महादेव सट्टा ऐप ऐसा था कि दांव लगाने वाले का अंत में हारना तय था
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव सट्टा ऐप मामले में आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर ली है. यह संपत्ति महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज डॉट कॉम के संचालकों और उनके रिश्तेदारों के नाम पर है।
ईडी के बयान के अनुसार, परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट और एक्सिम जनरल ट्रेडिंग के नाम पर रखे गए कुल 74 करोड़ 28 लाख 87 हजार 483 रुपए के बैंक बैलेंस अटैच किए गए हैं। ये कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया के नियंत्रण में थीं, जो अपराध से प्राप्त धन को छिपाने और निवेश के तौर पर दिखाने के लिए काम कर रही थीं।
स्काई एक्सचेंज के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति भी जब्त की गई है। अटैच की गई संपत्ति में उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी महंगी रियल एस्टेट और नकद खरीदी गई लिक्विड संपत्तियां शामिल हैं।
शेयर मार्केट में बड़ा खेल
ईडी की जांच में एक जटिल 'कैशबैक' योजना भी सामने आई है, जिसमें ये कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी निवेश करती थीं। इसके बदले प्रमोटर्स को निवेश का 30 से 40 प्रतिशत कैशबैक दिया जाता था। इसी योजना के तहत गगन गुप्ता ने सलासार टेक्नोलॉजीज इंजीनियरिंग और टाइगर लॉजिस्टिक्स जैसी कंपनियों से कम से कम 98 करोड़ रुपए की कमाई की।
175 से अधिक स्थानों पर रेड, 13 गिरफ्तार
अब तक ईडी ने 175 से अधिक जगहों पर छापेमारी की है, जिसमें लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को जब्त, फ्रीज या अटैच किया गया है। इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अवैध कमाई बेनामी खातों में भेजी गई
जांच में यह भी पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सचेंज जैसे अवैध बेटिंग ऐप्स से भारी मात्रा में अवैध कमाई की गई। इस धन को जटिल बेनामी बैंक खातों के नेटवर्क के जरिए लॉन्डर किया गया।
सौरभ चंद्राकर और अन्य आरोपियों ने इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जनता को धोखा दिया। इस एप्लिकेशन के जरिये अवैध बेटिंग वेबसाइटों को कस्टमर जुटाने और फाइनेंशियल ऑपरेशन चलाने में मदद मिली। साइटों को इस तरह से नियंत्रित किया गया कि सभी ग्राहक अंत में पैसे हार जाएं, जिससे हजारों करोड़ रुपए जमा किए गए और प्रॉफिट शेयरिंग के तरीके से बांटे गए।
बैंक अकाउंट खोलने में जाली या चोरी किए गए केवाईसी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया। अवैध धन को कई स्तरों में बांटा गया ताकि स्रोत छुपा रहे। इन ट्रांजैक्शनों का कोई हिसाब नहीं रखा गया और टैक्स भी नहीं दिया गया।
कमाए गए पैसे हवाला चैनलों, ट्रैड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो एसेट्स के माध्यम से विदेश भेजे गए और बाद में उन्हें विदेशी भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया।