ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बीच परमाणु टकराव की आशंका बढ़ी, तीसरे विश्व युद्ध का खतरा, भारत ने शांति और कूटनीति पर जोर दिया
ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध में जमीन पर जो हालात बन रहे हैं, उनके संकेत अच्छे नहीं माने जा रहे। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बाद हालात और भी बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कई गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को पूरी तरह खत्म करने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में दुनिया विनाश के मुहाने पर जाती दिख रही है। क्योंकि इस युद्ध में यदि परमाणु बम का इस्तेमाल होता है, तो एक बार फिर हिरोशिमा और नागासाकी जैसा विध्वंस दिखाई देगा, जिसमें सिर्फ और सिर्फ मानवता शर्मसार होगी।
अभी तक भारत को छोड़कर किसी भी देश ने शांति की अपील नहीं की है। हालांकि अमेरिका के सीधे युद्ध में उतरने पर रूस और चीन सहित कुछ अन्य देशों ने चिंता व्यक्त की है। माना जा रहा है कि दुनिया के देशों पर दादागिरी के लिए जाने जाने वाले ट्रंप जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, उससे दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ती जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो चारों ओर विनाश के चिन्ह दिखाई देंगे।ट्रंप इस युद्ध में पड़ोसी देशों को भी धमकी देने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन को धमकी दे डाली है कि उसने अपनी धरती का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी। वहीं पाकिस्तान भी अपनी धरती से हवाई हमले करा रहा है, जो भविष्य के लिए उसकी चिंता का कारण बनेगा। दरअसल अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के नेता खामेनेई के मारे जाने से युद्ध व्यापक रूप ले चुका है। इससे युद्धरत देशों ने हमले और तेज कर दिए हैं।
वहीं जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि वे अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। इससे युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है। इसमें सबसे बड़ा डर यह है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार का रास्ता चुना, या रूस और चीन जैसी दुनिया की बड़ी ताकतें खुलकर उसके साथ खड़ी हो गईं, तो क्या यह संघर्ष विश्व युद्ध का रूप ले सकता है? इस सवाल को गहराई से समझने की जरूरत है।इस युद्ध से पश्चिम एशिया इस समय पूरी तरह अस्थिर हो गया है। हिज़्बुल्लाह का खुलकर मैदान में उतरना एक बड़ा संकेत है। यह संगठन सिर्फ सीमित सीमा झड़प तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पास लंबी दूरी की मिसाइलें और व्यापक सैन्य ढांचा है। अगर वह पूरी ताकत से सक्रिय हुआ, तो इजरायल को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ सकता है।
यहां एक खतरनाक सवाल यह भी है कि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन पश्चिमी देशों को लंबे समय से आशंका रही है कि वह हथियार बनाने की क्षमता के करीब पहुंच चुका है। अगर हालात बेहद बिगड़ते हैं और ईरान को लगता है कि उसकी सुरक्षा या शासन खतरे में है, तो वह दो रास्ते चुन सकता है पहला, परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाना और दूसरा, डिटरेंस यानी डर पैदा करने के लिए परमाणु क्षमता का खुला प्रदर्शन करना।अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिका और इजरायल की प्रतिक्रिया बेहद कड़ी हो सकती है। इजरायल ने पहले भी संकेत दिए हैं कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। यही कारण है कि इस समय बड़े पैमाने पर हवाई हमले, गुप्त ऑपरेशन और साइबर हमले किए जाने लगे हैं।
इस युद्ध के बीच भारत की ओर से सीधे तौर पर किसी देश का समर्थन नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात हमारे लिए गंभीर चिंता की बात हैं। भारत सभी झगड़ों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने का समर्थन करता है। युद्ध क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा के लिए हम मिलकर काम करते रहेंगे।मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से मौजूदा हालात पर फोन पर बात की और दुश्मनी को जल्द खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया।