राष्ट्रीय युवा दिवस पर बिलासपुर में बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड, 1500 बच्चे विवेकानंद बनकर रचेंगे इतिहास

राष्ट्रीय युवा दिवस पर बिलासपुर में 1500 बच्चे स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में वंदे मातरम् गाकर विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे।

Update: 2026-01-11 11:32 GMT

बिलासपुरः पूरे देश में 12 जनवरी के दिन स्वामी विवेकानंदर की जयंती रहती है। इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के पूर में मनाया जाता है। इसी कार्यक्रम पर इस बार बिलासपुर इतिहास रचने जा रहा है। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर शहर में ऐसा नज़ारा देखने को मिलेगा, जो पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचेगा। उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव के नेतृत्व में 1500 से अधिक बच्चे स्वामी विवेकानंद जी की वेशभूषा में एक साथ वंदे मातरम् का गान कर विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि राष्ट्रीय युवा दिवस पूरे देश में उत्साह और ऊर्जा के साथ मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कहीं स्वदेशी दौड़ होगी तो कहीं युवाओं को सम्मानित करने के लिए युवा रत्न अवॉर्ड प्रदान किए जाएंगे।

पुलिस ग्राउंड में होगा ऐतिहासिक

डिप्टी सीएम ने बताया कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग की अगुवाई में बिलासपुर के पुलिस ग्राउंड में यह ऐतिहासिक आयोजन होगा। यहां 1500 से ज्यादा स्कूली बच्चे स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा पहनकर एक साथ वंदे मातरम् का गान करेंगे। इसी दौरान सभी बच्चे नशे से दूर रहने की शपथ भी लेंगे, ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा सके।

मैदान में तैयार होगी विवेकानंद का चित्र

कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए पुलिस ग्राउंड में करीब 5500 स्क्वायर फीट की विशाल और रंग-बिरंगी रंगोली के जरिए स्वामी विवेकानंद जी का भव्य चित्र तैयार किया जा रहा है। वहीं कंपनी गार्डन, बिलासपुर में स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

गौरव का गवाह बनेगा छत्तीसगढ़

डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस पर होने वाला यह आयोजन न सिर्फ बिलासपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। इस विश्व रिकॉर्ड के जरिए बिलासपुर देशभर में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। बता दें कि 12 जनवरी का दिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसको मनाने का उद्देश्य विवेकानंद के ओजस्वी विचारों और उनके आदर्शों को युवाओं तक पहुंचाना है। 1984 में भारत सरकार ने इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी।

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