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Vindhya Turns Into Drug Peddling Hub, Crime Rises

ड्रग्स पैडलिंग का गढ़ बना विध्य

विंध्य क्षेत्र में गांजा, कोरेक्स और नशे का संगठित कारोबार तेज़ी से फैल रहा है। पुलिस आंकड़ों में ढाई गुना उछाल, सतना बना ट्रांजिट हब


ड्रग्स पैडलिंग का गढ़ बना विध्य

हरिकिशोर शुक्ला

विंध्य क्षेत्र जिसे कभी शांति, संस्कृति और तीर्थों की धरती माना जाता था, आज नशे के संगठित कारोबार की गिरफ्त में आ चुका है। सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जैसे जिलों में गांजा, अफीम, स्मैक, कोरेक्स सिरप और अवैध शराब की तस्करी अब छुटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक नियोजित नेटवर्क का रूप ले चुकी है। यह कहा जा सकता है कि विंध्य ड्रग्स पैडलिंग का मजबूत गढ़ बन चुका है। पिछले दो साल में यहां हुई कार्रवाइयों में ढाई गुना इजाफा हुआ है। पूरे विंध्य क्षेत्र में सतना एक ऐसा स्थान बनकर उभरा जिसे नशे का ट्रांजिट हब कहा जाता है। सतना से उप्र, बिहार जैसे क्षेत्रों में शराब और गांजा पहुंचाया जाता है। गांजा के तमाम कुख्यात तस्कर यहां पर अपना साम्राज्य बनाए हुए हैं। सबसे बड़ा नाम अनूप जायसवाल उर्फ जस्सा का है, जो सतना-मैहर सहित पन्ना क्षेत्र में गांजा और शराब सप्लाई का धंधा दो दशकों से बेहिचक चला रहा है। वहीं अब राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी का जीजा गांजा कोरेक्स और शराब तस्करी में अंतरराज्यीय पहचान बना रहा है।

  • 2 वर्ष में 40 फीसदी बढ़े कोरेक्स गांजा के मामले

  • गांजा-कोरेक्स की बस-ट्रेन से भी आपूर्ति

  • 2024 में रीवा में नशे के 268 मामले 2025 में 634 हो गाए

  • थाने से 200 मीटर दूर नशे की आपूर्ति

ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड से हो रही पूरे विंध्य में स्मगलिंग

सतना जिले में अनूप जायसवाल गांजा-शराब का सबसे बड़ा चेहरा

रीवा-सीधी और सिंगरौली के रास्ते उ.प्र. बिहार पहुंचता है गांजा

राज्यमंत्री के बहनोई ने बनाई अंतरराज्यीय गांजा पैडलर की पहचान

जिले में दो साल के अंदर बढ़ा ढाई गुना अपराध का ग्राफ

सतना आसपास के जिलों का ट्रांजिट हब बनकर उभरा

नशा कारोबार के बोलते आंकड़े

2024- कुल मामले-268, गांजा, 176, मेडिकल नशा 73 अन्य मामले 13

2025-कुल मामले 634, गांजा, 342, मेडिकल नशा 274, अन्य मामले,18

ट्रांजिट हब बनी सीमेंट सिटी

सतना की भौगोलिक स्थिति इसे नशा तस्करों के लिए मुफीद बना रही है। उ.प्र., छत्तीसगढ़ और झारखंड को जोड़ने वाले मार्गों पर स्थित होने के कारण यहां गांजा और अफीम की खेप कुछ घंटों के ठहराव के बाद आगे बढ़ा दी जाती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बीते दो वर्षों में सतना में कोरेक्स और गांजा के मामलों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। कोलगवां, सिविल लाइन, जैतवारा, रामपुर बघेलान और नागौद थाना क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं। कुल मिलाकर सीमेंट सिटी अब नशे का ट्रांजिट हब बन चुकी है।

रीवा संभाग में बढ़े ढाई गुना मामले

विंध्य क्षेत्र तेजी से ड्रग्स पैडलिंग का गढ़ बनता जा रहा है। यह कोई आरोप या राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि खुद पुलिस के रिकॉर्ड इस गंभीर सच्चाई की तस्दीक कर रहे हैं। रीवा संभाग में नशे के कारोबार ने जिस रफ्तार से पैर पसारे हैं, उसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक ढांचे दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तोस्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है। जहां बीते वर्ष 2024 में रीवा संभाग में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 268 प्रकरण दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 634 तक पहुंच गई। यानी महज एक वर्ष में नशे से जुड़े अपराधों में ढाई गुना से अधिक का उछाल दर्ज किया गया है। इन 634 प्रकरणों का विश्लेषण करें तो तस्वीर और साफ होती है। सबसे अधिक 342 मामले गांजा तस्करी से जुड़े हैं। इसके बाद मेडिकल नशे यानी प्रतिबंधित दवाओं, सिरप, इंजेक्शन और टेबलेट्स से जुड़े 274 प्रकरण सामने आए हैं। इसके अलावा अन्य प्रकार के नशीले पदार्थों के 18 मामले भी दर्ज किए गए हैं। वहीं इस साल करीब एक हजार से अधिक लोग सलाखों के पीछे पहुंचे।

भौगोलिक स्थिति आ रही रास

विशेषज्ञों का मानना है कि विंध्य क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ड्रग्स पैडलिंग के लिए मुफीद बनती जा रही है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश की सीमाओं से सटा होना, दुर्गम इलाकों की भरमार और सीमित पुलिस बल-इन सबका फायदा तस्कर खुलेआम उठा रहे हैं। गांजा तस्करी के मामले हों या मेडिकल नशे की आपूर्ति का विध्य अब सिर्फ खपत का ही नहीं, बल्कि ट्रांजिट और वितरण केंद्र बनता जा रहा है। मेडिकल नशे का बढ़ता चलन प्रशासन के लिए अलग सिरदर्द बन चुका है।

युवाओं की पसंद मेडिकल नशा

युवाओं में कॉरेक्स, प्रतिबंधित सिरप, ट्रामाडोल जैसी दवाओं की लत तेजी से फैल रही है। कई मामलों में स्थानीय मेडिकल स्टोर, विचौलिए और अंतरराज्यीय नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है, हालांकि कार्रवाई अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा जरूर कर रही है, लेकिन आंकड़े यह भी बताते हैं कि कार्रवाई के साथ-साथ अपराध भी उसी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या केवल गिरफ्तारी और जब्ती से इस जड़ तक पहुंचा जा सकता है या फिर बड़े नेटवर्क, फाइनेंसर और सप्लाई चेन पर प्रहार जरूरी है।

रीवा कोरेक्स सिटी में तब्दील

विंध्य क्षेत्र के रीवा को लंबे समय से कोरेक्स सिटी के नाम से जाना जाता रहा है। रीवा जिले में कोरेक्स सिरप की लत इतनी गंभीर है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, यहां के 40 प्रतिशत युवा इसकी चपेट में हैं। हाल ही में रीवा पुलिस ने ऑपरेशन क्लीन के तहत बड़ी कार्रवाई की, जिसमें 5157 कोरेक्स सिरप की शीशियों को सीमेंट फैक्ट्री में नष्ट किया गया। यह पहली बार था जब इतनी बड़ी मात्रा में नशीली सिरप को सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया। पुलिस का दावा है कि अब यह प्रक्रिया नियमित होगी, जैसे गांजा और शराब को नष्ट किया जाता है।

सीधी में कोरियर सर्विस से भी मिल रही कोरेक्स

सीधी जिले में भी कोरेक्स की तस्करी नए-नए तरीकों से हो रही है। मई 2024 में पुलिस ने कोरियर सर्विस के जरिए कोरेक्स बेचने वाले तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। आरोपी ऑनलाइन ऑर्डर लेकर नशीली सिरप भेजते थे। जिले में अवैध नशे का कारोबार फल-फूल रहा है, जिसमें कॉरेक्स के अलावा गांजा और अवैध शराब भी शामिल हैं। रीवा के कबाड़ी मोहल्ले में तो खुलेआम कोरेक्स की बिक्री का वीडियो वायरल हुआ, जिरस्के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। थाने से महज 200 मीटर दूर यह धंधा चल रहा था।

तस्करों ने रेल रास्ता भी अपनाया

सतना जीआरपी ने गांजा की एक खेप पर कार्रवाई की थी। ट्रेन नंबर 18201 दुर्ग-कानपुर नौतनवा एक्सप्रेस की जनरल बोगी में सीट के नीचे दो ट्राली बैग में भरा 77 किलो 410 ग्राम गांजा जब्त किया था। बीते 1 अप्रैल 2024 को ट्राली बैग के इंजन से दूसरे नंबर की जनरल बोगी में लावारिस नीले और बैंगनी कलर के दो ट्राली बैग रखे थे। तत्कालीन चौकी प्रभारी एलपी कश्यप ने कंट्रोल रूम से सूचना मिलने पर नौतनवा एक्सप्रेस से गांजा की सोप जब्त की थी।

