OpenAI जल्द ही ChatGPT में Sora वीडियो जनरेशन टूल जोड़ सकता है। इससे यूजर टेक्स्ट और इमेज के साथ AI वीडियो भी बना सकेंगे, हालांकि डीपफेक को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है और अब एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक OpenAI अपने वीडियो जनरेशन टूल Sora को ChatGPT में इंटीग्रेट करने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो चेटजीपीटी सिर्फ टेक्स्ट और इमेज ही नहीं बल्कि वीडियो भी जनरेट कर सकेगा। इससे चैटबॉट के फीचर्स काफी बढ़ जाएंगे और Sora मॉडल भी ज्यादा लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।
टेक्स्ट प्रॉम्प्ट से बनाता है वीडियो
सोरा (Sora) एक एडवांस एआई मॉडल है, जो यूजर के टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर वीडियो तैयार कर सकता है। यानी अगर कोई यूजर किसी सीन का विवरण लिखता है, तो यह मॉडल उसी के आधार पर पूरा वीडियो बना देता है। इसके अलावा इसमें कंटेंट को रिमिक्स करने और नए क्रिएशन एक्सप्लोर करने का भी विकल्प मौजूद है। यूजर इसमें पर्सनलाइज्ड फीड के जरिए अलग-अलग एआई वीडियो भी देख सकते हैं।
इस फीचर से खुद को वीडियो में जोड़ सकेंगे यूजर
Sora का एक खास फीचर Cameos भी है। इस फीचर की मदद से यूजर खुद को किसी भी एआई-जनरेटेड सीन में शामिल कर सकते हैं। यानी आप अपनी फोटो या प्रोफाइल का इस्तेमाल करके किसी फिल्मी सीन, एनिमेशन या अलग तरह के वीडियो में खुद को फिट कर सकते हैं।
अभी अलग ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध
फिलहाल Sora को इसकी अलग ऐप और वेबसाइट के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसके बावजूद यह अभी तक ChatGPT जितना लोकप्रिय नहीं हो पाया है। यही वजह है कि OpenAI अब इसे सीधे ChatGPT के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है, ताकि करोड़ों यूजर तक यह फीचर आसानी से पहुंच सके।
चैटबॉट्स के बीच बढ़ रही कड़ी प्रतिस्पर्धा
पिछले कुछ समय से एआई चैटबॉट्स के बीच प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो गई है। टेक कंपनियां लगातार नए फीचर्स जोड़ रही हैं ताकि यूजर्स को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिल सकें। पिछले साल OpenAI ने ChatGPT में इमेज जनरेशन फीचर जोड़ा था, जिसके बाद यूजर प्लेटफॉर्म छोड़े बिना ही तस्वीरें बना सकते हैं। अब वीडियो जनरेशन आने से यह प्लेटफॉर्म और ज्यादा शक्तिशाली हो जाएगा।
डीपफेक को लेकर भी बढ़ सकती है चिंता
हालांकि इस तकनीक के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई वीडियो जनरेशन टूल्स के बढ़ने से डीपफेक वीडियो का खतरा भी बढ़ सकता है। पहले ही इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं जिनमें असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में नई तकनीक के साथ सुरक्षा और सत्यापन की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।