Breaking News
  • उत्तर प्रदेश में 20 हजार पदों पर आउटसोर्स भर्तियां होंगी, 426 करोड़ बजट बढ़ा
  • कुबेरेश्वर में 14 फरवरी से रुद्राक्ष महोत्सव- रुद्राक्ष नहीं बंटेंगे, पहली बार 2.5 किमी का पैदल कॉरिडोर
  • विदिशा में 30 फीट गहरे तालाब में गिरी कार, 3 बारातियों की मौत 7 घायल
  • राजस्थान- शादी समारोह में एसिड पीने से 4 की मौत, मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल
  • प्रधानमंत्री ऑफिस आज सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट मीटिंग
  • टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे बड़ी जीत:, 47वीं बार 200+ स्कोर बनाया
  • बांग्लादेश चुनाव में BNP की जीत पर PM मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी
  • दिल्ली के कई स्कूलों को बम की धमकी, पुलिस ने जांच शुरू की

होम > विशेष

गीतः आए हैं ऋतुओं के राजा

गीतः आए हैं ऋतुओं के राजा

"ऋतुओं के राजा" कविता में वसंत ऋतु का स्वागत, प्रकृति की सुंदरता और जीवन में उमंग की झलक मिलती है।

गीतः आए हैं ऋतुओं के राजा

गीत

आए हैं ऋतुओं के राजा

-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -

मधुमय वासंती भोर भई, तज निद्रा-आलस अब जागें,

कर शारद का चंदन-वंदन, आओ माता से वर मांगें।

लगती प्यारी सुंदर बगिया, हैं सुमन खिले, पुलकित कलियां,

तितली-भौंरे आह्लादित हैं, पर सूनी अब तक क्यों गलियां।

तरुओं पर पक्षी गान करें, कोंपल सब आंखें खोल लखें,

चल रही पवन मनभावन है, आओ सखि, ऋतु का मान रखें।

अब ऐसा कुछ कर दिखलाएं, भय-बाधा संकट सब भागें।

कर शारद का चंदन-वंदन, आओ माता से वर मांगें।

आए हैं ऋतुओं के राजा, कर स्वागत हम नाचें-गाएं,

वासंती कर श्रृंगार सखी, हम आज प्रकृति को महकाएं।

खेतों में सरसों झूम उठी, इसके पीले हैं फूल खिले,

है चना-मटर का मन झंकृत, गेहूं को सुख भरपूर मिले।

गाती कोयल पंचम स्वर में, रसिकों को मीठे सुर लागें,

कर शारद का चंदन-वंदन, आओ माता से वर मांगें।

उड़-उड़ पतंग पीली-पीली, सब आसमान की सैर करें,

ऊंचे उठने को प्रेरित कर, तन-मन में सबके जोश भरें।

कोमल-कोमल है धूप खिली, सूरज की भृकुटी नहीं चढ़ी,

चहुं ओर खुशी का आलम है, प्रेमी युगलों की प्रीति बढ़ी।

है मन-मयूर करता नर्तन, कहता मायूसी अब त्यागें।

कर शारद का चंदन-वंदन, आओ माता से वर मांगें।

डॉ. अंजना सिंह सेंगर

Related to this topic: