आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका से 76 रन की हार के बाद भारत की सेमीफाइनल राह कठिन हुई। खराब बल्लेबाजी, स्पिन की नाकामी और चयन पर उठे सवाल बने हार की बड़ी वजह।
नई दिल्लीः भारत और साउथ अफ्रीका के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप सुपर-8 मुकाबले में टीम इंडिया को 76 रन से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इस हार से न केवल टीम का नेट रन रेट बुरी तरह प्रभावित हुआ, बल्कि सेमीफाइनल की राह भी मुश्किल हो गई है। शुरुआती बढ़त के बावजूद भारत मैच पर पकड़ नहीं बना सका और कई मोर्चों पर चूक साफ नजर आई।
दबाव बना, लेकिन थाम नहीं पाए
दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही थी। 20 रन के भीतर उनके तीन प्रमुख बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे। उस समय भारतीय गेंदबाजों के पास मैच पर शिकंजा कसने का मौका था। लेकिन डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने मोर्चा संभाल लिया। दोनों के बीच 97 रन की साझेदारी हुई, जिसने मैच का रुख बदल दिया और भारतीय गेंदबाजों पर दबाव कम कर दिया।
स्पिन आक्रमण बेअसर
इस मुकाबले में भारतीय स्पिनर्स उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। वरुण चक्रवर्ती ने चार ओवर में 47 रन खर्च किए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर को दो ओवर में 17 रन पड़े। स्पिन विभाग से केवल एक विकेट मिला, जिससे दक्षिण अफ्रीका को मध्य ओवरों में खुलकर खेलने का मौका मिल गया।
आखिरी ओवर ने बढ़ाया लक्ष्य
एक समय लग रहा था कि भारत विपक्षी टीम को 175 रन के भीतर रोक लेगा। लेकिन हार्दिक पांड्या के आखिरी ओवर में 20 रन निकल गए। इससे स्कोर 188 तक पहुंच गया। यह अतिरिक्त रन भारतीय बल्लेबाजों के लिए मानसिक दबाव का कारण बने और लक्ष्य का पीछा करते समय जल्दबाजी साफ दिखी।
ओपनर्स फिर नहीं दे सके ठोस शुरुआत
भारतीय पारी की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। ईशान किशन बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि तिलक वर्मा भी सस्ते में चलते बने। अभिषेक से बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह भी 15 रन बनाकर आउट हो गए। लगातार गिरते विकेटों ने टीम को संभलने का मौका ही नहीं दिया।
जल्दबाजी ने बिगाड़ा खेल
लगभग हर बल्लेबाज पहली गेंद से बड़े शॉट की कोशिश करता नजर आया। पिच को समझने और साझेदारी बनाने की कोशिश कम दिखी। अभिषेक के बल्ले से टाइमिंग नहीं निकल रही थी, ऐसे में उन्हें सिंगल-डबल लेकर लय पकड़नी चाहिए थी। लेकिन बड़े शॉट की कोशिश में विकेट गंवा बैठे। यही स्थिति ईशान, तिलक और सुंदर के साथ भी रही।
‘सुंदर’ प्रयोग पर उठे सवाल
इस मैच में अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया। लेकिन वह न बल्ले से प्रभाव छोड़ सके और न गेंद से। उनसे केवल दो ओवर ही कराए गए। इसके उलट अक्षर तीनों विभागों चाहे वह फिर बल्लेबाजी, गेंदबाजी हो या फिर फील्डिंग हो। इसमें संतुलन देते हैं। ऐसे में यह बदलाव टीम के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ।
कप्तान ने मानी बल्लेबाजी में कमी
मैच के बाद भारतीय कप्तान ने कहा, 'शुरुआत में हमने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। सात से 15वें ओवर के बीच उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की और फिर हमने वापसी की। हमारी गेंदबाजी अच्छी रही लेकिन और बेहतर बल्लेबाजी कर सकते थे। कभी-कभी आपको सोचना पड़ता है कि आप पावरप्ले में मैच नहीं जीत सकते लेकिन आप मैच हार सकते हैं। हमें जिन साझेदारी की जरूरत थी वे नहीं हुईं। यह खेल का हिस्सा है। हम इससे सीखेंगे और वापसी करेंगे।'