Breaking News
  • अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से ओमान छोड़ने का आदेश
  • मिडिल ईस्ट तनाव के कारण अप्रैल में बहरीन और सऊदी F1 रेस नहीं होंगी
  • कोलकाता झड़प के बाद BJP ने शशि पांजा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई
  • एअर इंडिया एक्सप्रेस ने UAE के लिए सभी उड़ानें रद्द कीं
  • बुछार में ऑपरेशन DIGGI-2 जारी, उरी में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, एक आतंकी ढेर
  • मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के एक्टिव होने से आंधी और बारिश का असर
  • चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस: बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी में चुनाव का ऐलान

होम > विशेष

Pandharirao Kridutt: RSS Leader Biography

संघ कार्य के 100 वर्ष:संघ कार्य के लिए ठुकराई राज्यपाल की कुर्सी

छत्तीसगढ़ के धमतरी के पंढ़रीराव कृदत ने संघ कार्य के लिए जीवन समर्पित किया। उन्होंने राजनीति और राज्यपाल जैसे पदों को ठुकराकर सामाजिक सेवा और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


संघ कार्य के 100 वर्षसंघ कार्य के लिए ठुकराई राज्यपाल की कुर्सी

अरविंद कुमार मिश्रा

छत्तीसगढ़ के धमतरी के पंढ़रीराव कृदत छत्तीसगढ़ में संघ कार्य के ऐसे कल्पवृक्ष हैं, जिन्होंने संघ कार्य के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन की।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी ने विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पंढरीराव कृदत को औघड़ दानी कहा था। कलेक्टर के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया था कि पंढरीराव ने अपने स्वामित्व वाली काफी जमीन वंचितों को दान की। पढ़रीराव का जन्म पिता गुलाब राव कृदत्त एवं माता जानकी बाई के यहाँ वर्ष 14 मार्च 1922 को धमतरी में होली के दिन हुआ, पिता मालगुजार थे। वह मालगुजारी किया करते थे। वह जब बहुत कम उम्र के थे, उसी वक्त पिता जी गुजर गए थे। बताया जाता है कि उनके माता-पिता ने संतान न होने पर पंढरपुर की देवी से मान्यता मांगी थी जिस पर उनका नामकरण पंढ़रीराव हुआ। पंढरीराव जी का 1940 में श्रीमती गंगा बाई जी से विवाह हुआ, उनकी सामाजिक सक्रियता के पीछे उनकी धर्मपत्नी गंगा बाई जी की बड़ी भूमिका थी। वह धमतरी के ख्याति प्राप्त जाधव परिवार की बेटी थी, उल्लेखनीय है कि धमतरी में संघ की पहली शाखा जाधव परिवार के बाड़े में ही लगी थी।

1952 में वह निर्दलीय चुनाव लड़े। इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। वह हर चुनौती में अवसर खोज लेते थे। अगले पांच साल तक उन्होंने धमतरी, नगरी सिहावा और कुरुद तीनों जगह समान सक्रियता बनाई। इसका लाभ यह हुआ कि 1962 में तीनों विधानसभा क्षेत्र से जनसंघ के विधायक निर्वाचित हुए। उन्हें विधानसभा में उपनेता बनाया गया। 1965-66 में भोपाल में छात्रों का एक आंदोलन हुआ। उस समय शंकरदयाल शर्मा शिक्षा मंत्री थे। इस प्रदर्शन में छात्रों को काफी चोट आई। इस मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हुआ। मध्यभारत से हरिभाऊ जोशी विधायक थे, उन्हें मार्शलों ने धक्का देकर सदन से बाहर निकाल दिया। उस दिन तो विधानसभा स्थगित हो गई। कुंजीलाल दुबे तत्कालिन विधानसभा अध्यक्ष थे और वह मूल्यों की राजनीति के लिए जाने जाते थे। बताया जाता है कि इस प्रकरण के दौरान सदन की कार्यवाही के बीच ही उन्हें एक पर्ची मिली, जिसमें पंढ़ीराव एवं हरिभाऊ जोशी और कुरुद विधायक यशवंत मेघावाले को निलबित किये जाने की बात लिखी थी। उन पर तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्रा का दबाव था, लेकिन पं. कुंजीलाल दुबे अगले दिन विधानसभा ही नहीं आए। ऐसे में नर्मदा प्रसाद श्रीवास्तव विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में निलंबन आदेश पारित किया। दोनों ही सदस्य शेष बचे डेढ़ साल के कार्यकाल के लिए निलंबित कर दिए गए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद वह काफी व्यथित हुए।

पंढ़रीराव ने नागपुर संघ कार्यालय जाकर पूज्य गुरुजी से मिलने का निर्णय किया। गुरुजी पूजा कर रहे थे। सामान्यतः गुरुजी किसी से चरण स्पर्श करवाने से बचते हैं, लेकिन पंढ़रीराव ने उनके पैर छुए, उन्होंने आशीर्वाद दिया और गले लगा लिया। पंढ़रीराव जी बताया करते थे मुझे ऐसी प्रेरक शक्ति की अनुभूति हुई जिसकी मैं व्याख्या नहीं कर सकता था। गुरुजी ने पंढ़रीराव को कहा राजनीति का क्षेत्र तुम्हारे लिए नहीं है। तुम संघ कार्य करो। बस उनका यह वाक्य पंढरीराव के लिए जीवन का अधिष्ठान बन गया। पंढरीराव विभाग सह संघचालक, विभाग संघचालक और फिर प्रांत संघचालक के दायित्व में आए। दो बार उन्होंने प्रांत प्रचारक श्री गोपाल व्यास के समक्ष दायित्व छोड़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन वह चुप रहे।एक बार वह धमतरी प्रवास पर आए तो उन्होंने कहा पंढ़रीराव आपको दायित्व पूजनीय गुरुजी ने दिया है। ऐसे में यह मेरा विषय नहीं है। उसके बाद पंढ़ीराव जी ने कभी इस विषय पर चर्चा नहीं की।

1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बन गई थी, उसके बाद विधानसभा का चुनाव हुआ। राजमाता विजयराजे सिंधिया धमतरी आई थी, यहां उन्होंने पंढ़रीराव के घर पर भोजन किया और पुनः चुनावी राजनीति में सक्रिय होने के लिए समझाती रहीं। लेकिन पंढ़रीराव जी ने कहा कि मैंने गुरुजी को वचन दिया है कि अब राजनीति में नहीं रहूंगा बल्कि संघ कार्य करूंगा। इसी तरह जब अटल जी प्रधानमंत्री थे, उस समय पंढ़रीराव से राज्यपाल बनने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार्य नहीं किया। इसके बाद सुंदरलाल भंडारी को उत्तरप्रदेश के राज्यपाल दायित्व प्रदान किया गया। जनवरी 2009 में घर में चक्कर आ जाने की वजह से वह गिर गए। ऑपरेशन के अनुकूल स्थितियां नहीं थी, फिर भी उनका मनोबल बहुत ऊंचा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एवं डॉ पूर्णेन्दू सक्सेना जी ने चिकित्सकों के साथ गहन विमर्श के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि उनकी जीवटता को देखते हुए ऑपरेशन किया जाना चाहिए। ऑपरेशन के बाद उन्होंने लोगों से बात भी की, सभी की कुशलक्षेम लेते रहे लेकिन कुछ समय बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और 20 जनवरी को देह रूप में उनका स्वर्गारोहण हो गया।

आदर्श शिक्षण समिति की स्थापना

श्रद्धेय पंढ़रीराव ने धमतरी में आदर्श शिक्षण समिति की स्थापना की। इस समिति के द्वारा तीन विद्यालय संचालित किए जाते हैं दो हिन्दी माध्यम एवं एक अंग्रेजी माध्यम के। स्कूल के लिए जमीन भी दान दी। समिति द्वारा एक कॉलेज भी संचालित किया जाता था जिसका बाद में शासकीयकरण हो गया। उन्होंने कुष्ठ आश्रम के लिए 2.5 एकड़ जमीन दान भी दी।