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Robot Soldiers in Future Wars US Iran

अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरेगा रोबोट सैनिक

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच रोबोट सैनिकों की चर्चा तेज। AI आधारित ह्यूमनॉइड सैनिक भविष्य के युद्धों की दिशा बदल सकते हैं, भारत समेत कई देश इस तकनीक पर काम कर रहे हैं।


अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरेगा रोबोट सैनिक

प्रमोद भार्गव

मनुष्य की सोच असीम संभावनाओं से जुड़ी है। कल्पना से शुरू होने वाले विचार सच्चाई के धरातल पर आकार लेते हैं, तो आंखें हैरान रह जाती हैं। सैन्य प्रौद्योगिकी की दुनिया में दिखाई जाने वाली फिल्मी कहानियां अब मानव जीवन की ठोस सच्चाई में बदलती दिख रही हैं। अमेरिकी टेक कंपनी 'फाउंडेशन' ने दुनिया का पहला आदमी जैसा ह्यूमनॉइड कृत्रिम बुद्धि से संचालित रोबोट सैनिक 'फैंटम एमके-1' तैयार कर लिया है। स्टील से बना यह सैनिक रोबोट एम-16 राइफल, रिवॉल्वर और शॉटगन जैसे हथियार चलाने में दक्ष है। इस सैनिक की दक्षता की परख फिलहाल कारखानों और बंदरगाहों पर की जा रही है। अमेरिका ही नहीं रूस, चीन और भारत भी ऐसे सैनिक बनाने में जुटे हैं। भारत का डीआरडीओ ये रोबोट बना रहा है। इजरायल ऐसे सैनिक बना चुका है। हालांकि सैनिक के रूप में अभी उनका युद्ध के मैदान में परीक्षण होना शेष है। यह एक नए शीत युद्ध और नई तकनीक की होड़ की शुरुआत है, जो दुनिया को ऐसे स्व-नियंत्रित रोबोट सैनिकों को सौंपने जा रही है, जो कृत्रिम बुद्धि से विस्फोटक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

इजरायल पहले ही एक ऐसी 'रोक रोबोट' सेना तैयार कर चुका है, जो न केवल युद्ध लड़ेगी, बल्कि सीमा पर इंसानी सैनिकों की जगह भी ले लेगी। इजरायल की विख्यात रक्षा कंपनी | इल्बिट रोबो टीम ने इस सेना को तैयार किया है। रोबो टीम के सीईओ इलाजलेवी के मुताबिक अब तक आकाश में ड्रोन और हवाई रोबोट के जरिए होने वाले सभी काम अब धरती पर भी हो सकेंगे। मानव रहित रोक रोबोट के अंदर स्वयं ही खतरों को भांपकर फैसला लेने की क्षमता विकसित कर दी गई है। कृत्रिम बौद्धिक क्षमता से परिपूर्ण ये रोबोट जंग के मैदान में खराब होने पर इसके पुर्जे साथ चलने वाले रोबोट सैनिक बदल देंगे। इसकी इस विशेषता से रोबोट सैनिक एकाएक निष्क्रिय नहीं होएंगे। 200 किलोग्राम वजन वाले इस रोक रोबोट की दौड़ने की क्षमता 30 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह 1200 किलोमीटर मारक क्षमता वाले हथियार लेकर चलने में सक्षम हैं। इसकी कीमत डेढ़ लाख डॉलर से लेकर तीन लाख डॉलर तक है। मसलन भविष्य के युद्ध रोबोट थलसेना लड़ेगी। ये सैनिक डर और थकान से मुक्त होंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पिछले एक दशक से अपनी हैरतअंगेज उपलब्धियों व भविष्य की संभावनाओं के चलते दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। एलन मस्क, बिल गेट्स और स्टीफन हॉकिंग ने इसकी अतिरिक्त बुद्धि एवं शक्ति से आशंकित होकर कई बार चेताया भी है। बावजूद अनेक ऐसे पूंजी निवेशक और वैज्ञानिक हैं, जो एआई को एक बेहतर भविष्य के सपने के रूप में देखते रहे हैं। क्योंकि आज रोबोट कारखानों में मजदूरी के काम से लेकर शिक्षक, टीवी एंकर, नर्स और अब सैनिक की भूमिका में अवतरित होने जा रहा है। सॉफ्ट बैंक के सीईओ मासायोषी सॉन ने कहा है कि कालांतर में हमारे जूते भी हमारे दिमाग से कहीं ज्यादा होशियार होंगे। इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि कहीं भविष्य में यह मशीनी रोबोट मनुष्य पर ही भारी न पड़ जाए। मानव और मशीन के बीच पैदा होने वाले ये द्वंद हकीकत में किस सच्चाई के रूप में सामने आएंगे, यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन जब-जब कोई नया आविष्कार हुआ है तो वह शंका का कारण तो बना ही है।

