मध्यप्रदेश बजट 2026-27 में कृषि, उद्योग, महिला-युवा कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, राज्य के विकास का लंबा रोडमैप पेश
डॉ. सत्येन्द्र किशोर मिश्र
पिछले वर्ष की तुलना में ग्यारह फीसदी बड़ा, वर्तमान सरकार का तीसरा बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र की ठोस बुनियाद तथा बढ़ते वित्तीय बोझ के साथ समष्टि आर्थिक संतुलन साधते हुए तीव्र औद्योगिक विकास की चुनौतियों के मध्य विकसित मध्यप्रदेश का मंसूबा रखता है। किसान कल्याण वर्ष में गरीब, युवा, नारी, किसान, आधारभूतढांचा तथा औद्योगिक निवेश (ग्यानी) पर केन्द्रित मध्यप्रदेश का समावेशी तथा सर्वस्पर्शी रोलिंग बजट 2026-27 आगामी तीन वर्षों में राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास की दूरदृष्टि रखता है। भारतवर्ष में क्षेत्रफल में दूसरा, आबादी में पांचवां, युवा आबादी में तीसरा सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद देश की जीडीपी में मध्यप्रदेश का हिस्सा लगभग 3.6 फीसदी, जबकि कर्ज में हिस्सा लगभग 4.9 फीसदी है। वर्ष 2011-12 से भारतवर्ष की 5.6 फीसदी की अपेक्षा मध्यप्रदेश की में जीएसडीपी में 6.8 फीसदी बढ़ोत्तरी के बावजूद प्रतिव्यक्ति आय के आधार पर मध्यप्रदेश में प्रतिव्यक्ति आय रु.1,69,050 है, जो देशभर की प्रतिव्यक्ति का लगभग तीन चौथाई है। मध्यप्रदेश औद्योगिक तथा व्यावसायिक निवशों को बढ़ावा देकर राज्य की सामाजिक तथा आर्थिक दशा में बदलाव हेतु बजट से ढेरों उम्मीदों है।
संबंधित क्षेत्र के उत्पादन में भारतवर्ष में मध्यप्रदेश का हिस्सा 3.6 फीसदी से बढ़ाकर लगभग पांच फीसदी पंहुच गया है। भारत में मध्यप्रदेश आज उत्पादन के मामले में दलहन में प्रथम,तृतीय स्थान रखने का साथ अन्य कृषि उत्पादन में एक महत्वपूर्ण राज्य बन चुका है। सोयाबीन का लगभग 35. फीसदी उत्पादन अकेले मध्यप्रदेश में होता है। देश में सर्वाधिक खाद्यान्न भण्डारण क्षमता के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि तथा संबंधित क्षेत्र लगभग 43 फीसदी है। बजट, कृषि क्षेत्र में डिजिटल, ई-सेवा सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोग को बढ़ावा देते हुए संबंधित क्षेत्रों उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, जैविक एवं प्राकृक्तिक खेती के लिए विशेष प्रयास के जरिए किसान कल्याण पर केन्द्रित है। कृषि तथा संबंधित क्षेत्र में तीव्र विकास तथा ढेरों उपलब्धियों के बावजूद मध्यप्रदेश देश के अग्रणी आर्थिक राज्यों में नहीं है। बजट में गरीब कल्याण कार्यक्रमों के अन्तर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा तथा अल्पसंख्यक वर्ग, विमुक्त तथा अर्द्ध-विमुक्त घुमक्कड़ सहित दिव्यांगजन तथा वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक आर्थिक सुरक्षा, आय एवं रोजगार सूजन, शिक्षा एवं कौशल विकास हेतु अनेक योजनाओं तथा कार्यक्रमों में व्यय हेतु बजट में प्रावधान है। युवा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयीन शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक गुणवत्तापूर्ण रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं कौशल विकास हेतु बढ़े आवंटन का प्रावधान बजट में है। नारी कल्याण हेतु महिलाओं के पोषण, सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, सशक्तिकरण हेतु बजट में कुल रु.1,27,555 करोड़ आवंटन का प्रस्ताव है।
