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Nari Vandan Bill: Women Reservation Vision India

नारी वंदन विधेयक: नए भारत का सशक्त विजन

सुषमा यदुवंशी


नारी वंदन विधेयक नए भारत का सशक्त विजन

भारत एक ऐसा देश है जहां नारी को शक्ति, करुणा और सृजन की प्रतीक माना गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता” की भावना हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाती है। फिर भी लंबे समय तक महिलाओं को राजनीति और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। ऐसे में नारी वंदन विधेयक नए भारत के उस विजन का प्रतीक बनकर सामने आता है, जिसमें समानता, सम्मान और सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है।

नारी शक्ति वंदन: सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान और भागीदारी

महिला आरक्षण केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि यह समाज की बुनियादी सोच को बदलने का ऐतिहासिक अवसर है। सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इसका उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर उन्हें नीति-निर्माण का सक्रिय हिस्सा बनाना है। जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में शामिल होंगी, तो समाज के हर वर्ग से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझा और सुलझाया जा सकेगा।

क्यों जरूरी है यह विधेयक?

भारत की आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी लंबे समय तक सीमित रही है। यही कारण है कि महिलाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे जैसे सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य उचित प्राथमिकता नहीं पा सके। यह विधेयक इस असंतुलन को दूर करता है और महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि अधिकार और आत्मसम्मान की स्थापना है।

सरकार की पहल और बदलती तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई गई हैं

• बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान से सोच में बदलाव आया।
• प्रधानमंत्री आवास योजना से महिलाओं को घर का अधिकार मिला।
• सुकन्या समृद्धि योजना से बेटियों का भविष्य सुरक्षित हुआ।
• उज्ज्वला योजना से महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार हुआ।
• मातृ वंदना योजना से गर्भवती महिलाओं को सहयोग मिला।

इन पहलों ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया। ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर भी ऐतिहासिक निर्णय लेकर महिलाओं को न्याय दिलाने का प्रयास किया गया।

समाज और परिवार पर प्रभाव

जब महिला सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज और परिवार पर पड़ता है। एक शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला अपने परिवार को बेहतर दिशा देती है। वह बच्चों को अच्छे संस्कार देती है और समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करती है। सशक्त महिलाएं सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह और भेदभाव को खत्म करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका

किसी भी राष्ट्र का विकास तभी संभव है, जब उसकी आधी आबादी सक्रिय रूप से उसमें भागीदारी करे। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से नीतियां अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनेंगी। यह विधेयक सुनिश्चित करता है कि आने वाले समय में महिलाएं केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली शक्ति बनें। इससे भारत एक मजबूत, समावेशी और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ेगा।

सभी दलों और समाज को समर्थन क्यों देना चाहिए?

नारी वंदन विधेयक किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास से जुड़ा हुआ है। यह समय है जब सभी दलों को राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करना चाहिए। विपक्षी दलों का समर्थन इस विधेयक को और मजबूत बनाएगा और यह संदेश देगा कि देश महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए एकजुट है।

नारी वंदन विधेयक केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी विचार है। यह नए भारत के उस सपने को साकार करता है, जहां महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त हो। जब नारी सशक्त होगी, तभी समाज सशक्त होगा, और जब समाज सशक्त होगा, तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा। नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और यही नए भारत का सच्चा विजन है।

लेखिका- सुषमा यदुवंशी (शिक्षाविद, मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार, स्तंभकार)
 

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