छह साल पहले पकड़ी गई थी 60 लाख की सिरप

जिले की पुलिस ने शहर के एक गोदाम में दबिश देकर नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही अवैध कफ सिरप जब्त की थी। शहर के टिकुरिया टोला स्थित एक गोदाम में पुलिस ने 10 जुलाई 2019 में रात में छापा मारा, जिसमें 60 लाख रुपए कीमत की 419 पेटी कफ सिरप बरामद हुई। पुलिस ने मामले में एक आरोपी संजय ताम्रकार को हिरासत में लिया था।

क्षेतिहरों की शक्ल में छिपे नशे के सौदागर

अफीम और गांजा का उत्पादन करने वाले लोगों ने नदी के किनारों के खेतों में अपने काले इरादों को अंजाम देने की कोशिश की, परंतु पुलिस ने उनको बेनकाब करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और फसल का नष्टीकरण किया। 14 मार्च 2024 को मैहर जिले की बदेरा पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी अरुण सोनी के नेतृत्व में दो सगे भाइयों को पकड़ कर 6 लाख की अफीम जब्त की। कुबरी गांव में चंद्रभान सिंह के खेत पर छापा मारकर अफीम की फसल लहलहाती मिली, पौधों पर फल लग चुके थे। चंद्रभान सिंह के दोनों बेटे जुगुल किशोर सिंह और आनंद किशोर सिंह को पकड़ा गया था।

कोरेक्स तस्करों ने चार्टर्ड बस से पहुंचाई सिरप

जिले में नशीली कफ सिरप की खेप चार्टर्ड बस के जरिए पहुंचाई जा रही थी। अमरपाटन पुलिस ने इस खेल का भंडाफोड़ करते हुए तीन लाख 26 हजार रुपए की नशीली कफ सिरप समेत बस और एक बोलेरो वाहन पकड़ा था। इस मामले में बस ड्राइवर समेत 6 लोग गिरफ्तार भी किए गए थे। 6 अगस्त 2023 को भोपाल से रीवा तक जाने वाली भोपाल ट्रेवल्स की बस में 16 पेटी नशीली कफ सिरप ले जाई जा रही थी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया था।

45 लाख रुपए की अफीम बरामद

14 मार्च 2018 को जिले के सभापुर थाना इलाके के रख्या गांव में पुलिस ने 30 डिसमिल में खड़ी अफीम की हरी फसल का खुलासा करते हुए इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर किया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि बरामद की गई अफीम की खेती का मौजूदा अनुमानित बाजार मूल्य तकरीबन 40 से 45 लाख रुपए है। माना जा रहा है कि पकने के बाद इसी अफीम की कीमत 1 करोड़ तक जा सकती थी। सुरजीत सिंह के 30 डिसमिल खेत में अफीम की फसल खड़ी थी। ये फसल सुरजीत ने अपने एक पार्टनर राजा सिंह के साथ मिल कर लगाई थी।

दो दशक तक चार राज्यों में जस्सा ने चलाया नेटवर्क

चार राज्यों में गांजा और शराब की तस्करी का नेटवर्क संचालित करने वाले

कुख्यात तस्कर अनूप जायसवाल उर्फ जस्सा पांच साल पहले दो करोड़ कैश के साथ मैहर में शार्ट एनकाउंटर के दौरान पकड़ा गया था जिसके बाद पुलिस ने बड़ा शिकंजा कसा। उसके रसूख को खत्म करने के लिए प्रशासन ने कानपुर मॉडल अपनाते हुए उसके गांव पोड़ी में अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चला दिया था। तत्कालीन एसडीएम दिव्यांक सिंह के नेतृत्व में राजस्व और वनभूमि पर बने जस्सा के पांच मकानों को जमींदोज कर दिया गया। इस कार्रवाई से जस्नस को करीब एक करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। जस्सा ने सरकारी और वनभूमि पर आलीशान भवन बनाकर उन्हें किराए पर दे रखा था। हैरानी की बात यह रही कि जिस वनभूमि पर उसका निर्माण था, उसके बगल में ही वन चौकी मौजूद थी, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। यह उसके रसूख का साफ संकेत था। हालांकि जब प्रशासन ने अपना शिकंजा कसा ती रसूखदार परिवार भी रहमत की भीख मांगते हुए दिखा था। बताया जाता है कि यह कार्रवाई तब हुई जब सतना जिले के एसपी के नेतृत्व में मैहर में जस्सा का शार्ट एनकाउंटर किया गया। तब पुलिस ने जस्सा को पांच साथियों सहित गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से 94 किलो गांजा, 2 करोड़ से अधिक नकद, लग्जरी गाड़ियों समेत कुल 2 करोड़ 77 लाख रुपए का माल बरामद किया था। कुख्यात तस्कर पर जिले में शराब, गांजा और डकैती के भी केस दर्ज हुए हैं। एक बार जेल से छूटने के बाद भी वह अपराध की दुनिया में अपनी बादशाहत बनाने में कामयाब रहा है।

