क्या आप जानते हैं कि घर में यूज किए जाने वाला सिलेंडर लाल रंग का ही क्यों होता है? और सिलेंडर लाल के अलावा सफेद, नीले, काले, भूरे रंग के भी होते हैं। इसकी वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान..
रसोई में रखा लाल रंग का गैस सिलेंडर हर घर में आम चीज है। सुबह की चाय हो या रात का खाना, एलपीजी सिलेंडर के बिना घर का काम रुक सा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर लाल के अलावा नीले, सफेद, काले या ग्रे रंग के भी दिखाई देते हैं?
जी हां, असल में गैस सिलेंडरों के अलग-अलग रंग कोई संयोग नहीं होते। यह एक तरह का सुरक्षा संकेत (सेफ्टी कोड) होता है, जिससे दूर से ही पता चल जाता है कि सिलेंडर के अंदर कौन-सी गैस भरी है। इससे गैस के इस्तेमाल और संभालने में सावधानी बरतना आसान हो जाता है।
लाल रंग का सिलेंडर – घरों में इस्तेमाल होने वाली LPG
भारत में घरों की रसोई में सबसे ज्यादा लाल रंग का सिलेंडर दिखाई देता है। इसमें एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) भरी होती है, जिसका उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है। एलपीजी जल्दी आग पकड़ सकती है, इसलिए खतरे के संकेत के तौर पर सिलेंडर को लाल रंग दिया जाता है।
सफेद रंग का सिलेंडर – मेडिकल ऑक्सीजन
अस्पतालों और एंबुलेंस में अक्सर सफेद रंग के सिलेंडर नजर आते हैं। इनमें ऑक्सीजन गैस भरी होती है, जो मरीजों के इलाज और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी होती है।
नीला रंग – नाइट्रस ऑक्साइड गैस
नीले रंग के सिलेंडरों में आमतौर पर नाइट्रस ऑक्साइड गैस रखी जाती है। इसे ‘लाफिंग गैस’ भी कहा जाता है। डॉक्टर और डेंटिस्ट मरीजों को दर्द से राहत देने या हल्का एनेस्थीसिया देने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
काला रंग – नाइट्रोजन गैस
काले रंग के सिलेंडरों में नाइट्रोजन गैस होती है। यह गैस सामान्य परिस्थितियों में ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं करती, इसलिए इसका इस्तेमाल उद्योगों, फूड पैकेजिंग और कई तकनीकी कामों में किया जाता है।
ग्रे रंग – कार्बन डाइऑक्साइड
अगर कहीं आपको स्लेटी या ग्रे रंग का सिलेंडर दिखे तो उसमें अक्सर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस होती है। इसका उपयोग आग बुझाने वाले यंत्रों और सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली फैक्ट्रियों में किया जाता है।
भूरा रंग – हीलियम गैस
मेले या पार्टी में उड़ते रंग-बिरंगे गुब्बारों के पीछे भी सिलेंडर का ही योगदान होता है। इन गुब्बारों को उड़ाने के लिए हीलियम गैस इस्तेमाल होती है, जिसे आमतौर पर भूरे रंग के सिलेंडर में रखा जाता है।
क्यों जरूरी है सिलेंडर का रंग कोड
गैस सिलेंडरों के रंग केवल पहचान के लिए नहीं होते, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। रंग देखकर ही तुरंत समझा जा सकता है कि सिलेंडर में कौन-सी गैस भरी है और उसके इस्तेमाल में किस तरह की सावधानी रखनी चाहिए। इसलिए अगली बार अगर आपको किसी अलग रंग का सिलेंडर दिखाई दे, तो समझ जाइए कि वह किसी खास गैस को स्टोर करने के लिए बनाया गया है।