1897 में बड़ौदा के महाराजा का मेनू सामने आया, लेकिन अब यह मेनू क्यों फेमस हो रहा है?
इतिहास कभी-कभी सबसे अप्रत्याशित जगहों पर छिपा होता है। यहाँ तक कि खाने के मेनू में भी। हाल ही में, इतिहासकार और मुगल साउथ एशिया एक्सपर्ट नेहा वर्मानी ने पाक इतिहास की झलक को दिखाते हुए एक मेनू में शेयर किया है। जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दरअसल, वह 1897 के इतिहास में खान-पान संस्कृति की छानबीन कर रही थी। इस दौरान उन्हें 31 जनवरी 1897 का एक मेनू मिला, जो बड़ौदा के महाराजा द्वारा ग्वालियर के महाराजा सिंधिया के सम्मान में आयोजित भोज का था।
कहां हुआ था ये भोज आयोजित
ये शाही भोज 31 जनवरी 1897 को ब्रिटिश शासनकाल के समय गुजरात के लक्ष्मी विलास पैलेस में हुआ था। मेनू देखकर लगता है कि ये फ्रेंच हाई लेवल रेसिपीज़ और भारतीय शाही फ्लेवर का एकदम अनोखा मिक्सचर था। नेहा वर्मानी ने लिखा, बड़ौदा के महाराजा द्वारा ग्वालियर के महाराजा के लिए आयोजित 19वीं सदी का ये डिनर, ट्रफल, आर्टिचोक और ढेर सारे फ्रेंच डिशेज़ से भरा हुआ है। इसकी शायद किसी ने उम्मीद भी नहीं की होगी।
मेनू में शामिल थे ये खास डिशेज़:
- आयोटेज डी'अमांडेस – बादाम से बना हल्का कस्टर्ड, स्टार्टर के लिए।
- पोइसन ब्रेज़ सॉस मेयोनेज़ – फिश को क्रीमी मेयोनेज़ सॉस में कुक किया गया।
- क्रेम डे वोलाइल ट्रफल्स – ट्रफल्स से भरा शानदार चिकन क्रीम सूप।
- कोटेलेट्स डे मौटन ए ल'इटैलियन – हर्ब्स और हल्के मसालों के साथ इटालियन स्टाइल मटन कटलेट्स।
- Selle de Perdreau Rotie aux Petits Pois – ताजी मटर के साथ रोस्टेड टीतर।
- Fonds d'Artichauts a la Demi-Glace – आर्टिचोक बॉटम्स को फ्रेंच ब्राउन सॉस में कुक किया गया।
- Curry de Macedoine de Legumes et Ris – मिक्स्ड वेजिटेबल और राइस करी।
- पोमेस ए ला क्रेम – क्रीमी एप्पल्स, उबाले या बेक किए हुए।
- ग्लासे डे पिस्ताचू – पिस्ता आइसक्रीम।
नेहा वर्मानी ने बताया कि ये रेयर मेनू अब अमेरिका के एक आर्काइव में सेफ रखा गया है।
ये मेनू आजकल क्यों वायरल हो रहा है?
इस मेनू की पॉपुलैरिटी के पीछे कई कारण हैं। इसका इतिहास और शाही ठाठ लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लोग देखना चाहते हैं कि 19वीं सदी के महाराजों के डिनर कैसे होते थे। फ्रेंच डिशेज़ और भारतीय शाही टच का कॉम्बो सोशल मीडिया पर लोगों को सरप्राइज कर रहा है।130 साल पुराना यह मेनू अब अमेरिका के आर्काइव में सुरक्षित है, जो इसकी यूनिकनेस को और बढ़ा देता है।
यह मेनू सिर्फ खाना नहीं है, बल्कि उस समय के शाही जीवन, एलीट कल्चर और ग्लोबल कनेक्शन की झलक भी दिखाता है। 130 साल बाद भी यह मेनू इतिहास और फूड लवर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।