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LPG Gas Crisis: India Cylinder Numbers

LPG Gas Crisis: देश में कितने गैस सिलेंडर? संकट की चर्चा के बीच सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

एलपीजी संकट की चर्चा के बीच जानिए भारत में कुल कितने गैस सिलेंडर और कनेक्शन हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में 33 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन और करीब 66 करोड़ सिलेंडर मौजूद हैं।


lpg gas crisis देश में कितने गैस सिलेंडर संकट की चर्चा के बीच सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

LPG Cylinders In India |

नई दिल्ली। दुनिया के कई हिस्सों खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत में एलपीजी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सोशल मीडिया पर गैस की किल्लत की खबरों ने लोगों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है, क्योंकि बात सीधे किचन और घर के बजट से जुड़ी है।

दरअसल, 140 करोड़ की आबादी वाले देश में अगर रसोई गैस को लेकर असमंजस पैदा हो जाए। तब स्वाभाविक है कि लोग जानना चाहते हैं कि देश में आखिर कुल कितने गैस सिलेंडर हैं और सरकार की तैयारी क्या है? सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। देश में गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

देश में 33 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में घरेलू एलपीजी कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। अगर सामान्य व्यवस्था को समझें तो अधिकतर परिवारों के पास डबल सिलेंडर कनेक्शन (DBC) होता है, यानी एक सिलेंडर इस्तेमाल में और दूसरा बैकअप में। इस हिसाब से देश में कुल एलपीजी सिलेंडरों की संख्या करीब 66 करोड़ से ज्यादा मानी जाती है। यह आंकड़ा बताता है कि पिछले एक दशक में देश का गैस वितरण नेटवर्क कितनी तेजी से बढ़ा है।

2014 के बाद तेजी से बढ़े गैस कनेक्शन

साल 2014 में देश में लगभग 14.5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन ही थे। लेकिन पिछले 10-12 साल में यह संख्या लगभग दोगुनी से भी ज्यादा होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई। इस विस्तार का बड़ा कारण प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को माना जाता है। इस योजना के तहत अब तक लगभग 10.4 करोड़ गरीब और ग्रामीण परिवारों को गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। गांवों में पहले जहां लकड़ी या कोयले के चूल्हे आम थे, वहीं अब बड़ी संख्या में घरों में गैस चूल्हे इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे महिलाओं को धुएं से राहत भी मिली है।

पाइप गैस (PNG) का भी बढ़ रहा नेटवर्क

सरकार अब सिलेंडर के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी देश में लगभग 1.5 करोड़ घरों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंच रही है। यह सुविधा फिलहाल बड़े शहरों और महानगरों में ज्यादा उपलब्ध है। पीएनजी को सिलेंडर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है, क्योंकि इसमें बार-बार बुकिंग या रिफिलिंग की जरूरत नहीं पड़ती।

उद्योग और होटलों में भी गैस की बड़ी खपत

रसोई गैस केवल घरों तक सीमित नहीं है। देश के होटल, रेस्टोरेंट और कई उद्योग भी बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करते हैं। आंकड़ों के अनुसार; करीब 45 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पाइप गैस का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, लगभग 20 हजार से अधिक उद्योग गैस आधारित ईंधन पर निर्भर हैं। इसके अलावा करोड़ों की संख्या में कमर्शियल सिलेंडर बाजार में मौजूद हैं। यानी गैस का पूरा वितरण नेटवर्क अब काफी बड़ा और संगठित हो चुका है।

वैश्विक तनाव का असर क्यों पड़ता है

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरा पैदा होता है, तो सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में बफर स्टॉक और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाए गए हैं। इसके साथ ही गैस कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि कालाबाजारी या कृत्रिम कमी जैसी स्थिति न बने।

सरकार की नजर, घबराने की जरूरत नहीं

सरकारी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री स्तर पर भी इस पूरे मुद्दे की नियमित समीक्षा की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर आम लोगों तक कम से कम पहुंचे। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि देश में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, और वितरण व्यवस्था सामान्य बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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