कृषि क्षेत्र की अपनी सीमाएं हैं, आर्थिक क्षेत्र में क्रान्तिकारी तथा बुनियादी बदलाव हेतु मजबूत तथा सक्षम आधारभूत संरचना के साथ उद्योग की जरूरत है। वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को दो ट्रिलियन डॉलर अर्थात 250 लाख करोड़ की अर्थव्यस्था के साथ प्रतिव्यक्ति आय रुपए बाइस लाख पैतीस हजार तक पहुंचाने की दृष्टि बजट में है। उत्तम तथा सक्षम आधारभूत संरचना के निर्माण हेतु 40 वृहद, 60 मध्यम तथा 273 लघु सिंचाई निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूर्ण कर नई का प्रावधान रखा गया है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था हेतु नल कनेक्शन तथा हैण्डपंपों में आवंटन बढ़ाया गया है। आधारभूत संरचना में सुधार हेतु साथ ही सड़क निर्माण, मरम्मत तथा उन्नयन, ग्रामीण सड़क निर्माण, पुलों का निर्माण पर भी आवंटन बढ़ाते हुए आर्थिक विकास को गति देने का संकल्प है। ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति हेतु बिजली संयंत्रों की स्थापना तथा क्षमता में वृद्धि के साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा तथा सौर ऊर्जा के उत्पादन तथा उपयोग पर जोर है। 2025 उद्योग तथा रोजगार वर्ष था, जिस दौरान उद्योग कान्क्लेबों तथा सम्मेलनों के आयोजन से तैंतीस लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें लगभग साढ़े आठ लाख करोड़ रुपए के औद्योगिक विकास प्रस्तावों पर कार्य आरंभ भी हो चुके हैं। औद्योगीकरण को बढ़ावा देने हेतु अड़तालीस औद्योगिक पार्को तथा विभिन्न औद्योगिक कॉरिडोरों का निर्माण प्रस्तावित है। निवेश तथा औद्योगीकरण कार्यों हेतु रु.5,957 करोड़ का प्रावधान है। संभवतः ग्यानी केन्द्रित बजट इस मकसद को पूरा कर सकेगा।
बजट में स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारभूत संरचना के अंतर्गत 48000 मेडिकल विस्तरों की व्यवस्था को बढ़ाने के साथ-साथ नए मेडिकल कॉलेजों, आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्थापना तथा उनमें प्रवेश सीटों में वृद्धि का भी प्रस्ताव है। बजट में नगरीय विकास को गति प्रदान करने का प्रयत्न तो है ही, आगामी सिंहस्थ आयोजन हेतु रु.13,851 करोड़ के बजट प्रावधान के अंतर्गत तैयारियां प्रारंभ हो चुकी है। इस बजट में ग्रामीण विकास के न्यूनतम सौ दिन के रोजगार को बढ़ाकर 125 दिनों के रोजगार की व्यवस्था, ग्रामीण आवास, स्वच्छ भारत मिशन तथा पंचायतीराज को मजबूत बनाने का सराहनीय प्रयास भी है। बजट में प्राकृक्तिक स्थलों, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा ऐतिहासिक विरासतों को सहेजते हुए आर्थिक समृद्धि के नए शीर्ष को छूने के लिए पर्यटन स्थलों पर सार्वजनिक सुविधाओं तथा आधारभूत संरचनाओं के विकास के अनेक प्रयास किए जाने प्रस्तावित है। बजट में कानून व्यवस्था, प्रशासन, शासकीय कार्यप्रणाली, भू-प्रबन्धन सहित शासन प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा कुशल बनाने हेतु अनेक नवाचारों तथा सुधारों के प्रयास की चिंता है। बजट में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) रु.18,48,274 करोड़ रहने का अनुमान है जो पिछले बजट से 10.69 फीसदी अधिक है तथा पूंजीगत परिव्यय जीएसडीपी का 4.8 फीसदी है। यह सरकार की आर्थिक विकास रणनीति में बदलाव के जरिए औद्योगीकरण की तत्परता दिखाती है। मध्यप्रदेश सरकार को कर्ज के बढ़ते बोझ का भी सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2026-27 के अंत तक कर्ज बोझ बढ़कर जीएसडीपी का 32 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जो अभी वित्तीय अनुशासन की सीमा के अन्दर तथा अनेक राज्यों की अपेक्षा कम अवश्य है, परन्तु इसे नियंत्रण में रखना जरूरी है। पूंजीगत परिव्यय ही बुनियादी परिसंपत्तियों के निर्माण की प्राथमिकता को दर्शाता है। साथ ही राजस्व व्यय में लगातार बढ़ोत्तरी पर नियंत्रण जरूरी है, यह बजट के सम्मुख महत्वपूर्ण चुनौती थी।