महिला आरक्षण विधेयक 2023 यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा तेज। जानिए इसके प्रमुख प्रावधान, लागू होने की प्रक्रिया और राजनीतिक बहस के मुख्य बिंदु।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक के बाद एक संशोधन विधेयक पारित कर अपने संकल्प पूर्ण करती जा रही है। वर्ष 2014 के बाद से ही देश में बहुत कुछ बदल गया है, जो काग्रेस शासन के रहते कतई संभव नहीं था। क्योंकि कांग्रेस सरकारों ने जनहित के मुद्दों से हटकर अपना अलग एजेंडा चलाया जिसके परिणामस्वरूप वह सत्ता से बाहर हो गई। एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमने का खामियाजा भी कांग्रेस आज तक उठा रही है। पिछले दो लोकसभा चुनावों के साथ ही कई राज्यों में हुए चुनाव में वह सत्ता से बाहर हो गई है।
आज के हालात की बात करें तो उसकी नीतियों को देखते हुए वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों में भी नहीं लगता कि वह सत्ता में आ पाएगी। अब बात करते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण विधेयक 2023 की। जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के रूप में जाना जाता है। इसे सितंबर 2023 में पारित किया गया। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक तिहाई) सीटें आरक्षित करता है। यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा।
विधेयक के मुख्य बिंदुओं में अधिसूचित जाति जनजाति की महिलाओं के लिए भी उप-आरक्षण होगा। यह आरक्षण अगली जनगणना जो वर्ष 2027 के आसपास संभावित है और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद लागू होगा। यह कानून 15 वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है। हर परिसीमन प्रक्रिया के बाद आरक्षित सीटों की अदला-बदली की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक भागीदारी में महिलाओं को सशक्त करना है। वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या काफी कम लगभग 15.2 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 33 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
भारतीय राजनीति के इतिहास में यह ऐतिहासिक कदम होगा क्योंकि लगभग तीन दशकों के इंतजार के बाद यह कानून पारित हुआ है, जो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को सशक्त करेगा। हालाकि कुछ दलों ने इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण न होने पर चिंता जताई है। इसके लागू होने में देरी को लेकर आलोचकों का तर्क है कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए था। क्योंकि जनगणना /परिसीमन से जोड़ने से यह 2027-2029 तक टल जाएगा। 19 सितंबर 2023 को नए संसद भवन में लोकसभा में संसद के विशेष सत्र के दौरान इस विधेयक को 128वें संवैधानिक संशोधन विधेयक 2023 के रूप में पेश किया था।
अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास करने के लिए संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है। ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू किया जा सके। विशेष सत्र में मोदी सरकार विपक्षी सहयोग के साथ इसे पारित कराने पर जोर दे रही है। वहीं विपक्ष खासकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि अगर सरकार 2029 से पहले इसे लागू करना चाहती है, तो इसे पहले पास क्यों नहीं किया गया। भाजपा ने अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर सत्र के दौरान उपस्थिति अनिवार्य कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यह विधेयक नारी शक्ति के सम्मान और उन्हें नीति-निर्माण में भागीदार बनाने के संकल्प के रूप में पेश किया गया है। उन्होंने इस विधेयक को 21वीं सदी का एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है। मोदी ने इसे नारी शक्ति को समर्पित और महिला सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक मोड़ करार दिया है। श्री मोदी ने बताया कि यह कानून न केवल महिलाओं का सम्मान है, बल्कि यह निर्णय देश के विकास में उनकी भागीदारी को और मजबूत बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी संकल्प शक्ति को आगे बढ़ाया है, ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि विपक्षी दल इसे किस तरह लेते हैं क्योंकि वह इसका सीधे विरोध तो नहीं कर रहे लेकिन इससे भाजपा सरकार के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ने से भयभीत भी है.