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Mamata Banerjee & Park Street Case Row

बंगाल: महिला मुख्यमंत्री परंतु महिलाओं के प्रति निष्ठुरता की सीमा को पार किया ममता बनर्जी ने

सोनाली मिश्रा


बंगाल महिला मुख्यमंत्री परंतु महिलाओं के प्रति निष्ठुरता की सीमा को पार किया ममता बनर्जी ने 

वर्ष 2012, कोलकता का पार्क स्ट्रीट एक ऐसी घटना का साक्षी बना जिसका साक्षी कोई भी स्थान नहीं होना चाहेगा। वह तारीख गवाह बनी एक अपराध की और ऐसे अपराध की, कि जिस पर शर्मसार हो जाए संसार। 5 फरवरी 2012 की रात, सूजेट जार्डन नामक महिला पार्क स्ट्रीट के एक नाइट क्लब से लौट रही थी। उसे घर छोड़ने के बहाने एक कार में जबरन बैठा दिया गया और फिर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। 

उस समय बंगाल की मुख्यमंत्री एक महिला थीं। महिला मुख्यमंत्री होने के नाते यह समझा गया कि मुख्यमंत्री इस अपराध का संज्ञान लेंगी और अपनी ओर से ही ऐसा सख्त कदम उठाएंगी कि अपराधी उनके शासन में अपराध करने से पहले सौ बार सोचेंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ। जो हुआ उसने संवेदनहीनता की हर सीमा पार कर दी। 

उसने यह दिखाया कि सत्ताधारी जब अत्याचार करने पर आता है तो वह महिला या पुरुष नहीं रहता। यह मामला मीडिया में आया तो इसने तूल पकड़ा और जब शोर मचा तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह कहा कि यह मनगढ़ंत कहानी है, जो उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए गढ़ी जा रही है। 

उन्होनें इसे छोटा सा मामला बताया, जबकि इस मामले की महत्ता इसलिए और भी अधिक है कि इसमें सूजेट ने अपनी पहचान जाहिर करके एक ऐसा कदम उठाया था, जिसने बलात्कार पीड़ितों के लिए नया मार्ग सुझाया था। मगर ममता बनर्जी ने इसे मनगढ़ंत या cooked up कहा था। उन्होनें कहा था कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के ये कदम हैं। 

इसके साथ ही तब राज्य सरकार ने इस मामले की तफ्तीश कर बलात्कार की पुष्टि करने वाली महिला पुलिस अधिकारी दमयंती सेन का तबादला कर दिया था। और इस कांड की पीडिता की मृत्यु भी वर्ष 2015 में हो गई थी। कोलकता की एक अदालत ने वर्ष 2015 में ही इस मामले में फैसला सुनाते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई थी। 

ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें महिला मुख्यमंत्री ने महिला के प्रति तनिक भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई। पार्क स्ट्रीट का मामला काफी चर्चित रहा था और पीडिता ने अपनी लड़ाई को अपने आप लड़ना चुना था। इस मामले को ममता बनर्जी ने ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने और कुछ अधिकारियों ने भी हल्के में लिया था, और इस कारण इस मामले से काफी किरकिरी भी हुई थी। .

यह दुखद रहा कि उसकी मृत्यु भी जल्दी ही हो गई थी। दरअसल 2026 में बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार गई है, तो उसकी नींव दरअसल महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और उन्हें नकारे जाने के साथ ही पड़ चुकी थी। परंतु लोकतंत्र की अपनी प्रक्रियाएं होती हैं और यह भी कहते हैं कि जनता का जब धैर्य चुकता है तो वह वही करती है जो 4 मई 2026 को ममता बनर्जी के साथ किया। वह वोट के माध्यम से चोट करती है।

सोनाली मिश्रा 

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