भारत सरकार इस कोशीश में है कि तीनों सेनाओं में कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इनटेलीजेंसी) से निर्मित रोबोटिक हथियारों की संख्या बढ़ा दी जाए। इस नाते एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना की शुरुआत की गई है। इस परियोजना का लक्ष्य मानव रहित टैंक, जलपोत, स्वचालित राइफल और रोबो आर्मी तक खड़ी की जाने की तैयारी है। हवाईयानों को भी रोबोटिक हथियारों से सक्षम बनाया जाएगा। यह परियोजना जब क्रियान्वित हो जाएगी तब भारत की थल, जल और वायु सेनाएं युद्ध लड़ने के लिए नई तकनीक से सक्षम हो जाएंगी। टाटा संस के प्रमुख एन चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाला एक उच्च स्तरीय समूह इस परियोजना को अंतिम रूप दे रहा है। इसमें भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भी सहयोग कर रहा है। दरअसल भविष्य के युद्धों में रोबोट और मानव रहित हथियार ही ज्यादा उपयोग में लाए जाएंगे। इससे युद्ध में मानव सैनिकों के प्राण बचेंगे। परंतु रक्षा विशेषज्ञों की चिंता है कि यदि युद्ध के दौरान एआई में तकनीकी व्यवधान और हैकिंग के बड़े संकट हैं। 

अतएव इंसानी नियंत्रण से मुक्त इन मशीनी सैनिकों को फैसले लेने की छूट मिल जाती है तो ये युद्ध को पलों में तांडव में बदल सकते हैं। लेकिन भारत जैसे देश को सेना को बदलती परिस्थितियों की जरूरतों के अनुसार ढालना जरूरी है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर दृश्य दुश्मनों से कहीं ज्यादा अदृश्य शत्रुओं की चुनौती कहीं अधिक है। साफ है, इनसे निपटना आसान नहीं है। क्योंकि ये सामने तो दिखाई नहीं देते हैं, मगर इनका धोखे से किया गया हमला बड़ा खतरनाक होता है। ऐसे ही हमलों के चलते हम कश्मीर घाटी और पाक सीमा पर 42000 से भी ज्यादा नागरिक और सैनिक गवां चुके हैं। हाल ही में पहलगाम में हुए इन आतंकियों ने 26 पर्यटकों के प्राण ले लिए थे। इसी की प्रतिक्रिया में ऑपरेशन सिंदूर जारी था। साफ है, इन धोखेबाज ताकतों से अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़े उपकरणों से ही निपटना बेहतर है। इस कड़ी में अब भारतीय रोबो सेना जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ने के लिए उतारने की तैयारी की जा रही है। 

ये रोबोट आतंकियों के गुप्त ठिकानों में दृश्य व अदृश्य शक्ति के रूप में उतरकर उनकी मौजूदगी की सटीक जानकारी तो देंगे ही, अलबत्ता उन्हें पलों में तबाह भी कर देंगे। ये रोबोट घाटी एवं नियंत्रण रेखा पर जो आतंक प्रभावित क्षेत्र हैं, उनमें सेना की आतंकरोधी इकाई और सुरक्षा बलों के लिए सुरक्षा के लौह कवच सिद्ध होंगे। इनकी सीमा पर उपलब्धता के साथ ही सेना को पूरी तरह हाईटेक बना दिया जाएगा। यही नहीं दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम बनाने और पाकिस्तानी सेना के हमलों से मुकाबले में भी यह रोबोट सेना फलदायी सिद्ध होगी।



 

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