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Rahul Gandhi DU Admission Claim Controversy

विद्यार्थियों के बीच जातिगत बीज बोने पर उतारू राहुल...

राहुल गांधी के दिल्ली विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव के आरोप पर विवाद बढ़ा। DU ने प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए आंकड़े जारी किए, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई।


विद्यार्थियों के बीच जातिगत बीज बोने पर उतारू राहुल

कांग्रेस नेता एवं सदन में विपक्ष की विवादित भूमिका का निर्वाह कर रहे राहुल गांधी ने देश-समाज को भ्रमित करने वाली राजनीति की राह को मजबूती से पकड़ लिया है... इसीलिए राहुल जब भी जिस तरह के दावे करते हैं.., आंकड़े प्रस्तुत करते हैं और भूचाल आने का दावा कर सरकार के सामने संकटपूर्ण स्थिति खड़ी करने का दंभ भरते हैं, उसी पूरे खेल में राहुल लगभग उलझते हुए चले जाते हैं... इससे कांग्रेस की भद तो पिटती ही है.. समाज में भी यह संदेश जाता है कि विपक्ष के नाते राहुल की भूमिका क्या लगातार संदिग्ध नहीं बन रही है..? 

राहुल गांधी ने गत शुक्रवार को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में दावा किया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में साक्षात्कार के जरिए विद्यार्थियों को बाहर किया जाता है... राहुल ने दावा किया था कि साक्षात्कार के दौरान विद्यार्थियों से उनकी जाति पूछी जाती है और फिर उन्हें असफल कर दिया जाता है... यह आरोप बहुत गंभीर है.. लेकिन क्या राहुल ने इसकी पुष्टी या पड़ताल की थी..? 

कम से कम कांग्रेस के सर्वेसर्वा होने के नाते ना सही, लेकिन विपक्ष के जिम्मेदार नेता के नाते तो उन्हें इस तरह के आरोप लगाने से पहले 10 बार क्या नहीं सोचना चाहिए..? लेकिन राहुल ऐसा ही करते हैं और बार-बार करते हैं.. जिससे उनके दावों की गंभीरता तो खत्म होती ही है... उस पूरे मामले में राहुल और कांग्रेस की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है.. क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय ने रविवार को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रवेश आंकड़े सार्वजनिक किए... यह प्रवेश साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा यानि सीयूईटी के माध्यम से हुए हैं... विश्वविद्यालय का कहना है कि उसकी प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और संविधान में तय प्रावधानों के अनुरूप सभी वर्गों को न्यायपूर्ण अवसर प्रदान किए जाते हैं... राहुल के जातिगत भेदभाव वाले आरोप की हवा उस समय पूर्णतः निकल गई.. जब विश्वविद्यालय में जारी आंकड़ों में परास्नातक पाठ्यक्रमों में कुल 10442 विद्यार्थियों का प्रवेश होना स्वीकार किया.. इनमें 4022 विद्यार्थी सामान्य वर्ग से है... जो लगभग 38.59 प्रतिशत है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 3115 विद्यार्थी हैं जो करीब 29.88 प्रतिशत है...

अनुसूचित जाति के 1488 विद्यार्थी यानि 14.27 प्रतिशत.. जबकि अनुसूचित जनजाति के 614 विद्यार्थी अर्थात 5.89 प्रतिशत हैं... आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 1203 विद्यार्थियों को भी प्रवेश मिला जो कि 11.54 प्रतिशत के लगभग है... अब ऐसे में राहुल ने किस आधार पर दावा किया कि विश्वविद्यालय में जाति के आधार पर विद्यार्थियों को प्रवेश देने से वंचित रखा जाता है और बाहर कर दिया जाता हैयुवाओं और विद्यार्थियों के बीच भ्रम फैलाकर ऐसे झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर तथ्यों से परे बात करने का खामियाजा समाज के साथ राष्ट्र भी उठाता है... लेकिन इस बात से राहुल गांधी संभवतः बेफिक्र रहे.. तभी तो वे अपने किए गए झूठे दावों पर कभी पश्चाताप भी नहीं करते... अब सवाल उठता है कि जब देश के विश्वविद्यालयों में छात्र शाति से पढ़ाई कर अपने भविष्य की संवारने में जुटे हैं... तब उनके बीच जातिगत बीज बोने की कोशिश आखिर किस उद्देश्य से की जा रही है..? 

संभव है कि ऐसी राजनीति से कांग्रेस को कुछ राजनीतिक लाभ मिल जाए... लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान समाज की समरसता को होता है... यहां यह सवाल भी उठता है कि खुद को मुहब्बत की दुकान चलाने वाला बताने वाले राहुल गांधी आखिर बार-बार नफरत, जातिगत द्वेष और विभाजन की भाषा क्यों बोलते नजर आते हैं? क्या राहुल का राजनीतिक विखंडन और तुष्टिकरण का एजेंडा आम जनता को समझ नहीं आ रहा है..? अगर राहुल ऐसा सोचकर ना समझ बन रहे है तो उनकी मर्जी...

 

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