आरबीआई ने डिजिटल फ्रॉड से पीड़ित ग्राहकों के लिए नया मुआवजा मॉडल प्रस्तावित किया है। 50 हजार रुपये तक की ऑनलाइन ठगी पर 25 हजार रुपये तक मुआवजा मिल सकता है, साथ ही बैंकों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट के तेजी से बढ़ते दौर में ऑनलाइन ठगी भी बड़ी चिंता बनती जा रही है। ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर एक अहम कदम उठाया है। आरबीआई ने डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव का एक ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें छोटे मूल्य के ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस नए फ्रेमवर्क का मकसद यह है कि डिजिटल बैंकिंग में लोगों का भरोसा मजबूत हो और बैंकों की जवाबदेही भी तय हो।
6 अप्रैल तक दे सकेंगे सुझाव
आरबीआई की ओर से जारी ड्राफ्ट के मुताबिक आम लोग और संस्थाएं 6 अप्रैल 2026 तक इस पर अपने सुझाव भेज सकते हैं। इसके बाद अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे। अगर सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ तो यह नए नियम 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू हो सकते हैं।
अब बैंक को साबित करनी होगी ग्राहक की गलती
ड्राफ्ट में सबसे अहम बदलाव यह है कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में सबूत जुटाने की जिम्मेदारी अब बैंक पर होगी। यानी बैंक को यह साबित करना पड़ेगा कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही से हुई है। ठगी बैंकिंग सिस्टम की किसी कमी से नहीं हुई है। इसके अलावा 'अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन' की परिभाषा को भी व्यापक किया गया है। अब जबरदस्ती या धोखे से करवाए गए भुगतान भी इसके दायरे में आएंगे।
इन मामलों में ग्राहक की होगी ‘जीरो लायबिलिटी’
आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार कुछ स्थितियों में ग्राहक को पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाएगा। अगर फ्रॉड बैंक की तकनीकी गलती या लापरवाही से हुआ हो। अगर किसी तीसरे पक्ष की गलती से नुकसान हुआ हो और ग्राहक 5 दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना दे दे। ऐसे मामलों में ग्राहक पर किसी भी तरह की वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी।
इतनी रकम तक के फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा
ड्राफ्ट में पहली बार छोटे डिजिटल फ्रॉड के लिए एक खास मुआवजा मॉडल भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत यदि किसी ग्राहक के साथ 50 हजार रुपये तक की ऑनलाइन ठगी होती है तो उसे उसके शुद्ध नुकसान का 85% तक मुआवजा मिल सकता है। हालांकि अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये होगी।
मुआवजा पाने की शर्तें
यह लाभ किसी व्यक्ति को जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगा। फ्रॉड की शिकायत 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों पर दर्ज करनी होगी।
मुआवजे का गणित भी तय
आरबीआई ने मुआवजे का गणित भी स्पष्ट किया है। यदि नुकसान 29,412 रुपये से कम है तो मुआवजे का लगभग 65% हिस्सा RBI देगा और बाकी हिस्सा ग्राहक के बैंक और लाभार्थी बैंक मिलकर देंगे। वहीं, 29,412 से 50,000 रुपये तक के नुकसान के मामलों में कुल मुआवजा 25 हजार रुपये तक सीमित रहेगा।
SMS अलर्ट और 24x7 शिकायत व्यवस्था
ग्राहकों की सुरक्षा के लिए आरबीआई ने बैंकों को कुछ सख्त निर्देश भी प्रस्तावित किए हैं-
500 रुपये से अधिक के हर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर तुरंत SMS अलर्ट भेजना होगा
डिजिटल फ्रॉड की शिकायत के लिए 24x7 हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराना होगा
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह नियम लागू होते हैं तो डिजिटल बैंकिंग में लोगों का भरोसा और बढ़ सकता है। साथ ही बैंकों को भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ेगी।