NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने लातूर के कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। जांच में मोबाइल फोन से कथित लीक प्रश्नपत्र मिलने का दावा किया गया है।
देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने एक और बड़ी गिरफ्तारी की है। एजेंसी ने महाराष्ट्र के लातूर से कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से लीक हुआ प्रश्नपत्र बरामद किया गया है।
यह इस मामले में CBI की 10वीं गिरफ्तारी है। ऐसे में अब सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर परीक्षा से पहले इतनी बड़ी संख्या में कैसे फैलाया गया। लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच इस मामले को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
मोबाइल फोन से मिला कथित लीक पेपर
CBI अधिकारियों के मुताबिक, शिवराज मोटेगांवकर लातूर में “रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस (RCC)” नाम से कोचिंग संस्थान चलाता है। रविवार को एजेंसी ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी।
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन में कथित तौर पर NEET UG 2026 का लीक प्रश्नपत्र मिला। इसके बाद एजेंसी ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया। CBI का आरोप है कि वह उस संगठित नेटवर्क का हिस्सा था, जिसने परीक्षा से पहले पेपर हासिल कर उसे अलग-अलग लोगों तक पहुंचाया।
फिलहाल एजेंसी मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही है।
परीक्षा से पहले ही मिल गया था पेपर?
CBI की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों को 23 अप्रैल 2026 को ही प्रश्नपत्र और उसके उत्तर मिल गए थे। यानी परीक्षा से काफी पहले पेपर लीक हो चुका था।
दरअसल, यही बात जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। क्योंकि इससे संकेत मिलते हैं कि मामला सिर्फ बाहरी सेंधमारी का नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर तक फैले नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
हालांकि, एजेंसी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से लीक हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी
इस मामले में CBI अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कोचिंग संचालक, प्रोफेसर और अन्य संदिग्ध शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में शिवराज मोटेगांवकर के अलावा Central Bureau of Investigation द्वारा मनीषा गुरुनाथ मांधरे, प्रो. पी.वी. कुलकर्णी, मांगीलाल बीवाल, विकास बीवाल, दिनेश बीवाल, यश यादव, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच एजेंसी का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
छात्रों के बीच बढ़ी चिंता
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ यह परीक्षा देते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भरोसे को प्रभावित करती हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लगातार प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई छात्र निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल CBI की जांच जारी है और एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें सिस्टम के अंदर के कितने लोग शामिल थे।