RBI ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। 1 जुलाई से जबरन बिक्री, डार्क पैटर्न और तय समय से बाहर कॉल पर रोक लागू होगी।
नई दिल्ली। अब लोन के साथ बीमा या म्यूचुअल फंड जबरन थमाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मिस-सेलिंग यानी गलत तरीके से वित्तीय उत्पाद बेचने पर अंकुश लगाने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। मसौदे में डार्क पैटर्न, जबरन बंडलिंग और ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना बिक्री पर सख्त प्रतिबंध का प्रस्ताव है।
सभी रेगुलेटेड संस्थाओं पर लागू होंगे नियम
ये प्रस्तावित नियम सभी विनियमित संस्थाओं पर लागू होंगे। इनमें सामान्य बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंक, वित्तीय संस्थान, एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं।
RBI ने मसौदे पर 4 मार्च तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझावों पर विचार के बाद अंतिम नियम जारी होंगे और 1 जुलाई से इन्हें लागू किया जाएगा। इसके बाद वित्तीय उत्पादों की बिक्री की प्रक्रिया में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।
जुलाई से लागू होंगे ये बड़े बदलाव
1. जबरन बंडलिंग पर रोक:
कोई भी बैंक लोन के साथ बीमा, म्यूचुअल फंड या अन्य थर्ड-पार्टी उत्पाद अनिवार्य रूप से जोड़कर नहीं बेच सकेगा।
2. हर प्रोडक्ट के लिए अलग सहमति:
यदि ग्राहक को एक से अधिक उत्पाद बेचे जा रहे हैं तो प्रत्येक उत्पाद के लिए अलग-अलग स्पष्ट सहमति लेनी होगी। एक साथ सामूहिक कंसेंट मान्य नहीं होगा।
3. पूरी और साफ जानकारी देना अनिवार्य:
प्रचार सामग्री स्पष्ट और तथ्यात्मक होगी। शुल्क, फीस और अन्य सभी चार्ज की जानकारी पहले से देना जरूरी होगा।
4. 30 दिन में फीडबैक अनिवार्य:
हर बिक्री के बाद बैंक और वित्तीय संस्थानों को 30 दिनों के भीतर ग्राहक से प्रतिक्रिया लेनी होगी।
5. डार्क पैटर्न पर सख्ती:
मोबाइल एप या वेबसाइट पर पहले से टिक किए गए बॉक्स या भ्रामक डिजाइन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
6. तय समय में ही सेल्स कॉल:
बैंक कर्मचारी या अधिकृत एजेंट सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही, और ग्राहक की अनुमति लेकर ही कॉल या मुलाकात कर सकेंगे।
गलत बिक्री पर पूरा रिफंड और मुआवजा
यदि यह साबित होता है कि किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर या बिना स्पष्ट सहमति के उत्पाद बेचा गया है, तो संबंधित संस्था को पूरा पैसा लौटाना होगा। इसके अलावा मुआवजा भी देना पड़ेगा।
RBI के अनुसार, थर्ड-पार्टी उत्पादों की बिक्री, एजेंटों की गतिविधियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के जरिए मिस-सेलिंग की शिकायतें बढ़ रही थीं। इसी वजह से सभी बैंकों और एनबीएफसी के लिए एक समान और व्यापक नियमों की जरूरत महसूस की गई।
नए नियम लागू होने के बाद ग्राहकों को अधिक पारदर्शिता मिलेगी। बैंकों को अपनी वेबसाइट पर अधिकृत एजेंटों की अद्यतन सूची जारी करनी होगी और बैंक परिसर में एजेंटों की अलग पहचान भी स्पष्ट रूप से दर्शानी होगी।