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अमरावती, नाशिक और सूरत केस

अमरावती, नाशिक और सूरत: चेहरे नए, मगर कहानी वही

सोनाली मिश्रा


अमरावती नाशिक और सूरत चेहरे नए मगर कहानी वही 

इन दिनों भारत में लव जिहाद के नए-नए रूप सामने आ रहे है, जहां नाशिक में टीसीएस में यह चौंकाने वाला मामला सामने आया कि किस प्रकार तकनीकी क्षेत्र में भी यह सोच मौजूद है कि काफिर लड़कियों को उनके धर्म से आजाद किया जाए। कैसे यह सोच बलवती है कि केवल उनका मजहब ही रहे और कोई न रहे और उसके बाद यह भी सोच कि कुछ हुआ ही नहीं है!

यह हैरान करने वाला, स्तब्ध करने वाला और हर किसी को आतंकित करने वाला समय है कि जब शांतिकाल है, परंतु हिंदुओं के धार्मिक अस्तित्व पर निरंतर हमले हो रहे हैं, निरंतर ही वह युद्ध है और सबसे मजे की बात कि उसे एहसास नहीं कराया जा रहा कि वह युद्ध में है? 
उसके अस्तित्व पर लगातार हमले हो रहे हैं। उनकी बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है और सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह कि उनके अस्तित्व पर हो रहे इतने हमलों को हमला भी नहीं माना जा रहा है। नाशिक और अमरावती में जो हुआ है, वह न ही नया है और न ही कोई अजूबा है। यह हमले लगातार न केवल हो रहे हैं, बल्कि बढ़ रहे हैं। ये सुनियोजित हैं, संगठित हैं और स्पष्ट हैं। 

अमरावती में जो हुआ है, वह और भी डराने वाला है, क्योंकि उसमें कम उम्र की लड़कियां शिकार बनी हैं। जो लड़का गिरफ्तार हुआ है, उसकी उम्र महज 19 वर्ष है और यह मानसिकता कि इतनी कम उम्र में ही गैर-मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाया जाए, उन्हें यौनिक रूप से शोषित किया जाए, उनका उत्पीड़न किया जाए और उन्हें बदनाम किया जाए और उनका धर्म परिवर्तन कराया जाए। यह दुर्भाग्य ही है कि इतनी कम आयु में इतनी जहरीली मानसिकता पर लोग बात ही नहीं कर रहे हैं। 

कोई भी यह बात नहीं कर रहा है कि इतनी कम आयु में इतनी जहरीली मानसिकता कैसे हो सकती है? कैसे दूसरे पंथ की लड़कियों के धार्मिक अस्तित्व से घृणा इस सीमा तक होगी कि उनके धार्मिक अस्तित्व को नष्ट ही कर दिया जाए? और इस धार्मिक अस्तित्व पर हो रहे इस षड्यन्त्र को सहज बना दिया जा रहा है, यह और भी घातक है। 

नाशिक में ऐसी लड़कियों को निशाना बनाया गया जिहादी तत्वों ने, जो अपने सपने पूरे करने के लिए शिक्षा प्राप्त करके ऐसी कंपनी में कार्य कर रही थीं, जहां पर कार्य करने का सपना लगभग हर व्यक्ति का होता है, जो हर तकनीकी दक्ष व्यक्ति का सपना होता है। जरा कल्पना करें कि कोई लड़की अपनी तकनीकी शिक्षा प्राप्त करती है और वह अपने सपने पूरा करना चाहती है। 

मगर इन सपनों पर किसी की नजर है। और यह नजर बहुत भयानक है। यह नजर ऐसी है जो उनके कैरियर को ही खत्म नहीं कर रही है, बल्कि उनके अस्तित्व को ही समाप्त कर रही है और मीडिया में इस पहलू पर बहस नहीं है। मीडिया में इस बात पर बहस नहीं हो रही है कि कैसे एक धार्मिक पहचान का अस्तित्व ही समाप्त षड्यन्त्र पूर्वक समाप्त किया जा रहा है। 

नाशिक में टीसीएस में शिक्षित महिलाएं हों, या फिर अमरावती में ट्यूशन जाने वाली बच्चियाँ या फिर सूरत में एक जिम ट्रेनर के हाथों यौन शोषण का शिकार बनी एक विवाहिता! कहानी सभी की एक है, अंत सभी का एक है, हाँ चेहरे अलग हो सकते हैं, नाम अलग हो सकते हैं, परंतु न ही मोडस ओपेरंडी भिन्न है और न ही कहानी!



लेखिका- सोनाली मिश्रा 

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