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चार साल पहले आज ही के दिन चमका था नीरज का भाला, एशिया का जेवलिन पावरहाउस बन रहा भारत

चार साल पहले आज ही के दिन चमका था नीरज का भाला, एशिया का जेवलिन पावरहाउस बन रहा भारत

चार साल पहले आज ही के दिन चमका था नीरज का भाला एशिया का जेवलिन पावरहाउस बन रहा भारत

World Javelin Day: नीरज चोपड़ा की टोक्यो ओलंपिक में ऐतिहासिक स्वर्णिम जीत ने भारतीय एथलेटिक्स में एक नई क्रांति ला दी। उनकी इसी उपलब्धि को सलाम करते हुए भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन हर साल 7 अगस्त को 'नेशनल जैवलिन डे' के तौर पर मनाता है। नीरज की कामयाबी ने न सिर्फ देश को गर्व से भर दिया, बल्कि भारत को जैवलिन थ्रो की दुनिया में एक नई ताकत बनाकर खड़ा कर दिया।

जैवलिन थ्रो के लिए समर्पित एक खास दिन

7 अगस्त भारतीय खेल इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है। इस दिन को 'नेशनल जैवलिन डे' के रूप में मनाया जाता है, जो टोक्यो ओलंपिक 2020 में नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत को सम्मान देने का प्रतीक है। 7 अगस्त 2021 को जब नीरज का भाला आसमान चीरता हुआ 87.58 मीटर दूर जा गिरा, तब सिर्फ एक स्वर्ण पदक ही नहीं बल्कि भारत के ट्रैक एंड फील्ड इतिहास का एक नया युग शुरू हुआ।

नीरज चोपड़ा के नाम पर भारत की सबसे बड़ी जैवलिन प्रतियोगिता

भारत में एथलेटिक्स को लोकप्रियता हासिल करने में लंबा समय लगा, लेकिन नीरज चोपड़ा की ऐतिहासिक उपलब्धियों ने इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव किया। उनकी ओलंपिक जीत और लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने देश में भाला फेंक को नई पहचान दी है। इसी प्रभाव का नतीजा है ‘नीरज चोपड़ा क्लासिक जैवलिन थ्रो’...एक ऐसी एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, जिसे वर्ल्ड एथलेटिक्स ने ‘ए’ कैटेगरी में शामिल किया है।

यह प्रतियोगिता रैंकिंग प्वॉइंट्स के मामले में कॉन्टिनेंटल टूर गोल्ड लेवल की प्रतियोगिता के समकक्ष मानी जाती है। एनसी क्लासिक भारत में अब तक आयोजित सबसे उच्च स्तरीय एथलेटिक्स इवेंट्स में से एक बन चुकी है।

नीरज की प्रेरणा से आगे बढ़ती भारतीय जैवलिन की नई पीढ़ी

नीरज चोपड़ा भले ही इस खेल का सबसे लोकप्रिय चेहरा हों, लेकिन भाला फेंक में भारत का उदय सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित नहीं है। शिवपाल सिंह, रोहित यादव, किशोर जेना और अन्नू रानी जैसे प्रतिभाशाली एथलीटों की उपलब्धियों ने भी इस स्पर्धा में भारत की ताकत दिखाई है।

इस सफर ने भारतीय एथलेटिक्स की सोच में बड़ा बदलाव लाया है। अब भारतीय जैवलिन थ्रोअर केवल भाग लेने नहीं, बल्कि पोडियम पर कब्जा जमाने के लक्ष्य के साथ उतरते हैं। नीरज खुद लगातार नई ऊंचाइयों को छूते रहे हैं। टोक्यो में स्वर्ण, पेरिस 2024 में 89.45 मीटर के थ्रो के साथ रजत, बुडापेस्ट में वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड और ज्यूरिख डायमंड लीग में ऐतिहासिक जीत।

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