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नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग में खिलाड़ियों की सुरक्षा और मैचों की निष्पक्षता को लेकर BCCI ने बड़ा कदम उठाया है। हनी ट्रैप और संदिग्ध बाहरी संपर्कों के खतरे के बीच बोर्ड ने खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और टीम एरिया को लेकर नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब बिना अनुमति किसी भी बाहरी व्यक्ति को खिलाड़ियों के होटल रूम, टीम बस या डगआउट तक पहुंच नहीं मिलेगी। बोर्ड ने फ्रेंचाइजी मालिकों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
बीसीसीआई की एंटी करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट यानी ACSU की रिपोर्ट में कई मैचों के दौरान ऐसे लोगों की मौजूदगी सामने आई थी। इन्हें प्रतिबंधित एरिया में रहने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद बोर्ड ने तुरंत कार्रवाई की।
खिलाड़ियों के कमरों तक पहुंच अब आसान नहीं
बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने सभी फ्रेंचाइजी को साफ निर्देश भेजे हैं। इसके अनुसार, खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ के कमरे में कोई मेहमान तभी जा सकेगा, जब टीम मैनेजर की लिखित मंजूरी हो। इसके अलावा खिलाड़ियों और स्टाफ की आवाजाही पर भी नजर रखी जाएगी। अनियमित समय पर होटल छोड़ने या बाहर जाने से पहले सिक्योरिटी लायजन ऑफिसर और टीम इंटीग्रिटी ऑफिसर को सूचना देना जरूरी होगा।
बोर्ड का मानना है कि फिक्सिंग और हनी ट्रैप जैसे मामलों में अक्सर निजी मुलाकातों और अनौपचारिक संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए सुरक्षा घेरे को और कड़ा किया गया है।
डगआउट और ड्रेसिंग रूम पर बढ़ी निगरानी
IPL के दौरान ड्रेसिंग रूम और डगआउट को सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। BCCI की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मैचों में यहां ऐसे लोग भी दिखे, जिन्हें वहां आने की अनुमति नहीं थी। इसी वजह से अब PMOA यानी ‘प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया’ प्रोटोकॉल को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
इस एरिया में सिर्फ खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ और अधिकृत मैच अधिकारियों को ही प्रवेश मिलेगा। मोबाइल फोन और दूसरे कम्युनिकेशन डिवाइस के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा। राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर का डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करते हुए वीडियो सामने आने के बाद बोर्ड पहले ही सतर्क हो चुका था।
मैच के दौरान मालिक भी नहीं कर सकेंगे सीधा संपर्क
BCCI ने फ्रेंचाइजी मालिकों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अब मैच के दौरान मालिक खिलाड़ियों या टीम स्टाफ से सीधे संपर्क नहीं कर सकेंगे। ड्रेसिंग रूम, डगआउट या मैदान में जाकर बातचीत करना नियमों के खिलाफ माना जाएगा। बोर्ड इसे मैच के माहौल और सुरक्षा प्रोटोकॉल से जोड़कर देख रहा है।
दरअसल IPL जैसे हाई-प्रोफाइल टूर्नामेंट में सट्टेबाजी नेटवर्क और फिक्सिंग गिरोह लगातार खिलाड़ियों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इसलिए बोर्ड अब हर स्तर पर नियंत्रण बढ़ा रहा है।
वेपिंग और ई-सिगरेट पर भी पूरी तरह बैन
IPL 2026 के दौरान वेपिंग से जुड़े मामले भी चर्चा में रहे हैं। राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पर इस मामले में जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं पंजाब किंग्स के युजवेंद्र चहल का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इन घटनाओं के बाद BCCI ने ड्रेसिंग रूम, होटल और प्रैक्टिस एरिया समेत IPL से जुड़े सभी स्थानों पर वेपिंग और ई-सिगरेट के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। भारत में ई-सिगरेट और वेपिंग पहले से कानूनन प्रतिबंधित हैं। बोर्ड नहीं चाहता कि खिलाड़ियों की छवि या टूर्नामेंट की साख पर कोई सवाल उठे।
नियम तोड़ने पर सस्पेंशन तक की चेतावनी
BCCI ने साफ कर दिया है कि नए सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माना, सस्पेंशन और डिस्क्वालिफिकेशन तक शामिल हो सकता है। 2013 के स्पॉट फिक्सिंग विवाद के बाद से IPL में एंटी करप्शन सिस्टम लगातार मजबूत किया गया है। हर टीम के साथ ACSU अधिकारी तैनात रहते हैं, जो खिलाड़ियों की गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों पर नजर रखते हैं।
इस बार बोर्ड को आशंका है कि निगरानी तंत्र में सेंध लगाने की कोशिश हुई है। इसलिए IPL की साख बचाने के लिए सुरक्षा घेरे को पहले से ज्यादा सख्त बनाया जा रहा है।