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सुपर-8 नियम और स्टॉप क्लॉक समझें

क्या है स्टॉप क्लॉक नियम? इन नियमों के तहत खेले जाएंगे ICC T20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मुकाबले

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 राउंड में ग्रुप स्टेज जैसे ही नियम लागू रहेंगे। जानें बारिश, अतिरिक्त समय और 60 सेकेंड स्टॉप क्लॉक नियम कैसे काम करता है।


क्या है स्टॉप क्लॉक नियम इन नियमों के तहत खेले जाएंगे icc t20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मुकाबले

cricket News |

नई दिल्लीः आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का ग्रुप स्टेज अपने अंतिम पड़ाव पर है। भारत और नीदरलैंड के खिलाफ आखिरी ग्रुप मैच खेला जा रहा है। इस मुकाबले के बीच अब नजरें सुपर-8 राउंड पर टिक गई हैं। सभी 8 टीमें इस चरण में पहुंच चुकी हैं। सुपर-8 में हर टीम तीन-तीन मैच खेलेगी और यहीं से सेमीफाइनल की तस्वीर साफ होगी। इस चरण में भी ज्यादातर नियम ग्रुप स्टेज जैसे ही रहेंगे, लेकिन कुछ खास बातों को समझना जरूरी है।

सुपर-8 का फॉर्मेट क्या होगा?

सुपर-8 में कुल आठ टीमें होंगी। इन्हें ग्रुप स्टेज प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। हर टीम को तीन मुकाबले खेलने होंगे। अंक तालिका के आधार पर शीर्ष टीमें अगले दौर में प्रवेश करेंगी। ऑस्ट्रेलिया, भारत, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका टी20 विश्व कप 2026 के सुपर 8 चरण के ग्रुप 1 के लिए प्री-सीडेड टीमें हैं। वहीं, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, इंग्लैंड और पाकिस्तान ग्रुप 2 के लिए पूर्व-वरीयता प्राप्त टीमें हैं।


सुपर 8 टीमें तय होने के बाद मेजबानी कर रही भारतीय टीम का अपना पहला सुपर-8 मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलेगा। लीग मुकाबले की तरह ही सुपर-8 का राउंड भी पुराने नियमों की तरह खेला जाएगा। जानिए ये नियमः

बारिश होने पर क्या होगा?

अगर किसी मैच में बारिश बाधा डालती है, तो परिणाम निकालने के लिए दोनों टीमों का कम से कम पांच-पांच ओवर खेलना जरूरी है। सुपर-8 में भी बारिश से मैच धुलने की स्थिति में रिजर्व डे का प्रावधान नहीं है। यानी अगर मैच पूरी तरह धुल जाता है और न्यूनतम ओवर भी संभव नहीं होते, तो दोनों टीमों को अंक बांट दिए जाएंगे।

देरी या बाधा की स्थिति में अतिरिक्त समय

ग्रुप स्टेज की तरह सुपर-8 में भी मैच पूरा कराने के लिए अतिरिक्त 60 मिनट का समय दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मैच का नतीजा निकल सके। साथ ही हर टीम को दो असफल डीआरएस रिव्यू की अनुमति रहेगी। यानी दो बार गलत रिव्यू लेने के बाद टीम का कोटा खत्म हो जाएगा।

क्या है 60 सेकेंड का स्टॉप क्लॉक नियम?

स्टॉप क्लॉक नियम का मकसद मैच की रफ्तार बनाए रखना है। जब किसी ओवर की आखिरी गेंद डेड बॉल घोषित हो जाती है और उससे जुड़े सभी डीआरएस रिव्यू खत्म हो जाते हैं, तो थर्ड अंपायर 60 सेकेंड का टाइमर शुरू करता है।

स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर उल्टी गिनती चलती है ताकि दोनों टीमों को समय की जानकारी रहे। इस दौरान फील्डिंग टीम को अगला ओवर शुरू करना होता है।

देरी होने पर क्या सजा मिलती है?

अगर फील्डिंग टीम 60 सेकेंड के भीतर अगला ओवर शुरू नहीं करती, तो:

पहली बार: कप्तान को मौखिक चेतावनी दी जाएगी।

दूसरी बार: अंतिम चेतावनी मिलेगी।

तीसरी बार: बल्लेबाजी टीम को पांच पेनल्टी रन दिए जाएंगे।

यह नियम मैच की गति बनाए रखने के लिए सख्ती से लागू किया जाता है।

किन हालात में टाइमर रोका जा सकता है?

कुछ विशेष परिस्थितियों में अंपायर टाइमर को रोक या रद्द कर सकते हैं। जैसे:

-नए बल्लेबाज के मैदान पर आने के दौरान

-आधिकारिक ड्रिंक्स ब्रेक के समय

-खिलाड़ी की चोट और उपचार के दौरान

-मैदान पर किसी उपकरण के टूटने या गेंद खो जाने पर

-बल्लेबाजी टीम की वजह से हुई देरी की स्थिति में

इन परिस्थितियों में थर्ड अंपायर 60 सेकेंड का टाइमर अस्थायी रूप से बंद कर देता है।

क्यों अहम है स्टॉप क्लॉक नियम?

टी20 फॉर्मेट तेज रफ्तार क्रिकेट के लिए जाना जाता है। ऐसे में ओवरों के बीच अनावश्यक देरी खेल की लय बिगाड़ सकती है। स्टॉप क्लॉक नियम से मैच समय पर खत्म होते हैं और दर्शकों को बेहतर अनुभव मिलता है। सुपर-8 जैसे अहम दौर में हर रन और हर मिनट की कीमत होती है। ऐसे में इन नियमों की समझ टीमों और फैंस दोनों के लिए बेहद जरूरी है।

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