अंबरनाथ नगर परिषद में BJP ने शिवसेना के बजाय कांग्रेस को क्यों चुना?
महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया।
नई दिल्लीः महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में सियासत ने एक बार फिर चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। कांग्रेस के खिलाफ देशभर में आक्रामक रुख रखने वाली भाजपा ने ठाणे जिले में ऐसा दांव चला है जिसने न सिर्फ सियासी हलकों को चौंका दिया है, बल्कि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को भी बड़ी असहजता में डाल दिया है। बीजेपी ने कांग्रेस के साथ मिलकर एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया है।
दरअसल, मुंबई से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस-बीजेपी एक साथ आ गए हैं। यह अप्रत्याशित गठबंधन राज्य की राजनीति में हलचल का कारण बन गया है। इस सियासी फैसले ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता की गणित, वैचारिक मतभेदों पर भारी पड़ रही है।
शिंदे गुट का गढ़, फिर भी हाथ से फिसली सत्ता
अंबरनाथ नगर परिषद को लंबे समय से शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे इसी क्षेत्र से आते हैं। हालिया नगर परिषद चुनाव में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी।
बहुमत से चूकने के बाद शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर परिषद में सरकार बनाने की कोशिश शुरू की। माना जा रहा था कि दोनों सहयोगी दल मिलकर आसानी से सत्ता संभाल लेंगे, लेकिन यहीं पर राजनीति ने अचानक करवट ले ली।
बीजेपी ने बदली चाल, कांग्रेस को थाम लिया हाथ
अंतिम समय में बीजेपी ने शिवसेना के बजाय कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। कांग्रेस-बीजेपी की इस नई युति के दम पर अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता का गठन हुआ और बीजेपी के पार्षद को नगराध्यक्ष चुना गया। यह फैसला शिंदे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ।
शिवसेना में नाराजगी, ‘अभद्र युति’ का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिंदे गुट की शिवसेना में नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। शिंदे समर्थक विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन को “अभद्र युति” करार देते हुए तीखा हमला बोला है। वहीं सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए इस सियासी फैसले पर असंतोष जताया है।
बीजेपी की सफाई: जवाब नहीं मिला, इसलिए फैसला
बीजेपी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि शिवसेना से गठबंधन को लेकर कई बार बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। पार्टी के उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल के अनुसार, लंबे इंतजार और अनिश्चितता के बाद बीजेपी को वैकल्पिक राजनीतिक रास्ता अपनाना पड़ा।
स्थानीय राजनीति में बदलेगी तस्वीर?
अंबरनाथ नगर परिषद में बना यह नया समीकरण संकेत दे रहा है कि महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में अब विचारधाराओं से ज्यादा महत्व सत्ता की गणित को दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में नगर निगम और परिषद चुनावों में ऐसे और भी चौंकाने वाले गठबंधन देखने को मिल सकते हैं।