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Tax Harvesting: Smart Way to Save Tax

टैक्स हार्वेस्टिंग-कर बचाने का कारगर उपाय

टैक्स हार्वेस्टिंग एक निवेश रणनीति है जिससे शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में सही समय पर खरीद-फरोख्त कर कैपिटल गेन टैक्स कम किया जा सकता है।


टैक्स हार्वेस्टिंग-कर बचाने का कारगर उपाय

जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने को है, वैसे-वैसे निवेशक अपने मुनाफे के साथ-साथ आयकर बचत के तरीकों पर भी ध्यान देने लगते हैं। असल में 31 मार्च से पहले बनाई गई योजना कई बार निवेशकों को अच्छा-खासा टैक्स बचाने में मदद कर सकती है। इसी योजना को टैक्स हार्वेस्टिंग कहा जाता है।

इक्विटी निवेश में आता है काम

यह निवेश से जुड़ी एक ऐसी रणनीति है, जिसमें निवेशक सही समय पर अपने शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचकर मुनाफा या नुकसान बुक करते हैं, ताकि कुल टैक्स देनदारी कम की जा सके। अगर इसे सही तरीके से अपनाया जाए, तो यह टैक्स प्लानिंग का काफी असरदार विकल्प बन सकता है।सरल भाषा में समझें तो टैक्स हार्वेस्टिंग का मतलब है टैक्स बचाने के लिए सही समय पर निवेश बेचना और फिर दोबारा निवेश करना। जब निवेशक शेयर या म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो उस पर होने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन कहा जाता है। यही कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आता है। लेकिन अगर निवेशक योजना के साथ खरीद-फरोख्त करें, तो वे अपने टैक्स को काफी हद तक कम कर सकते हैं। असल में टैक्स हार्वेस्टिंग मुख्य रूप से दो तरह की होती है।

टैक्स-गेन हार्वेस्टिंग

टैक्स-गेन हार्वेस्टिंग उस समय की जाती है, जब निवेशक मुनाफे को सही समय पर बुक करते हैं। अगर किसी शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाता है, तो उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लागू होता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक धारा 112ए के तहत सालाना 1.25 लाख रुपये तक का एलटीसीजी टैक्स-फ्री है।

इसका मतलब है कि अगर आपका कुल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन इस सीमा के अंदर है, तो आप अपने निवेश को बेचकर मुनाफा बुक कर सकते हैं और बाद में फिर से निवेश कर सकते हैं। इससे आपकी खरीद कीमत दोबारा नए सिरे से मानी जाती है, जिससे भविष्य में टैक्स का बोझ कम हो सकता है।

टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग कैसे काम करती है

टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग में निवेशक उन शेयरों या फंड्स को बेचते हैं, जिनमें उन्हें नुकसान हो रहा होता है। यह नुकसान दूसरे मुनाफे के खिलाफ सेट-ऑफ किया जा सकता है, जिससे कुल कर देनदारी कम हो जाती है।

इससे जुड़े कुछ जरूरी नियम इस प्रकार हैं.

  • शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के मुनाफे से समायोजित किया जा सकता है।
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को केवल लॉन्ग टर्म मुनाफे से ही समायोजित किया जा सकता है।
  • अगर नुकसान ज्यादा है, तो उसे आने वाले 8 वर्षों तक कैरी फॉरवर्ड भी किया जा सकता है।
     

टैक्स हार्वेस्टिंग कैसे करें

  • अगर आप टैक्स हार्वेस्टिंग का फायदा लेना चाहते हैं, तो इन बातों पर ध्यान दें.
  • सबसे पहले अपने सभी निवेश की होल्डिंग अवधि देखें।
  • तय करें कि आपका मुनाफा शॉर्ट टर्म है या लॉन्ग टर्म।
  • अपने कुल कैपिटल गेन का सही हिसाब लगाएं।
  • अगर एलटीसीजी 1.25 लाख रुपये के अंदर है, तो उसे बुक करने पर विचार करें।
  • जिन निवेशों में नुकसान हो रहा है, उन्हें पहचानें और जरूरत पड़ने पर बेचकर नुकसान बुक करें।
  • आखिर में इन सभी लाभ और हानि को आयकर रिटर्न में सही तरीके से दर्ज करें।

इन बातों का रखें ध्यान

टैक्स हार्वेस्टिंग करते समय सबसे जरूरी है कि आप अपने निवेश की होल्डिंग अवधि और कर नियमों को अच्छी तरह समझें। अगर आपका लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये से कम है, तो उस पर टैक्स नहीं लगता। ऐसे में कई बार टैक्स बचाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।लेकिन अगर आपका मुनाफा इस सीमा से ज्यादा है, तो टैक्स हार्वेस्टिंग की योजना अपनाकर टैक्स का बोझ कम किया जा सकता है।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह योजना

टैक्स हार्वेस्टिंग केवल टैक्स बचाने का तरीका ही नहीं है, बल्कि यह एक सजग निवेश रणनीति का हिस्सा भी है। अगर निवेशक साल के अंत में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और सही समय पर प्रॉफिट या लॉस बुक करें, तो वे अपनी कर देनदारी कम करने के साथ-साथ अपने निवेश को बेहतर तरीके से प्रबंधित भी कर सकते हैं।

नोट: टैक्स नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। इसलिए निवेश से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना बेहतर माना जाता है।