दुनिया में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस, चीन, ईरान और अमेरिका साइबर शक्ति बढ़ा रहे हैं। संभावित साइबर हमलों के खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने ऊर्जा और वित्तीय तंत्र को सतर्क किया है।
ईरान से संभावित साइबर हमलों का खतरा, अमेरिका ने ऊर्जा-वित्तीय तंत्र को किया सतर्क
आधुनिक समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब केवल टैंक, मिसाइल और युद्धक विमान ही किसी देश की शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट और कंप्यूटर नेटवर्क पर नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अमेरिका, रूस, चीन और ईरान साइबर युद्ध की क्षमता को तेजी से मजबूत कर रही हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण साइबर मोर्चे पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने देश की सरकारी संस्थाओं, निजी कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संभावित ईरानी साइबर हमलों को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। अमेरिकी आंतरिक सुरक्षा विभाग द्वारा जारी सुरक्षा सूचना में कहा गया है कि मौजूदा युद्ध की स्थिति के कारण सुरक्षा खतरे का वातावरण और अधिक संवेदनशील हो गया है।
विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादन, बिजली वितरण और वित्तीय संस्थानों को अपने डिजिटल तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद बदले की आशंका भी बढ़ गई है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ईरान समर्थित समूह साइबर माध्यम से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
अमेरिका की मजबूत साइबर शक्ति
दुनिया में साइबर क्षमता के मामले में अमेरिका को सबसे आगे माना जाता है। अमेरिकी एजेंसियां जैसे नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी और यूनाइटेड स्टेट्स साइबर कमांड अत्याधुनिक तकनीक और विशाल संसाधनों के साथ काम करती हैं। अमेरिका न केवल साइबर हमलों से अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर विरोधी देशों की डिजिटल प्रणालियों को भी बाधित करने की क्षमता रखता है।
रूस की आक्रामक रणनीति
साइबर युद्ध के क्षेत्र में रूस को भी अत्यंत प्रभावशाली शक्ति माना जाता है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में रूसी समूहों पर विभिन्न देशों के सरकारी तंत्र और चुनावी प्रणालियों में हस्तक्षेप करने के आरोप लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस साइबर माध्यम से विरोधी देशों की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने की रणनीति अपनाता है।
चीन की तकनीकी क्षमता
चीन ने भी पिछले वर्षों में साइबर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। चीन की सेना और तकनीकी संस्थानों में साइबर युद्ध के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। चीन की रणनीति में तकनीकी और औद्योगिक जानकारी प्राप्त करना भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है।
ईरान की उभरती साइबर शक्ति
पश्चिम एशिया की राजनीति में सक्रिय ईरान ने भी साइबर क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को तेजी से विकसित किया है। कई साइबर सुरक्षा संस्थानों के अनुसार ईरान से जुड़े समूहों ने इजराइल, सऊदी अरब और अमेरिका की डिजिटल प्रणालियों को निशाना बनाया है। सीमित सैन्य संसाधनों के बावजूद ईरान साइबर माध्यम के जरिए अपने विरोधियों को चुनौती देने की रणनीति अपनाता है।
दुनिया के सबसे खतरनाक हैकर समूह
- सैंडवर्म समूह: रूस से जुड़ा माना जाता है, कई बड़े साइबर हमलों में नाम सामने आया।
- लाजरस समूह: उत्तर कोरिया से जुड़ा माना जाता है, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणालियों पर हमलों के लिए कुख्यात।
- एपीटी-28: रूस से जुड़ा एक शक्तिशाली साइबर समूह, कई देशों की राजनीतिक प्रणालियों को निशाना बनाने के आरोप।
- एपीटी-41: चीन से जुड़ा माना जाने वाला समूह, औद्योगिक और तकनीकी जानकारी चोरी करने के लिए प्रसिद्ध।
- क्लॉप समूह: बड़े पैमाने पर डिजिटल फिरौती हमलों के लिए जाना जाता है।
- रेविल समूह: विश्व भर की कंपनियों पर डिजिटल फिरौती हमलों के लिए कुख्यात।
- डार्कसाइड समूह: ऊर्जा क्षेत्र और पाइपलाइन प्रणालियों पर हमलों के लिए चर्चित।
- एपीटी-33: ईरान से जुड़ा माना जाने वाला साइबर समूह, पश्चिमी देशों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने के आरोप।
- एपीटी-34: मध्य पूर्व से जुड़ा साइबर जासूसी नेटवर्क, कई सरकारी संस्थानों पर हमलों में नाम आ चुका है।