मध्यप्रदेश की राजनीति पर नजर। मोहन यादव ने सियासी चक्रव्यूह तोड़ा, कांग्रेस भीतरू खींचतान में उलझी, राहुल गांधी के भाषण पर सवाल
अनुराग उपाध्याय
अब मोहन ने तोड़ा चक्रव्यूह
राजनीति को समझें तो ऐसा लगता कुछ लोग मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में घेरना चाहते हैं। लेकिन अब तक मोहन इस सियासी चक्रव्यूह को तोड़ने में कामयाब रहे हैं। सुशासन की देवी अहिल्याबाई के नगर इंदौर के भागीरथपुरा से रेसीडेंसी कोठी तक जो हंगामा सड़क से सदन तक मचा उसमें भी मुख्यमंत्री को टार्गेट किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री ने हर जगह सदाशयता का परिचय दिया, कहीं माफी मांगी तो कहीं माकूल जवाब दिया और चक्रव्यूह को तोड़ दिया।
राहुल के भाषण के बाद क्या होता है
राहुल गांधी भोपाल आ रहे हैं। इससे कांग्रेस नेता उत्साहित हैं लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता बड़े निराश और असमंजस में हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता कहते हैं राहुल जी हमारे बड़े नेता हैं किंतु उनके भाषण और बातें जनता की समझ से दूर हैं। उनके भाषण के बाद जनता कांग्रेस को कोसती और कांग्रेसियों को खोजती है। कांग्रेस कार्यकर्ता खुद ही कहते हैं हमारी पार्टी राहुल जी के नहीं भगवान भरोसे है।
कांग्रेस में पटे न पटे का खेल
कांग्रेस इस समय सबसे बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से नहीं पट रही है और उमंग सिंघार की उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे से नहीं पट रही है। इन सब की दिग्विजय सिंह से नहीं पटती और दिग्विजय सिंह की कमलनाथ से नहीं पटती। ऐसे में कांग्रेस की जनता से नहीं पटती और कांग्रेस कहती है वो अगली बार सरकार बनाएगी ।
चीता भी जीता है
एक पेय पदार्थ की चर्चित पंक्ति है चीता भी पीता है। लेकिन मध्यप्रदेश में यह पंक्ति बदल गई है। जंगलात महकमे की बड़ी बैठक चल रही थी। चर्चा कूनो के चीतों पर हो रही थी। उसी दिन एक मादा चीता ने बच्चों को जन्म दिया था। खुशी के माहौल में कूनो के स्टाफ को बधाई दी गई। चीतों के जीवन पर चर्चा के बीच सबसे अच्छी बात यह हुई कि यह मध्यप्रदेश है यहां चीता भी जीत है।