन बताते हुए उन्होंने कहा कि पंच व सरपंचों पर कार्रवाई करने के लिए देशभर लोकपाल का गठन किया जाना चाहिए। इसे राज्य सरकारों पर नहीं छोड़ना चाहिए। रामबहादुर राय ने यह भी सुझाव दिया कि ग्रामों में न्याय पंचायतों का प्रावधान होना चाहिए। पंचायतों के लिए अलग से काडर बनाया जाना चाहिए और 73वें संविधान संशोधन में रही कमियों को पूरा करने के लिए संविधान संशोधन किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर एनआईआरडी एंड पीआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. डब्ल्यू आर रेड्डी ने कहा कि हमें गांवों में प्राकृतिक और मानव संसाधन का पूरा उपयोग करना चाहिए। इसके लिए किसी नियम आधारित व्यवस्था पर न चलते हुए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार रणनीति बनाकर काम करना चाहिए। केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर जनक पांडे ने कहा कि संसाधनों के विकास, सामुहिक भावना और प्रशासनिक व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने में सक्षम हैं। मिशन स्मृद्धि के संस्थापक अरूण जैन ने कहा कि गांवों की जीडीपी की अवधारणा विकसित कर हमें काम करना चाहिए और माइक्रो इकोनोमिक्स जोन पर विचार करना चाहिए।

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