भोपाल में स्वदेश कार्यालय में आयोजित कवि सम्मेलन में तीन पीढ़ियों के कवियों ने हास्य-व्यंग्य, राष्ट्रभावना और फागुन की उमंग से भरपूर काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में कई गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
तीन पीढ़ियों के कवि धूमकेतु, यश धुरंधर और बालकवि यशांश दुबे ने सुनाईं कविताएं
तीन पीढ़ियों के कवियों ने स्वदेश के कवि सम्मेलन में शब्दों के रंग कुछ इस तरह बिखरे कि श्रोता देर तक सराबोर होते रहे। मंच पर दो पिता और दो पुत्रों ने अपने काव्यपाठ से ओताओं को कविताओं से खूब हंसाया। कवियों ने जहां हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समकालीन राजनीति पर तीखे लेकिन मनोरंजक तंज कसे, वहीं होली की मस्ती, प्रेम और उमंग के रंग भी भरपूर बिखेरे। कविता की इन फुहारों के बीच राष्ट्रभावना का स्वर भी मुखर हुआ और कवियों ने अपने गीतों-गजलों के जरिए सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश देकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। वरिष्ठ कवि श्री धूमकेतु उनके पुत्र यश धुरंधर और उनके पौत्र यशांश दुबे ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर राजधानी के प्रसिद्ध कवि धूमकेतु ने अनेक कविताएं पढ़ीं विशेष रूप से कवियों की सरकार का घोषणा पत्र।
स्वदेश का प्रयास सराहनीय: चौकसे
इस मौके पर एलएनसीटी के कुलपति डॉ. अनुपम चौकसे ने काव्यधारा आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वदेश का यह आयोजन सराहनीय है। ऐसी पहल समय-समय पर करते रहना चाहिए.
धूमकेतु जी ने करारे व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा-
संविधान में संशोधन कर सारे नेताओं को जेल में बंद रखेंगे ।
उन पर नई-नई कविताओं का प्रयोग करेंगे
वे कितना भी रोयें गिड़गिड़ाये विश्व अदालतों में गुहार लगाते
भले ही कहें कि हमारी जान ले लो मगर
हमें कविता मत सुनाओ मगर हम उनकी जान नहीं लेगे
बरन सुबह शाम उठने बैठे चाय नाश्ते में उन्हें नवजात कविताएं देंगे।
बे भी हमको आजकल देती है चैलेंज मोबाइल में जिनके नहीं बचा बैलेंस ?
छोटा बाबा बता रहा बड़ा बाबा चोर फिल्म बड़ी मशहूर थी
चोर मचाए शोर उन्होंने एक जगह यह भी कहा
जीरो को जीरो में जोड़ो, घटाओ, गुणा करो,
भाग दो रिजल्ट जीरो ही रहेगा फिल्म कितनी भी बड़ी बनाओ
झांकी कितनी भी बड़ी सजाओ हीरोइन भी टाप
मगर मेरे बाप अगर हीरो ढीला है उसे कुछ भी खिलाओ वो ढीला ही रहेगा।
धूमकेतु ने धारा प्रवाह हास्य, व्यंग्य, राजनीति पर एक से बढ़कर एक कविताएं प्रस्तुत की जिससे वातावरण हास्यमय चन गया।
यश धुरंधर ने कवितापाठ करते हुए कहा-
कर सकते हो करो सफाई पहले घर से यारो
वोटो के सौदागर को गर मार सको तो मारो
जहरीले जो हवा चलाएं उनको मत पुचकारो
जो जो हमको बांटना चाहते उनको भी संहारों
हम धीर हैं हम वीर हैं हम बहुत गहन गंभीर हैं हम मीर हैं हम पीर है
हम सांस्कृतिक प्राचीर हैं पर पीड़ा के बाहक कमी कुटिल कुर्मी में के विरुध भृकुटी हमारी सदा तनी
स्वदेश के संपादक चंद्रवेश पांडेय ने फागुन और राजनीति पर कविताएं सुनाते हुए कहा कि-
फागुन की बयार में महके धरा आकाश।
मन के सूखे पात पर उतरे रंग उल्लास ।
फागुन के उत्सव में मिटे भेद अभिमान।
एक रंग में रंग गया सारा हिन्दुतान।
कार्यक्रम के प्रारंभ में यशांश दुबे ने मां सरस्वती की वंदना करते हुए पढ़ा-
विनती यही है हंसवाहिनी कलुष भाव सब भाग हिंदी हिंदू हिंदुस्तान का, स्वाभिमान भी जागे बुरे विचारों का मिलजुल कर करते रहे हवन कंठ विराजो मां तु शारदे वारंवार नमन ज्ञान दायिनी वीणा वादिनी शत-शत अभिनंदन कंठ विराजो मातु शारदे बारंबार नमन।

गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम के शुभारंभ में स्वदेश के समूह संपादक अतुल तारे ने कवि धूमकेतु, सलाहकार संपादक गिरीश उपाध्याय ने स्वदेश के संचालक ओ.एन. शर्मा का भोपाल के संपादक राजदेव पांडेय ने कवि यश धुरंधर संपादक चंद्रवेश पांडेय ने बाल कवि यशांश दुबे, स्वदेश के प्रबंध संपादक सौमित्र जोशी ने एलएनसीटी के कुलपति डॉ. अनुपम चौकसे का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन स्वदेश के राज्य संपादक अनुराग उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में विधायक भगवानदास सबनानी, वैद्य गोपालदास मेहता, लघु उद्योग भारती के जितेन्द्र गुप्ता, भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी, दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया, उपायुक्त जीएसटी रक्षा दुबे, विश्वमांगल्य सभा की क्षेत्रीय संगठन मंत्री पूजा पाठक, स्वयंसिद्धा समूह की अध्यक्ष महिमा तारे, समाजसेवी अनुराधा कृष्णपाल यादव, अपर संचालक जनसंपर्क संजय जैन, उप संचालक राजेश दाहिमा, पत्रकार अश्विनी मिश्रा, अनुराग अमिताभ, कौशलकिशोर चतुर्वेदी, राजेश गाबा, ऋषिकांत सक्सेना, सत्यम शर्मा, सुनील गगराड़े, कवि उमेश गर्ग, संतोष भाकरे, गुरमीत सिंह सलूजा, श्रीराम माहेश्वरी, यशवंत कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।