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Integrated Therapy for Diabetes: Patanjali Study

मधुमेह नियंत्रण पर नई रिसर्च: योग-आयुर्वेद आधारित इंटीग्रेटेड थेरेपी को मिला समर्थन

पतंजलि के शोध में योग, आयुर्वेद और नेचरोपैथी आधारित इंटीग्रेटेड थेरेपी को मधुमेह नियंत्रण में प्रभावी बताया गया। 612 अध्ययनों के विश्लेषण से सामने आए सकारात्मक परिणाम।


मधुमेह नियंत्रण पर नई रिसर्च योग-आयुर्वेद आधारित इंटीग्रेटेड थेरेपी को मिला समर्थन

हरिद्वार। मधुमेह के उपचार को लेकर भारत से एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है, जिसमें योग, आयुर्वेद और नेचरोपैथी आधारित इंटीग्रेटेड थेरेपी को प्रभावी बताया गया है। यह अध्ययन पतंजलि योगपीठ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जिसका नेतृत्व आचार्य बालकृष्ण ने किया। इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।

612 अध्ययनों के विश्लेषण पर आधारित निष्कर्ष

शोध में कुल 612 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि केवल इंसुलिन आधारित उपचार के बजाय समग्र दृष्टिकोण अपनाने से मधुमेह नियंत्रण में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इस इंटीग्रेटेड थेरेपी में योग, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित आहार और जीवनशैली सुधार को शामिल किया गया है।

टाइप-1 डायबिटीज पर क्या कहता है अध्ययन

टाइप-1 डायबिटीज मेलिटस एक दीर्घकालिक रोग है, जिसमें शरीर में इंसुलिन का निर्माण कम या समाप्त हो जाता है। इस स्थिति में रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण होता है। शोध के अनुसार, समग्र उपचार अपनाने से न केवल शुगर लेवल नियंत्रित हुआ, बल्कि मरीजों के तनाव स्तर और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया।

योग और जीवनशैली में बदलाव से सकारात्मक असर

अध्ययन में यह सामने आया कि योग और प्राणायाम को नियमित रूप से अपनाने वाले मरीजों में स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हुआ। साथ ही, संतुलित आहार और जीवनशैली में बदलाव से दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही रुचि

शोध के प्रकाशन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटीग्रेटेड थेरेपी को लेकर रुचि बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ पारंपरिक उपचार को जोड़कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस शोध में पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन और यूनिवर्सिटी ऑफ पतंजलि के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। शोध को कई मानकों पर परखा गया और उसके बाद निष्कर्ष तैयार किए गए।

समग्र उपचार की ओर बढ़ते कदम

इस अध्ययन ने यह संकेत दिया है कि मधुमेह जैसे जटिल रोगों के उपचार में बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह के इंटीग्रेटेड मॉडल स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दिशा तय कर सकते हैं।

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