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प्रेमानंद महाराज ने दिए सफलता मंत्र

प्रेमानंद महाराज ने दिया सफलता का मंत्र, इन नियमों का करें पालन...

प्रेमानंद महाराज ने छात्रों को सफलता पाने के लिए कुछ खास नियम बताए हैं। जानिए इसमें क्या-क्या शामिल है?


प्रेमानंद महाराज ने दिया सफलता का मंत्र इन नियमों का करें पालन

जीवन में सफलता को लेकर सभी छात्रों के मन में चिंता बनी रहती हैं। भविष्य में सफलता मिलेगी या नहीं? आगे जीवन में क्या होगा? सब सही होगा या नहीं? ना जानें कितनी तरह के सवाल सभी छात्रों के मन में चलते रहते हैं। इन सभी सवालों के उत्तर आपको इस आर्टिकल में मिलेंगे। क्योंकि इस आर्टकल में हम आपको बताएंगे कि प्रेमानंद महाराज ने जीवन में सफलता पाने के लिए क्या मंत्र दिए हैं?

आज के छात्र ही कल देश का भविष्य हैं, लेकिन बढ़ती प्रतियोगिता और तनाव के कारण कई बार छात्र मानसिक दबाव झेल नहीं पाते। परीक्षा में असफलता से निराशा और डिप्रेशन तक हो सकता है। ऐसे में संयम और सही मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। चलिए अब आपको महाराज जी के मंत्रों के बारें में बताते हैं।

प्रेमानंद महाराज के अनुसार सफलता पाने के उपाय:

पवित्र आचरण: महाराज जी कहते हैं कि अगर आपका आचरण पवित्र नहीं है, तो किसी भी मार्ग में सफलता मिलना मुश्किल है और जीवन भर आप मेहनत करके नाम कमा सकते हो। लेकिन गलत आचरण जीवन में हार दिला सकते हैं। इसलिए सभी छात्रों को अपना आचरण सही रखना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन: प्रेमानंद महाराज जी कहते है कि बिना ब्रह्मचर्य के कोई भी शिखर हासिल नहीं कर सकता। गृहस्थ जीवन में जाने से पहले, पाणिग्रहण संस्कार तक वैरागी जीवन अपनाना जरूरी है। यही कारण था कि बच्चों को पहले गुरुकुल में रखा जाता था।

गलत संबंधों से बचें: बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड का कल्चर छात्रों के जीवन में इस कदर जहर की तरह फैल गया है कि वह न गृहस्थ लायक रहिंगे और न ब्रह्मचर्य के काबिल। इसमें गलत संगति हो जाए, तो आप भी दुखी रहेंगे और आपके माता पिता भी।

संगति और चिंतन: जो हम देखते, सुनते और बोलते हैं, वही हमारा चिंतन बनता है। यही हमारी आदतों और क्रियाओं को तय करता है। इसलिए नकारात्मक लोगों की संगति तुरंत छोड़ दें। कुछ भी गलत न बोले, कुछ भी गलत ना सुने और ना ही देखें।

व्यायाम और अध्ययन: सभी छात्रों को ब्रह्मचर्य और स्वस्थ जीवन के लिए व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसलिए सुबह उठकर सबसे पहले व्यायाम करें और फिर पढ़ाई करें। विद्या न केवल ज्ञान देती है, बल्कि विनम्रता भी सिखाती है। पढ़ा लिखा व्यक्ति समाज और माता-पिता की सेवा करने में सक्षम होता है।

नाम जप: दिन में 5,10 मिनट के लिए आप जिस भगवान को मानते है उनके नाम का जाप करें। छात्रों के पास यदि समय कम है, तो स्कूल जाते समय या छोटे ब्रेक में भी वह नाम जप कर सकते हैं।

असफलता से निराश न हों: कभी फेल होने पर निराश नहीं होना चाहिए। एक बार हार जाएं, तो फिर दोबारा बेहतर तैयारी करें। माता-पिता की डांट या दोस्तों के उपहास के कारण खुद को दुखी बिल्कूल न करें। हम भगवान का अंश हैं और भगवान सभी का साथ देते है। इसलिए मेहनत का फल सभी को मिलेगा और जीवन में निरंतर मेहनत करने से एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।

छात्र जीवन में सभी को इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। इनको करने में ज्यादा समय भी नहीं लगेगा। अगर आप रोजाना 10 से 15 मिनट भी व्यायाम और नाम जप करते है, तो भी आपको इसका लाभ मिलेगा। पढ़ाई करने में मन लगेगा। काम में ध्यान केंद्रीत होगा और सफलता जरूर मिलेगी।

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