‘द केरला स्टोरी 2’ ने बॉक्स ऑफिस के साथ समाज में भी बहस छेड़ दी। फिल्म की कहानी, कलाकारों के अभिनय और ‘लव जिहाद’ मुद्दे पर उठ रहे सवालों का विश्लेषण।
आशीष कुमार ‘अंशु’
लव जिहाद की हकीकत को उजागर करती फिल्म
रिलीज हुई द केरला स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, बल्कि समाज के उस पैटर्न को एक्सपोज किया है जिसे वर्षों से दबाया जाता रहा। यह फिल्म उन हजारों बहनों की कहानी है जो प्रेम के नाम पर जाल में फंसकर अपनी पहचान, परिवार और सम्मान खो बैठीं। निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने इस बार और गहराई से इस मुद्दे को छुआ है, बिना किसी झूठी पब्लिसिटी के। जहां पहली फिल्म ने जागरूकता फैलाई, वहीं दूसरी फिल्म उन पीड़िताओं को आवाज देती है जो अब तक चुप थीं। फिल्म की कास्ट उल्का गुप्ता (सुरेखा के रूप में), अदिति भाटिया (दिव्या), ऐश्वर्या ओझा (नेहा), सुमित गहलोत (सलीम), अर्जन सिंह औजला (फैजान) और अन्य ने अभूतपूर्व अभिनय किया है। इन कलाकारों ने भावनाओं की गहराई को इतनी सशक्तता से उकेरा है कि दर्शक खुद को कहानी में खो देता है।
कास्ट की तारीफः जीवंत किरदारों का कमाल-फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्ट है। उल्का गुप्ता ने सुरेखा के किरदार में वह दर्द और संघर्ष दिखाया है जो देखकर आंखें नम हो जाती हैं। उनकी आंखों में छिपी मासूमियत और बाद में उठता गुस्सा दोनों ही कमाल के हैं। अदिति भाटिया ने दिव्या के रूप में एक मजबूत, स्वतंत्र लड़की की छवि को बखूबी निभाया, जो प्रेम के जाल में फंसकर टूटती है लेकिन हार नहीं मानती। ऐश्वर्या ओझा ने नेहा के किरदार में संवेदनशीलता और साहस का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। पुरुष कलाकारों में सुमित गहलोत और अर्जन सिंह औजला ने नकारात्मक किरदारों को इतनी सूक्ष्मता से निभाया कि वे नफरत के पात्र लगते हैं, लेकिन अतिरंजित नहीं। सहायक कलाकारों ने भी कहानी को मजबूती दी। कुल मिलाकर, यह कास्ट फिल्म को एक भावनात्मक धमाका बनाती है-जहां हर अभिनेता अपनी भूमिका से ज्यादा जीता है।
बॉक्स ऑफिस पर धमालः सच्चाई की जीत-फिल्म ने रिलीज के नौवें दिन (शनिवार) को 3.75 करोड़ का कलेक्शन किया, जबकि शुक्रवार को 2.75 करोड़। कुल मिलाकर अब तक का टोटल 29.75 करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स में 30 करोड़ ग्रॉस पार) हो चुका है। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि फिल्म ने अस्सी, ओ रोमियो, चरक जैसी अन्य रिलीज को पीछे छोड़ दिया। पहले हफ्ते में 22-23 करोड़ के आसपास रहकर भी वीकएंड पर मजबूत उछाल दिखाया। बजट लगभग 28-30 करोड़ होने के बावजूद फिल्म ने 90% से ज्यादा रिकवर कर लिया और सफलता की ओर बढ़ रही है। यह मुंह-जुबानी प्रचार की ताकत है दर्शक खुद कह रहे हैं कि यह देखने लायक है। कोई फेक न्यूज या बच्चों के अपहरण जैसी झूठी अफवाहें फैलाने की जरूरत नहीं पड़ी, जैसा कुछ अन्य मामलों में हुआ। फिल्म ने अपनी सच्चाई से ही जगह बनाई।
झूठ बनाम हकीकत-फिल्म को लेकर मुख्य आलोचनाएं तीन हैं -प्रोपेगेंडा, इस्लामोफोबिया और 'लव जिहाद' का काल्पनिक नैरेटिव। सबसे बड़ा आरोप है कि 'लव जिहाद' एक काल्पनिक साजिश है। लेकिन फिल्म यह नहीं कहती कि सभी मुस्लिम ऐसा करते हैं -यह कुछ खास पैटर्न और संगठित प्रयासों पर फोकस करती है। वास्तविक घटनाएं, जैसे केरल से आईएसआईएस में शामिल होने वाली महिलाओं की कहानियां (2016-2018 में दर्ज मामले), और कई हाई कोर्ट ऑब्जर्वेशंस (जैसे हदिया केस) इस पैटर्न की ओर इशारा करते हैं।