आईसीसी टी 20 सुपर 8 के अहम मुकाबले में भारत के लिए टॉस जीतना बेहद जरूरी है। ओस, पिच और नेट रन रेट की गणना इस मैच को और भी रणनीतिक बना रही है।
नई दिल्लीः आईसीसी टी20 विश्व कप में गुरुवार, 26 फरवरी को खेला जाने वाला मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा बन गया है। सुपर आठ चरण में यह टीम का दूसरा मैच है, जहां उसे जिंबाब्वे से भिड़ना है। पहले दक्षिण अफ्रीका से बड़ी हार और अन्य टीमों के बेहतर प्रदर्शन ने अंक तालिका का गणित उलझा दिया है। अब भारत को सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बेहतर अंतर से जीत दर्ज करनी होगी।
टॉस क्यों बनेगा असली निर्णायक
इस मैदान पर शाम होते-होते ओस गिरना शुरू हो जाती है। आधी पारी के बाद आउटफील्ड फिसलन भरी हो जाती है और गेंद गीली होने लगती है। ऐसे में गेंदबाजों के लिए पकड़ बनाना मुश्किल हो जाता है। यॉर्कर फेंकने की कोशिश फुलटॉस में बदल जाती है और लाइन-लेंथ बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को हालात का फायदा मिलता है। हालांकि पिच थोड़ी धीमी है और स्पिनरों को मदद मिलती है, लेकिन ओस का असर गेंदबाजी करने वाली टीम की योजना पर भारी पड़ सकता है।
नेट रन रेट का बड़ा गणित
इस मुकाबले में सिर्फ जीत काफी नहीं है। भारत को अपने नेट रन रेट को भी बेहतर करना है। यदि लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम को पता होगा कि कितने ओवर में और किस गति से रन बनाने हैं, तो रणनीति बनाना आसान हो जाएगा।
दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को साफ गणना मिल जाती है कि उसे कितने अंतर से जीत दर्ज करनी है। यही वजह है कि टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
जीत का रास्ता रणनीति से होकर
अगर भारत टॉस जीतता है और परिस्थितियों का सही इस्तेमाल करता है, तो न केवल जीत आसान हो सकती है, बल्कि अंक तालिका में स्थिति भी मजबूत होगी। लेकिन अगर टॉस हाथ से निकल गया, तो मुकाबला कठिन हो सकता है और नेट रन रेट की लड़ाई और पेचीदा बन सकती है।
ऐसे में जिंबाब्वे के खिलाफ यह मुकाबला सिर्फ मैदान पर कौशल की नहीं, बल्कि किस्मत और रणनीति की भी परीक्षा है।