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Texas Muslim City Project Explained

क्या है टेक्सास की मुस्लिम शहर योजना और कैसे हुई यह न्यायालय से स्वीकृत?

सोनाली मिश्रा


क्या है टेक्सास की मुस्लिम शहर योजना और कैसे हुई यह न्यायालय से स्वीकृत

अमेरिका के टेक्सास में पिछले दिनों एक मुस्लिम शहर योजना को लेकर काफी हंगामा हुआ था। और इस हंगामे के चलते लोगों ने विरोध करते हुए कहा था कि किसी भी धर्मनिरपेक्ष राज्य मे एक मजहब आधारित शहर या कॉलोनी योजना कैसे बनाई जा सकती है और कैसे यह स्वीकृत हो सकती है? 

The East Plano Islamic Community (EPIC) अर्थात एपिक के नाम से यह शहर बसाया जा रहा था। मगर बाद में इसका नाम मीडो हो गया था। इस योजना के विरोध में हजारों स्थानीय लोग आए थे, और यहाँ तक कि गवर्नर ग्रेग एबॉट और अटॉर्नी जनरल केन पेक्सटन भी इसके विरोध में यह कहते हुए आए थे कि इस परियोजना के लीडर्स दरअसल टेक्सास में शरिया लागू करना चाहते हैं। 

और इसे रोक दिया गया था, जिसके विरोध में इस परियोजना का विकास करने वाले न्यायालय गए थे और उन्हें राहत भी मिली। मंगलवार को ट्रेविस काउंटी जज ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य को डेवलपर्स के साथ सहयोग करना होगा और पहले से हुए आवास समझौते का पालन करना होगा।

हालांकि इसपर शरिया कॉलोनी का आरोप डेवलपर्स के अनुसार झूठा है, और उनके अनुसार उनकी यह कॉलोनी सभी धर्मों के लोगों के लिए है। 
इसमें एक बहुत बड़ी मस्जिद, स्कूल और लगभग 1000 घर शामिल हैं। जहां इस निर्णय के बाद डेवलपर्स ने राहत की सांस लेते हुए फैसले पर संतुष्टि जताई है और कहा है कि उन लोगों ने हर कानून का पालन हर कदम पर किया है। तो वहीं सरकार इस निर्णय से प्रसन्न नही है। 

टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन का कहना है कि इस निर्णय मे त्रुटि है और डेवेलपर्स ने फेयर हाउसिंग एक्ट का उल्लंघन किया है। और एजेंसी का यह भी कहना है कि वे इस निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे और यह परियोजना यूएस डिपार्ट्मन्ट ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट द्वारा जांच का विषय है और इसकी पड़ताल चल रही है। 

क्या है यह परियोजना 

यह इस्लामिक शहर परियोजना – मीडो, एक 402 एकड़ की मास्टर योजना है, जो कॉलिन एवं हंट काउंटीज़ में फैली है। इसमें 1000 से ज्यादा घर, एक इस्लामी स्कूल, एक मस्जिद, क्लीनिक, रिटेल शॉप्स, एक कम्यूनिटी कॉलेज और स्पोर्ट्स फील्ड्स हैं। इस पर यह आरोप लगे थे कि मस्जिद के सदस्य ही इस कम्यूनिटी कैपिटल पार्टनर्स का आधार हैं। वहीं डेवलपर्स ने यह आरोप लगाया था कि यह जो जांच हो रही है, वह मुस्लिम आधारित परियोजनाओं को लेकर संकुचित दृष्टिकोण वाली है। 

सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय के विरोध में लोग बातें कर रहे हैं। लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर कैसे एक धर्मनिरपेक्ष देश में एक ऐसा शहर बसाने की योजना स्वीकृत हो सकती है, जो एक मजहब के विश्वासों के आधार पर है? यह देखना रोचक होगा कि इस्लामिक कट्टरता से लड़ने का दावा करने वाले ट्रम्प मजहब के पहचान पर बन रहे इस शहर की योजना के निर्माण को रोक पाते हैं या नहीं? या फिर यह शहर अब वास्तविकता के और निकट आ गया है!

लेखिका- सोनाली मिश्रा

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