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चेतेश्वर पुजारा की 5 ऐतिहासिक पारियां, जिनसे बने टेस्ट क्रिकेट के 'द वॉल'

चेतेश्वर पुजारा की 5 ऐतिहासिक पारियां, जिनसे बने टेस्ट क्रिकेट के 'द वॉल'

चेतेश्वर पुजारा की 5 ऐतिहासिक पारियां जिनसे बने टेस्ट क्रिकेट के द वॉल

Cheteshwar Pujara Retirement Reason Update: भारतीय क्रिकेट की दीवार कहलाए चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को सभी फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी। राहुल द्रविड़ के रिटायरमेंट के बाद जब टीम इंडिया को नई ‘वॉल’ की तलाश थी, तब पुजारा ने अपनी सधी हुई बल्लेबाजी से उस खालीपन को भरा था। वर्षों तक टेस्ट क्रिकेट में भारत की रीढ़ बने रहने वाले इस बल्लेबाज ने अब अंतरराष्ट्रीय पिच को अलविदा कह दिया।

चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को सोशल मीडिया पर अपने संन्यास की घोषणा की। राहुल द्रविड़ के बाद उन्हें भारतीय क्रिकेट की नई दीवार कहा गया। इसका कारण उनकी अविस्मरणीय पारियां रहीं। कई मौकों पर उन्होंने टीम को मुश्किल हालात से निकालकर जीत की राह दिखाई। उनकी जुझारू बल्लेबाजी और विकेट पर डटे रहने की क्षमता ने उन्हें ‘द वॉल’ की उपाधि दिलाई। संन्यास के बाद भी उनकी पहचान लंबे समय तक इसी नाम से बनी रहेगी। अब आइए नज़र डालते हैं पुजारा की टेस्ट क्रिकेट की 5 सबसे यादगार पारियों पर....

                                                                                                                पुजारा की वे 5 ऐतिहासिक पारियां:

इंग्लैंड के खिलाफ पहला दोहरा शतक

अहमदाबाद टेस्ट 2012 पुजारा के करियर का टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ। इंग्लैंड के खिलाफ नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने नाबाद 206 रन ठोक डाले। यह उनका टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक था, जिसमें उन्होंने 389 गेंदों का सामना कर 21 चौके लगाए। करीब साढ़े आठ घंटे क्रीज पर डटे रहकर उन्होंने इंग्लिश गेंदबाजों को थका दिया। दूसरी पारी में भी वे नाबाद 41 रन बनाकर लौटे। भारत ने यह मैच 9 विकेट से जीता। इसी मुकाबले से पुजारा को टेस्ट विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में पहचान मिली।

रांची में मैराथन पारी

2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची टेस्ट में पुजारा ने शानदार पारी खेली। उन्होंने 525 गेंदों का सामना करते हुए 202 रन बनाए और भारत के लिए टेस्ट की एक पारी में सबसे ज्यादा गेंदें खेलने का रिकॉर्ड बनाया। इस दौरान उन्होंने 21 चौके और 1 छक्का जड़ा। मैच में भारत दबाव में था और सीरीज हारने का खतरा था, लेकिन पुजारा ने धैर्य दिखाकर टीम को संभाला। उनकी इस लंबी पारी से मैच ड्रॉ हुआ और भारत सीरीज में टिका रहा।

जोहान्सबर्ग में जुझारू पारी

दक्षिण अफ्रीका की तेज़ और उछालभरी पिचों पर रन बनाना किसी भी बल्लेबाज़ के लिए बड़ी चुनौती होती है। 2018 में जोहान्सबर्ग टेस्ट में पुजारा ने ऐसी ही मुश्किल परिस्थितियों में जुझारूपन दिखाया था। भारत ने सिर्फ़ 7 रन पर 2 विकेट गंवा दिए थे, लेकिन पुजारा ने बहादुरी से बल्लेबाज़ी की। पुजारा ने नाबाद 153 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 270 गेंदों का सामना किया और 21 चौके लगाए। उनकी इस पारी के दम पर भारत ने मैच जीत लिया।

ऑस्ट्रेलिया में जीत की नींव

2018-19 के ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पुजारा टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत साबित हुए। एडिलेड टेस्ट में भारत ने जल्दी-जल्दी दो विकेट गंवा दिए थे, लेकिन पुजारा ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए 246 गेंदों में 123 रन बनाए। उनकी पारी में सात चौके और दो छक्के शामिल थे। इस जुझारू पारी की बदौलत भारत पहली पारी में 250 रन तक पहुंचा। अंततः मैच 31 रनों से जीत लिया। यही वह पारी थी जिसने भारत की 71 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने की नींव रखी।

सिडनी में दिखाया धैर्य

2021 ऑस्ट्रेलिया दौरे का सिडनी टेस्ट पुजारा की जुझारूपन भरी बल्लेबाजी का गवाह बना। विराट कोहली स्वदेश लौट चुके थे। वहीं टीम दबाव में थी। ऐसे हालात में पुजारा ने 205 गेंदों का सामना करते हुए 77 रन बनाए। इस पारी में भले शतक नहीं आया, लेकिन इसका असर शतक से कहीं बड़ा था। उन्होंने हनुमा विहारी के साथ मिलकर 148 रनों की साझेदारी की और कई बार गेंदें शरीर पर झेलीं, फिर भी हार नहीं मानी। उनकी इस पारी ने भारत को 407 रनों तक पहुंचाया। उन्होंने मुकाबला ड्रॉ कराया, जिससे सीरीज में भारत की उम्मीदें जिंदा रहीं। आगे ब्रिस्बेन टेस्ट में भी पुजारा ने अर्धशतक लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम योगदान दिया।