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बुखार को न करें नजरअंदाज, WHO ने दी डेंगू और चिकनगुनिया पर नई चेतावनी

बुखार को न करें नजरअंदाज, WHO ने दी डेंगू और चिकनगुनिया पर नई चेतावनी

Health News: बदलते मौसम को देखते हुए WHO की तरफ से डेंगू, चिकनगुनिया, ज़िका और येलो फीवर के लिए गाइडलाइन जारी की गई है।

बुखार को न करें नजरअंदाज who ने दी डेंगू और चिकनगुनिया पर नई चेतावनी

Health News: बदलते मौसम को देखते हुए हर साल की तरह इस साल भी WHO ने डेंगू, चिकनगुनिया, ज़िका और येलो फीवर जैसी बिमारियों को लेकर गाइडलाइन जारी कर दी है। दरअसल हर बार बरसात शुरू होते ही लोग इस तरह की गंभीर बिमारियों की चपेट में आ जाते हैं जिससे उनकी हालत खराब हो जाती है। इस तरह की बीमारी के चलते मामला और गंभीर न हो जाए इसके लिए WHO ने पहले ही गाइडलाइन जारी कर दी है। जिसका मकसद लोग पहले से सावधान रहे और अपना इलाज सुनिश्चित तरीके से करवा भी लें। यह भी पता दें कि इन बिमारियों से कई लोगों की मौतें भी हो जाती है। 

बदलते मौसम को लेकर WHO की तरफ से जो गाइडलाइन जारी की गई है उसमें डॉक्टरों, नर्सों हेल्थ वर्कर्स को सही देखभाल के लिए डिटेल में दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि हल्के लक्षण वाले मरीजों से लेकर गंभीर मामलों तक का इलाज कैसे किया जाए। 

क्यों जरूरी हैं गाइडलाइन

WHO का कहना है कि डेंगू, चिकनगुनिया, ज़िका और येलो फीवर जैसी बीमारियों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनके शुरुआती लक्षण आम वायरल बुखार जैसे ही लगते हैं जैसे बुखार, बदन दर्द, थकान। ऐसे में अक्सर सही समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती और इलाज में देर हो जाती है। नई गाइडलाइन का मकसद यही है कि हेल्थ वर्कर्स शुरुआती लक्षणों को हल्के में न लें और गहराई से जांच करें।

डेंगू से लेकर येलो फीवर तक सब में है खतरा

डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या गिर जाती है जिससे खून बहने का खतरा बढ़ जाता है। चिकनगुनिया में जोड़ों में असहनीय दर्द होता है जो महीनों तक रह सकता है। ज़िका वायरस गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक होता है क्योंकि इससे बच्चे के दिमाग पर असर पड़ सकता है। वहीं येलो फीवर में लिवर डैमेज का खतरा होता है, जो जानलेवा हो सकता है। ऐसे में इन बीमारियों को लेकर गंभीरता जरूरी है।

टेस्टिंग बढ़ाने पर WHO का जोर

WHO ने कहा है कि अगर एक ही इलाके में कई तरह के वायरस फैल रहे हों और वहां टेस्टिंग की सुविधा कम हो, तो बीमारी की सही पहचान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए संगठन ने टेस्टिंग बढ़ाने और बेहतर क्लिनिकल प्रैक्टिस अपनाने की सलाह दी है। यानी सिर्फ बुखार देखकर मरीज को घर न भेजा जाए, बल्कि जरूरी जांच और लक्षणों के आधार पर फैसला लिया जाए।