Indian Cricketer Fought in War: पिछले कुछ दिनों से भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। सीमा पार से हो रहे हमलों का भारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है, लेकिन हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि आईपीएल 2025 को एक हफ्ते के लिए स्थगित करना पड़ा है। इस साल होने वाले एशिया कप 2025 पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे समय में हम आपको एक ऐसे भारतीय क्रिकेटर की कहानी बताते हैं, जिसने देश के लिए क्रिकेट छोड़ दिया था। साथ ही टेस्ट डेब्यू का मौका ठुकराकर जंग के मैदान में जाकर भारत माता की सेवा की।
टेस्ट डेब्यू छोड़ युद्ध में कूदा यह क्रिकेटर
भारत के लिए खेलने वाले कई क्रिकेटरों ने मैदान पर कमाल का प्रदर्शन किया है, लेकिन हेमू अधिकारी उन चंद खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने क्रिकेट से पहले देश को प्राथमिकता दी। उन्होंने टेस्ट डेब्यू का मौका छोड़कर भारतीय सेना में सेवा करने का फैसला किया।
हेमू अधिकारी ने अपने करियर में 21 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 872 रन बनाए। उनके नाम 1 शतक और 4 अर्धशतक हैं। बल्लेबाजी के साथ-साथ वह दाएं हाथ से लेग स्पिन गेंदबाजी भी करते थे। उन्होंने अपने करियर में 3 विकेट भी लिए। साल 2003 में उनका निधन हो गया, लेकिन देशभक्ति और खेल भावना की उनकी मिसाल आज भी भारतीय क्रिकेट में अमर है।
हेमू अधिकारी की वीरता की कहानी
यह कहानी 1940 के दशक की है, जब हेमू अधिकारी क्रिकेट जगत में अपनी पहचान बना चुके थे। हालांकि, जब उनके सामने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में टेस्ट डेब्यू का मौका आया, तो उन्होंने इसे ठुकराकर भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया। दूसरे विश्व युद्ध के पहले, हेमू अधिकारी ने देश सेवा को सर्वोपरि माना और अपने करियर को पीछे छोड़ दिया। 1947 में उनकी इस निष्ठा को मान्यता मिली, जब उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से सम्मानित किया गया। उनकी इस देशभक्ति और बलिदान की मिसाल आज भी हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।
सेना की ड्यूटी के साथ निभाई क्रिकेट की जिम्मेदारी
हेमू अधिकारी ने 1947 में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं जारी रखीं। यह उनकी निष्ठा और बलिदान की मिसाल थी कि उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर भी शानदार प्रदर्शन किया। 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच में उन्होंने नाबाद 81 रन बनाए और गुलाम अहमद के साथ मिलकर 10वें विकेट के लिए 109 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की। यह पारी आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण मानी जाती है। हेमू की क्रिकेट और सेना दोनों में दी गई सेवा देश के प्रति उनके समर्पण की अद्भुत कहानी है।