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टेस्ट में सफेद कपड़े और लाल गेंद का क्या है राज? जानिए इसका इतिहास

टेस्ट में सफेद कपड़े और लाल गेंद का क्या है राज? जानिए इसका इतिहास

टेस्ट में सफेद कपड़े और लाल गेंद का क्या है राज जानिए इसका इतिहास

Why players wear white in Test Cricket: टेस्ट क्रिकेट को खेल का सबसे पुराना और असली रूप माना जाता है। यह मुकाबला पांच दिनों तक चलता है। इसकी परंपराएं भी खास होती हैं। क्या आप जानते हैं कि टेस्ट मैच में खिलाड़ी सफेद कपड़े क्यों पहनते हैं? और इसमें लाल गेंद का ही इस्तेमाल क्यों होता है? इन बातों के पीछे कुछ खास और दिलचस्प वजहें हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। आइए जानते हैं इन परंपराओं की असली वजह।

ऐसे हुई थी सफेद कपड़ों की शुरुआत

टेस्ट क्रिकेट के शौकीन लोग इसके नियमों से तो परिचित होते हैं, लेकिन बहुत से फैंस ये नहीं जानते कि टेस्ट मैचों में खिलाड़ी सफेद कपड़े ही क्यों पहनते हैं। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में मौजूद मैरीलेबॉन क्रिकेट क्लब (MCC) के रिसर्च ऑफिसर नील रॉबिनसन ने टेलीग्राफ से बातचीत में बताया था कि 18वीं सदी में जब क्रिकेट शुरू हुआ, तब कोई तय ड्रेस कोड नहीं था। उस समय लोग वही कपड़े पहनते थे जो आसानी से मिल जाते थे। वहीं सफेद रंग सबसे आम और सुलभ था। इसी वजह से सफेद कपड़े धीरे-धीरे टेस्ट क्रिकेट की पहचान बन गए।

यही है सफेद कपड़ों की असली वजह

नील रॉबिनसन के मुताबिक खिलाड़ियों का सफेद कपड़े पहनना एक व्यावहारिक फैसला था। क्रिकेट को गर्मी के मौसम में खेला जाता है। इसलिए सफेद रंग का चुनाव किया गया ताकि यह धूप को न सोखे और सूरज की रोशनी को ज्यादा से ज्यादा रिफ्लेक्ट कर सके। इससे खिलाड़ियों को मैदान पर लंबे समय तक खेलने में मदद मिलती थी और थकान भी कम होती थी।

दूसरा कारण यह था कि ब्रिटिश संस्कृति में सफेद रंग को रॉयल्टी और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। इसी सोच के साथ उन्होंने खेल में भी सफेद कपड़े पहनने की परंपरा शुरू की जो आज तक टेस्ट क्रिकेट की पहचान बनी हुई है।

लाल गेंद की कहानी भी है दिलचस्प

जब टेस्ट क्रिकेट में सफेद कपड़े पहनने की परंपरा शुरू हुई, तो गेंद का रंग ऐसा होना जरूरी था जो मैदान पर साफ नजर आए। ऐसे में लाल गेंद को चुना गया क्योंकि यह सफेद यूनिफॉर्म के बीच आसानी से दिख जाती थी। शुरू में ज्यादातर गेंदें लाल ही बनाई जाती थीं। यही टेस्ट क्रिकेट की परंपरा बन गई।

समय के साथ जब दिन-रात के टेस्ट मैच शुरू हुए, तो कम रोशनी में गेंद को दिखाई देने के लिए गुलाबी और सफेद गेंदों का इस्तेमाल किया जाने लगा। बता दें जब खिलाड़ी रंगीन कपड़े पहनते हैं ( वनडे और टी20) दृश्यता बनाए रखने के लिए सफेद गेंद का इस्तेमाल किया जाता है।