विंध्य में सरकारी कर्मचारियों ने भी तस्करी में आजमाई किस्मत

विध्य क्षेत्र में बेरोजगार-अनपढ़ लोगों के अलावा सरकारी कर्मचारियों ने भी किस्मत आजमाई। जब पुलिस ने अमरपाटन वाना क्षेत्र के बरेह गांव से एक कে मांजा पकड़ा था। इस गांजे के साथ आबकारी विभाग के बाबू सैलेन्द्र सिंह की गाड़ी श्री पकड़ी गई थी। बाद में बाबू को गिरफ्तार किया था। साल 2010 में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के उड़ीसा (अम ओडिशा) कनेक्शन का राज खुला था। गिरफ्तार किए गए एक आरोपी ने जेल के अंदर जहर खा लिया। 2011 में शैलेन्द्र सिंह की मौत होने के बाद से यह पता नहीं चल पाया कि गांजा तस्करी में शामिल कर्मचारी की रहस्यमय मौत का सच क्या है? करीब 16 साल हो चुके हैं और मौत मिस्ट्री बनकर रह गई।

पोहा की आड़ में लाया गया था डेढ़ करोड़ का गांजा

सिगरौली जिले में एक फरवरी 2022 को एक ट्रक से करीब 150 करोड़ रुपए कीमत का 505 किलोग्राम गांजा जब्त कर पुलिस ने दी लोगों को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनकर ने कार्रवाई की थी। पुलिस को पता बता कि ओडिशा से ट्रक में पोहा के बीच 24 बोरियों में 505 किलोग्राम गांजा छिपाकर छत्तीसगढ़ के रास्ते रीवा व उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद ले जाया जा रहा था। इस काम में लिप्त अंतरराज्यीय गांजा तस्कर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। सतना के अमित कुमार पटेल और अमित उर्फ अप्पू पटेल गांजा लेकर जा रहे थे।

नशीले इंजेक्शन का भी कारोबार मिला

प्रदेशभर में चलाए गए नशा विरोधी अभियान के तहत

शहडोल की कोतवाली पुलिस ने 24 जुलाई 2025 को नशे के सौदागरों को 250 प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया था। कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि कुछ युवक स्टेट बैंक पांडवनगर के पास प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शन की बिक्री की योजना बना रहे हैं। पुलिस ने दबिश दी। मौके पर दो युवक बादल गुप्ता निवासी कल्याणपुर एवं राहुल मलिक निवासी पांडवनगर को नशीले इंजेक्शन के साथ पकड़ा गया। जिनकी अनुमानित कीमत 41.500 रुपए थी। दोनों आरोपियों ने खुलासा किया था कि इस अपराध में ऋषभ तिवारी एवं अजय कुशवाहा भी शामिल थे।

मैहर जिले में कार्रवाई- मैहर में साल 2025 में 20 प्रकरण गांजा तस्करी के दर्ज हुए। जिसमें लगभग 26 आरोधी पकड़े गए और 51.352 किलो गांजा जब्त हुआ। इसकी बाजार में कीमत लगभग 570500 आआंकी गई। इसी प्रकार से कोरेक्स और टेबलेट के 21 प्रकरण कायम हुए, जिसमें से 32 लोगों को पकड़ा गया। कोरेक्स और टेबलेट की कीमत 644121 है। अवैध शराब के कुल 876 प्रकरण दर्ज हुए। देशी 3139.2 लीटर, विदेशी 2099.54 लीटर और हाथ भट्टी 1785.23 कुल कीमत 3087665 आआंकी गई है।