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कभी थे फुटबॉल खिलाड़ी, आज हैं अंतरिक्ष यात्री... जानिए कैसे तय किया एस्ट्रोनॉट बनने तक का सफर

कभी थे फुटबॉल खिलाड़ी, आज हैं अंतरिक्ष यात्री... जानिए कैसे तय किया एस्ट्रोनॉट बनने तक का सफर

कभी थे फुटबॉल खिलाड़ी आज हैं अंतरिक्ष यात्री जानिए कैसे तय किया एस्ट्रोनॉट बनने तक का सफर

Shubhanshu Shukla Return: 18 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पूरी कर चुके शुभांशु शुक्ला अब सुरक्षित धरती पर लौट आए हैं। स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट में सवार शुभांशु समेत चारों अंतरिक्ष यात्री मंगलवार, 15 जुलाई को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:01 बजे कैलिफॉर्निया में सफलतापूर्वक लैंड हुए। इस मिशन के दौरान टीम ने अंतरिक्ष में करीब 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए। बता दें कम ही लोग जानते हैं कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने से पहले शुभांशु फुटबॉल के मैदान में अपना जुनून दिखाया करते थे।

 फुटबॉल खिलाड़ी थे शुभांशु शुक्ला

शुभांशु शुक्ला के स्कूली दिनों की यादें ताजा करते हुए सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि जब वे कैलिफॉर्निया से लौटे तो पूरा लखनऊ उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। उन्होंने बताया कि शुभांशु पढ़ाई में तेज़ थे, लेकिन ज़्यादा समय पढ़ाई में नहीं देते थे। इसके बावजूद हमेशा अच्छे नंबर लाते थे, जिसे देख बाकी छात्र चकित रह जाते थे। वह फुटबॉल के अलावा क्रिकेट में भी रुचि रखते थे और खेल-कूद में काफी सक्रिय थे। जब शुभांशु ने एनडीए में आवेदन किया था, तब उनके माता-पिता ने शुरुआत में उन्हें पूरा समर्थन नहीं दिया था।

मध्यम वर्ग से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुचे शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla)

शुभांशु शुक्ला का जन्म 10 अक्टूबर, 1985 को लखनऊ के एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन में उन्हें शायद ही किसी ने सोचा होगा कि वह एक दिन अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे। एक एयरशो ने उनकी सोच और जीवन की दिशा ही बदल दी। तेज़ रफ्तार विमानों की आवाज़ और हवा को चीरती उनकी उड़ान ने शुभांशु के मन में एयरोस्पेस के प्रति गहरी रुचि जगा दी। उन्होंने एनडीए में आवेदन किया, लेकिन उम्र अधिक होने के कारण उनका फॉर्म खारिज हो गया।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2006 में भारतीय वायुसेना में उनकी नियुक्ति हुई, जहां उन्होंने मिग-29 और डॉर्नियर 228 जैसे उन्नत फाइटर जेट्स उड़ाए। बाद में उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की। साल 2019 में उन्हें ISRO के 'इंडियन ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम' के लिए चुना गया और एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के लिए चयनित चार उम्मीदवारों में से एक बने।