एक समय महज ₹1200 के उधार से कारोबार शुरू करने वाले राजेश मेहता आज देश के सबसे चर्चित कारोबारी नामों में शामिल हैं। लेकिन अब वही कारोबारी सेबी की सख्त कार्रवाई के बाद सुर्खियों में हैं। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने जूलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया है। आरोप है कि कंपनी ने कई वर्षों तक वित्तीय आंकड़ों को लेकर गंभीर अनियमितताएं कीं और निवेशकों के सामने वास्तविक तस्वीर पेश नहीं की।
मामले का असर शेयर बाजार तक पहुंचा है। कंपनी के शेयर लोअर सर्किट पर पहुंचे, जबकि कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली एलआईसी पर भी इसका असर दिखाई दिया।
सेबी की जांच में क्या सामने आया
सेबी की प्रारंभिक जांच के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के बीच अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू से जुड़े आंकड़ों में भारी विसंगतियां दिखाई हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी द्वारा दिखाए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया हो सकता है। कथित तौर पर यह आंकड़ा करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू से जुड़ा है। यही वजह है कि मामला अब देश के बड़े कॉर्पोरेट विवादों में गिना जा रहा है।
कभी 1200 से शुरू हुई थी कारोबारी यात्रा
राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पारिवारिक जूलरी कारोबार में कदम रखा। 1980 के दशक में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के आभूषणों का व्यापार शुरू किया। कारोबार की शुरुआत के लिए दोनों भाइयों ने अपने बड़े भाई से सिर्फ 1200 रुपये उधार लिए थे। उस दौर में जूलरी कारोबार काफी हद तक असंगठित था। इसके बावजूद दोनों भाइयों ने धीरे-धीरे दक्षिण भारत, गुजरात और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में अपनी पहचान बना ली।
आईपीओ से लेकर वैश्विक विस्तार तक
साल 1995 कंपनी के लिए बड़ा मोड़ साबित हुआ। राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर बाजार में कदम रखा और आईपीओ के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने गोल्ड वैल्यू चेन के लगभग हर हिस्से में विस्तार किया। रिफाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल कारोबार को जोड़ते हुए कंपनी ने अपनी पहुंच लगातार बढ़ाई।
साल 2015 में कंपनी ने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी Valcambi का अधिग्रहण किया। लगभग 400 मिलियन डॉलर की इस डील ने कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई। उस समय यह सौदा भारतीय जूलरी उद्योग के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहणों में गिना गया था।
अब क्यों बढ़ी मुश्किलें
सेबी के आदेश में कहा गया है कि कंपनी के संचालन और वित्तीय फैसलों में राजेश मेहता की प्रमुख भूमिका थी। एजेंसी का मानना है कि कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों के कई महत्वपूर्ण निर्णय उनके नियंत्रण में लिए जाते थे। इसी आधार पर सेबी ने राजेश मेहता को अगली सूचना तक प्रतिभूति बाजार में खरीद-बिक्री और कारोबार करने से रोक दिया है। यह कदम निवेशकों के हितों की सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एलआईसी पर भी दिखा असर
सेबी की कार्रवाई का असर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया। इस घटनाक्रम का असर एलआईसी पर भी पड़ा, क्योंकि कंपनी में उसकी 10.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाजार में आई प्रतिक्रिया के बीच एलआईसी के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की नजर अब जांच के अगले चरण और कंपनी की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निवेशक भरोसे से जुड़े बड़े उदाहरणों में शामिल हो सकता है।