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होली का विविध स्वरूप

भारत में होली के बिखरते रंग: लठमार से फगुआ तक, हर राज्य की अनोखी परंपरा

भारत में होली: हर राज्य में अलग अंदाज, रंगों और परंपराओं का अद्भुत संगम


भारत में होली के बिखरते रंग लठमार से फगुआ तक हर राज्य की अनोखी परंपरा

होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति और परंपराओं का भी हिस्सा है, जिसे अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम और तरीके से मनाया जाता है। खुशी और उल्लास हर जगह एक जैसी होती है, लेकिन मनाने का तरीका हर राज्य में बदल जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि देश के किस राज्य में होली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

उत्तर प्रदेश: ब्रज क्षेत्र की होली

उत्तर प्रदेश के ब्रज की होली तो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फेमस है। बरसाना और नंदगांव में मनाई जाने वाली लठमार होली के बारे में शायद ही ऐसा कोई होगा, जो नहीं जानता होगा। यहां महिलाएं पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं। यह होली खेल और मज़ा के साथ-साथ प्रेम और एकता की परंपरा भी दिखाती है। वहीं, बरसाना के श्रीजी मंदिर में लड्डू होली मनाई जाती है, जिसमें रंगों से पहले मिठाइयां उड़ाई जाती हैं। यह उत्सव आस्था और खुशी का एक खास मिलन है।

हरियाणा: धुलंडी

हरियाणा में होली को धुलंडी कहा जाता है। यह त्योहार परिवार और हंसी-खुशी से भरा होता है, खासकर ननद-भाभी के बीच। इसमें रंगों के साथ छोटे-छोटे खेल भी होते हैं और यह स्थानीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

पंजाब: होला मोहल्ला

पंजाब में होली के अगले दिन सिख समुदाय होला मोहल्ला मनाता है। यह सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है। इसमें घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन होता है। यह परंपरा गुरु गोबिंद सिंह जी ने शुरू की थी। आनंदपुर साहिब में यह उत्सव साहस और शौर्य दिखाने का अवसर होता है, और लोग इसे देखने दूर-दूर से आते हैं।

उत्तराखंड: बैठकी और खड़ी होली

कुमाऊं क्षेत्र में बैठकी होली और खड़ी होली मनाई जाती हैं। यहां लोग रंग खेलने के बजाय शास्त्रीय राग और लोकगीतों के साथ होली मनाते हैं। लोग पीले कपड़े पहनकर संगीत, नृत्य और राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के साथ उत्सव में भाग लेते हैं। यह होली यहां की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को दिखाती है।

अन्य राज्यों में होली

  • उड़ीसा: इसे डोला पूर्णिमा कहा जाता है। यहां होली भगवान जगन्नाथ की परंपरा के साथ रंगों और झांकियों के साथ मनाई जाती है।

  • बिहार और झारखंड: यहां होली को फगुआ या फगुवा कहा जाता है। लोग पारंपरिक गीत और लोक संगीत के साथ रंग खेलते हैं।

  • असम: इसे फाकुवा या दौल कहते हैं। इसमें नृत्य और खेल का बड़ा महत्व होता है।

  • मणिपुर: यहां होली को याओसांग कहा जाता है। यह कई दिनों तक चलता है और नृत्य, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों से भरा होता है।

  • महाराष्ट्र: होली के पांच दिन बाद रंग पंचमी मनाई जाती है। इसमें गुलाल और अबीर के साथ पूरनपोली बनाई जाती है।

  • गोवा: होली को शिग्मो कहा जाता है। यह वसंत ऋतु का बड़ा उत्सव है, जिसमें जुलूस, लोक नृत्य और खुशियाँ होती हैं।

  • गुजरात: पहले दिन होलिका दहन और अगले दिन धुलेटी मनाई जाती है। यह रंगों और मेलजोल का पर्व है।

  • केरल: कोंकणी समुदाय में इसे मंजल कुली या उकुली कहते हैं। इसमें रंगों की जगह हल्दी का पानी इस्तेमाल किया जाता है।

भारत में होली के ये विविध रूप न केवल रंग और उल्लास का उत्सव हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन भी हैं। हर राज्य की अपनी अनूठी परंपरा इसे और खास बनाती है।

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