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Peace Restoration Needed In Bengal

बंगाल में शाति बहाली के लिए समेकित प्रयास हों

पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। राज्य में शांति बहाली के लिए ठोस कदम जरूरी हैं।


बंगाल में शाति बहाली के लिए समेकित प्रयास हों

हाल ही में बंगाल में शांति पूर्वक हुए विधानसभा चुनाव के बाद यह माना जा रहा था कि लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक कार्य हुआ है कि बिना हिंसा के शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न हो गए। लेकिन जिस तरह बुधवार रात भाजपा नेता शुभेदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया उससे सिद्ध हो गया कि तृणमूल कांग्रेस भाजपा की जीत को पचा नहीं पा रही है। निश्चित रूप से यह तृणमूल के जंगल राज का नमूना है। इस हत्याकांड की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई है। 

नई सरकार का गठन नौ मई को होने जा रहा है ऐसे में सरकार की प्राथमिकता हिंसा की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना चाहिए। शुभेदु के पी.ए. बुधवार रात को कार से अपने घर जा रहे थे, जब कोलकाता के पास मध्यमग्राम में घात लगाकर बैठे तीन लोगों ने उन पर ग्लॉक पिस्टल से गोलियां चलाई। चंद्रनाथ रथ की घटनास्थल पर मौत हो गई। बंगाल में 4 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद कई जगह हिंसा की घटनाएं हुई थी। बुधवार को शांति थी लेकिन रात को शुभेदु अधिकारी के पीए की हत्या कर गई। पूरे राज्य में चुनाव आयोग के कड़े ही दी  निर्देश और पुलिस की सख्ती के बाद अब हालात काबू में तो हैं, लेकिन शुभेदु के निजी सहायक की हत्या से तनाव पैदा हो गया है। 

बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के तकरीबन 200 मामलों की प्राथमिकी दर्ज की गई है और 433 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बंगाल पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवान मिलकर जगह जगह छापे मार रहे हैं। दक्षिण 24 परगना से बड़ी तादाद में घातक और धारदार हथियार बरामद किए गए हैं। उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली से 20 ज्यादा बम बरामद हुए हैं। बंगाल पुलिस ने से हेल्पलाइन शुरू की है जिस पर कोई भी हिंसा होने पर शिकायत दर्ज करा सकता है। शुभेदु अधिकारी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लोगों में नाराजगी है, इसलिए कुछ जगहों पर तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर हमले हुए हैं, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता इस तरह के काम न करें। 

मंगलवार को कोलकाता के धर्मतला इलाके में जीत का जश्न मना रहे भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस के एक दफ्तर को के बुलडोजर से गिरा दिया था। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि तृणमूल कांग्रेस का ये दफ्तर गैरकानूनी तरीके से सड़क के बीचोंबीच बनाया गया है, इसलिए इसे तोड़ा गया। चुनाव के नतीजे आने के बाद कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, आसनसोल, जलपाईगुड़ी, बीरभूम और बर्धमान में मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद से भाजपा के समर्थक पार्टी के दफ्तरों पर हमले कर रहे हैं और उनके समर्थकों को टारगेट कर रहे हैं। 

तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनके दो कार्यकतों मारे गए और इसके लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। प्रदेश भाजपा ने एक विज्ञाप्ति जारी करके कहा है कि चुनाव नतीजों के बाद रातों-रात पाला बदलने वालों से लोग सावधान रहें, भाजपा का झंडा लेकर गड़बड़ करने वालों से सतर्क रहें, अगर कोई ऐसा करे तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बंगाल के मुख्य सचिव से मुलाकात की और हिंसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। चुनाव नतीजे आने के बाद साफ दिखाई दे रहा है कि ममता बनर्जी से बर्दाश्त नहीं हो रही है। 

उन्हें डर है कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता घबराकर घर पर न बैठ जाएं। जो अभिषेक बनर्जी पिछले हार उनकी हफ्ते अमित शाह को चुनौती दे रहे थे, उनके चेहरे पर हवाईया उड़ी हुई हैं। तृणमूल के समर्थक कई जगह भगवा पहन कर, तिलक लगाकर अपने को भाजपा का समर्थक बताने लगे हैं, कई जगह पर उन्होंने हिंसा भी की है, कुछ इलाकों में भाजपा के समर्थकों ने भी मारपीट की है। हिंसा की घटनाओं के बाद सब कुछ कैमरे पर है। ये हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। अच्छी बात है कि पुलिस ने हिंसा पर काबू पा लिया। अब भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि बंगाल में शांति बनी रहे. लोगों के मन से डर खत्म हो, और कानून का राज कायम हो।

 

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