पश्चिम बंगाल चुनाव में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.6% मतदान दर्ज। क्या यह बदलाव का संकेत है? ममता बनर्जी के बयान से सियासी अटकलें तेज।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। 152 सीटों पर लगभग 92.6 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। आखिर यह भारी मतदान किस ओर संकेत करता है? क्या यह परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है? पश्चिम बंगाल का इतिहास तो यही कहता है। 2011 में जब रिकॉर्ड 85.55 मतदान हुआ था तब बड़ा बदलाव देखने को मिला था। उस समय 34 साल पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस बंगाल की सत्ता में आई थी। तो क्या इस बार यह समझा जाए कि पश्चिम बंगाल से वर्तमान सरकार का सत्ता पलट होने वाला है और दूसरे नंबर पर अपनी जगह बना चुकी भाजपा सत्ता में आने वाली है।
हालांकि इस पर कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी ही है। चार मई को आने वाले परिणाम ही इस पर मुहर लगाएंगे। लेकिन इस बार की भारी भागीदारी यह साफ करती है कि बंगाल का मतदाता बेहद जागरूक है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है। चुनाव आयोग ने जैसे ही मतदान का आंकड़ा जारी किया, इसके बाद ममता बनर्जी के एक बयान ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें कुर्सी का कोई प्रेम नहीं है। इस बयान का तो सीधे सीधे अर्थ यही निकलता है कि उन्होंने पहले चरण में ही अपनी हार स्वीकार कर ली। सवाल उठ रहे हैं कि अभी दूसरे चरण की वोटिंग बाकी है तो जमीनी नेता ममता बनर्जी ने इस तरह का बयान क्यों दिया है? इसका अर्थ यह भी निकाला जा सकता है कि ममता बनर्जी के स्थान पर कोई दूसरा मुख्यमंत्री बनेगा?
सोशल मीडिया पर तो यहां तक चर्चा हो रही है कि वह अपने भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी को सत्ता सौंपने का मन बना चुकी है। शायद इसलिए वह अभी से मुझे कुर्सी नहीं चाहिए जैसा बयान दे रही हैं। दूसरा अनुमान यह लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल चुनाव का परिणाम आने के बाद दिल्ली की राजनीति करने का मूड चना चुकी हैं। क्योंकि ममता ने कुर्सी नहीं चाहिए वाले बयान के साथ यह भी कहा है कि वह सभी विपक्षी दलों को एकजुट करके दिल्ली (केंद्र की सत्ता) पर विजय हासिल करने के मिशन पर निकलेंगी। हालाकि इस पर संदेह है। विपक्ष की एकजुटता कितनी टिकी है यह हमें इतिहास बताता है। तीसरा अनुमान यह लगाया जा रहा है कि विपक्षी दलों के इंडिया गठंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी खुद करना चाहती हैं। वह अभी से इसके संकेत दे रही हैं।
क्योंकि ममता बनर्जी के इस बयान से कुछ देर पहले ही कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार के रवैये की वजह से पश्चिम बंगाल में भाजपा पैठ बना रही है। यहां याद करा दें कि 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इंडिया गठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और आआपा नेता अरविंद केजरीवाल सरीखे नेता ममता बनर्जी के हाथों में इंडिया गठबंधन की कमान सौंपने की बात कह चुके है। सबसे अधिक अनुमान तो इस बात पर लगाया जा रहा है कि बंपर मतदान के बाद ममता बनर्जी यह समझ चुकी है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हवा खराब है और भाजपा परिवर्तन करने जा रही है।
ऐसे में वह अभी से ही मुख्यमंत्री के पद से मोह नहीं रखने की बातें कर रही हैं। सबसे अधिक मतदान का मतलब 'लहर' का संकेत भी होता है। इस बार राज्य में लागू हुई एसआईआर का मुद्दा भी हावी रहा। बहरहाल जो भी हो जिस तरह से पश्चिम बंगाल में पहले चरण में भारी मतदान हुआ है, उससे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि चार मई को सबकुछ तय हो जाएगा लेकिन उससे पहले जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे तो यही जाहिर हो रहा है कि पश्चिम बंगाल बदलाव की ओर है।