Breaking News
  • BCCI का ऐलान: IPL के बाद अफगानिस्तान से पहली बार ODI सीरीज खेलेगा भारत, जून 2026 में मुकाबला
  • बड़वानी में मोहन सरकार की पहली कृषि कैबिनेट: 16 योजनाओं पर करीब 28 हजार करोड़ खर्च को मंजूरी
  • LoC पर ड्रोन हलचल के बाद अलर्ट: जम्मू-कश्मीर में 2-3 मार्च को सभी स्कूल बंद
  • भारत को यूरेनियम देगा कनाडा: मोदी-कार्नी मुलाकात में बड़ी डील, डिफेंस और एनर्जी में भी सहयोग
  • इजरायल का दावा: एयर स्ट्राइक में ईरान के खुफिया उपमंत्री समेत कई अफसर ढेर, तनाव और गहरा
  • कुवैत में गिरे अमेरिका के तीन F-15E जेट, ट्रंप ने कबूला, कहा- कुवैत की ‘फ्रेंडली फायर’ में हादसा

होम > विशेष

AI Revolution in Farming: New Story of Rural India

ग्रामीण भारत के परिवर्तन की नई कहानी: खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसे बदल रही है भारतीय खेती? ग्रामीण भारत में एआई आधारित कृषि, नीति, तकनीक और किसानों के भविष्य पर विशेष लेख।


ग्रामीण भारत के परिवर्तन की नई कहानी खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति

बलकार सिंह पूनिया

भारत की कृषि व्यवस्था आज एक ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जो केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और नीतिगत स्तर पर भी दूरगामी प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। सदियों तक परंपरा, अनुभव और अनुमान पर आधारित रही खेती अब धीरे-धीरे आंकड़ा-आधारित, विश्लेषण-केंद्रित और वैज्ञानिक निर्णयों की ओर अग्रसर हो रही है। इस बदलाव के मूल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता है, जिसने खेती की पद्धतियों, किसान की सोच और जोखिम प्रबंधन की क्षमता को नई दिशा दी है। आज खेत केवल बीज और हल से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, पूर्वानुमान प्रणालियों और संवाद-आधारित तकनीकों से ‘सोचने’ लगे हैं।

कृषि केवल उत्पादन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत की लगभग आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में खेती में होने वाला कोई भी संरचनात्मक परिवर्तन सीधे किसानों की आय, जीवन स्तर और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करता है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, कीट प्रकोप और बाजार अस्थिरता के इस दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसानों के लिए एक प्रकार के सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है। मौसम के रुझानों का पूर्वानुमान, सूखे या अत्यधिक वर्षा की चेतावनी, कीट-रोग की समय रहते पहचान और बाजार भाव की जानकारी ये सभी तत्व खेती को अधिक सुरक्षित और लाभकारी बना रहे हैं।

इस परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भारत-विस्तार है। यह एक बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल कृषि मंच है, जिसकी घोषणा बजट 2026-27 में की गई। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी अपनी भाषा में मौसम, मिट्टी, फसल चयन, सिंचाई, रोग-कीट चेतावनी और मंडी भाव से संबंधित समेकित सलाह उपलब्ध कराना है। यह मंच एग्रीस्टैक को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक कृषि ज्ञान से जोड़ता है, जिससे प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों में विकसित ज्ञान सीधे खेतों तक पहुंच सके। यह पहल इस बात का संकेत है कि नीति-निर्माण अब केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन पर केंद्रित हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2026 के अंत तक लगभग 70 प्रतिशत किसान डिजिटल और एआई आधारित खेती अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं, जिससे पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि और लागत में उल्लेखनीय कमी संभव है।

सूचना तक त्वरित और सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने में किसान ई-मित्र की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एक वॉयस आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता संवाद प्रणाली है, जो किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में तुरंत उत्तर देती है। प्रतिदिन हजारों किसानों के प्रश्नों का समाधान करते हुए यह प्रणाली मौसम, कृषि सलाह, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी गांव स्तर तक पहुंचा रही है।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचने से पारदर्शिता बढ़ी है और किसानों की जागरूकता में वृद्धि हुई है। यह बदलाव दर्शाता है कि तकनीक अब केवल शहरी उपभोक्ताओं के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज के सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है।

मौसम संबंधी अनिश्चितताओं के समाधान में ‘मौसम जीपीटी’ जैसे कृषि संवाद उपकरण विशेष रूप से प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। ये उपकरण किसानों को क्षेत्र-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान और खेती संबंधी सलाह प्रदान करते हैं। स्थानीय स्तर पर प्राप्त मौसम संदेशों के आधार पर किसानों ने बुआई और सिंचाई की रणनीतियों में बदलाव किया है। समय पर मिली जानकारी से फसल नुकसान में कमी आई है और उत्पादन में सुधार हुआ है। यह स्पष्ट करता है कि वैज्ञानिक सूचना यदि सही समय पर और सही भाषा में उपलब्ध कराई जाए, तो वह खेती की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।इसी संदर्भ में ‘अन्नम डाटा एआई’ जैसी पहल अलग पहचान बनाती है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ द्वारा विकसित यह मंच केवल मशीन-आधारित सलाह तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि विशेषज्ञों की वास्तविक राय को एआई से जोड़ता है। फसल में बीमारी लगने, सिंचाई प्रबंधन, कटाई और मौसम आधारित निर्णयों में यह प्रणाली त्वरित समाधान प्रदान करती है। 400 से अधिक मौसम मापन यंत्रों का नेटवर्क और 11 भारतीय भाषाओं में सेवा यह दर्शाती है कि यदि तकनीक को स्थानीय जरूरतों से जोड़ा जाए, तो उसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे सकता है।

कीट और रोग नियंत्रण के क्षेत्र में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। किसान अब अपने मोबाइल फोन से फसल की तस्वीर भेजकर रोग या कीट की पहचान कर पा रहे हैं और तुरंत उपचार संबंधी सलाह प्राप्त कर रहे हैं। इससे कीटनाशकों का अनावश्यक उपयोग घटा है, लागत कम हुई है और पर्यावरणीय संतुलन बेहतर बना है। यह पहल न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि सतत और पर्यावरण-अनुकूल कृषि की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।तकनीक का विस्तार केवल मोबाइल या संवाद प्रणालियों तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित ड्रोन और उपग्रह निगरानी ने खेती को अधिक सटीक और नियंत्रित बना दिया है। वास्तविक समय की निगरानी के माध्यम से यह तय किया जा रहा है कि कहां, कब और कितनी मात्रा में उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव आवश्यक है। लक्षित छिड़काव से लागत में कमी आई है और रसायनों का पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी घटा है। यह संसाधन-संकट के इस दौर में अत्यंत प्रासंगिक है, जहां जल, मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा प्राथमिक आवश्यकता बन चुकी है।

 

Related to this topic: