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गीता और संघ से मिली जीवन दिशा: नरेंद्र शिवाजी पटेल

गीता और संघ करते हैं हर दुविधा से दूर, दबाव और प्रलोभन के बीच अडिग रहने की प्रेरणा

मध्यप्रदेश के राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल बोले-राजनीति के दबाव में भी गीता और संघ मुझे सही राह से नहीं डिगने देते

गीता और संघ करते हैं हर दुविधा से दूर दबाव और प्रलोभन के बीच अडिग रहने की प्रेरणा

अनुराग उपाध्याय 

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्वदेश से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्रीमद्भगवद्गीता का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उनके अनुसार इन दोनों ने उनके जीवन की दशा और दिशा बदल दी। वे कहते हैं, 'कोई सामाजिक सरोकार हो तो संघ और कोई दुविधा हो तो गीता मेरा मार्गदर्शन करती है।' राजनीति में दबाव, प्रलोभन और कभी-कभी डराने धमकाने की कोशिशें भी होती हैं, लेकिन गीता और संघ उन्हें अपने मार्ग से विचलित नहीं होने देते।

दुविधा का समाधान गीता में: बाल्यकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े नरेंद्र शिवाजी पटेल का स्पष्ट कहना है कि यदि वे स्वयंसेवक नहीं होते तो आज जिस स्थान पर हैं, वहां तक नहीं पहुंच पाते। संघ ने उनके जीवन में सदैव प्रेरणा का कार्य किया। वे कहते हैं, 'मन में किसी प्रकार की दुविधा, विषाद या भ्रम उत्पन्न हो जाए तो उसका समाधान मुझे श्रीमद्भगवद्गीता में मिलता है। गीता का प्रारंभ ही विषाद और दुविधा से होता है और उसके श्लोक समाधानकारी हैं।' सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा और जनहित को सर्वोपरि मानते हुए वे कहते हैं, 'न राग, न द्वेष - केवल यह देखना होता है कि कौन-सा निर्णय सही है। जब तक पद है, तब तक ठोक बजाकर काम करेंगे।'

संघ से जुड़ाव राष्ट्रभाव का विकासः अतीत को याद करते हुए मंत्री पटेल बताते हैं कि उनके पिता संघ के स्वयंसेवक रहे। इमरजेंसी के बाद जब पुनः शाखाएं शुरू हुईं तो वे भी जुड़ गए। शुरुआत में वे खेलने के उद्देश्य से शाखा जाते थे, लेकिन खेलते-खेलते राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रप्रेम के गीत और प्रेरक कहानियों ने उनके भीतर राष्ट्रभाव जागृत कर दिया। प्रशिक्षण वर्गों प्रारंभिक, प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष में उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। वे कहते हैं,दूराने और भीतर सेवा भाव विकसित हुआ। संघ ने सिखाया कि सबसे पहले अपना कर्तव्य निभाओ और अनुशासन से काम करो।

संघ से जुड़ाव राष्ट्रभाव का विकासः अतीत को याद करते हुए मंत्री पटेल बताते हैं कि उनके पिता संघ के स्वयंसेवक रहे। इमरजेंसी के बाद जब पुनः शाखाएं शुरू हुईं तो वे भी जुड़ गए। शुरुआत में वे खेलने के उद्देश्य से शाखा जाते थे, लेकिन खेलते-खेलते राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रप्रेम के गीत और प्रेरक कहानियों ने उनके भीतर राष्ट्रभाव जागृत कर दिया। प्रशिक्षण वर्गों प्रारंभिक, प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष में उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। वे कहते हैं,

राजनीति में शुरुआती सक्रियताः उनके पिता जनसंघ से भाजपा तक सक्रिय रहे, जिससे राजनीति से उनका स्वाभाविक जुड़ाव रहा। वे घर-घर जाकर चुनाव पर्चियां बांटते थे और 16 वर्ष की उम्र में पोलिंग बूथ एजेंट बने, जबकि उस समय मतदान की आयु 21 वर्ष थी। पढ़ाई के साथ वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे।

राजनीति की बदली हुई धारणाएं

पटेल कहते हैं कि पहले यह धारणा थी कि केवल बड़े लोगों को ही पद मिलेंगे, लेकिन अब यह सोच बदल रही है। आज पहली बार विधायक बनने वाला भी मंत्री बन सकता है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने राजनीति की दिशा बदली है चाहे वह पारदर्शिता हो, संगठन की कार्यशैली हो या कार्यकर्ता चयन की प्रक्रिया।

विदिशा इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्ययन के दौरान भी उनका संघ से संबंध बना रहा। वे कहते हैं, 'मैं जहां भी रहा, विद्यार्थी, व्यवसायी, इंजीनियर या नेता हर जगह स्वयंसेवक होने का लाभ मिला। संघ ने मुझे अच्छा करने की प्रेरणा दी और गीता ज्ञान सीखने-समझने का अवसर दिया।'

कभी मंत्री बनने का सपना नहीं देखा: क्या उन्होंने कभी सोचा था कि वे विधायक या मंत्री बनेंगे? इस पर पटेल कहते हैं, 'इतना मैंने कभी नहीं सोचा था। जब प्रथम वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिज्ञा ली, तब लगा कि सपने तो देख रहे हैं, पर वे पूरे कैसे होंगे?' वे संतोष व्यक्त करते हैं कि जीवनकाल में ही कई बातें साकार होती दिख रही हैं। उनका मानना है कि भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता-आधारित पार्टी है, जहां से ही विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री निकलतेहैं।

संगठन कार्यकर्ताओं का न्यायपूर्ण मूल्यांकन करता है। प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व और लेखन यात्राः वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें शरद जी महरोत्रा जैसे महान व्यक्तित्व का सान्निध्य मिला, जिन्हें वे देवपुरुष और संतपुरुष मानते हैं। प्रथम वर्ष के प्रशिक्षण वर्ग में समिधा के दौरान उनका पहला संपर्क हुआ था और उनकी सीख आज भी काम आ रही है। गीता पर आधारित पुस्तकों की श्रृंखला के बारे में वे बताते हैं कि समय की सीमाओं के बीच वे लेखन के लिए समय निकालते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता पर एक पुस्तक लिख चुके हैं और 'युद्धस्व भारत' नाम से दूसरा खंड तैयार कर रहे हैं। उनका विचार है कि पूरी भगवद्गीता को छह खंडों में लिखा जाए, जिसमें अठारह अध्यायों को तीन-तीन अध्यायों में विभाजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर लेखन किया है और 'नचिकेता-मृत्यु देव संवाद' नामक पुस्तक कठोपनिषद पर आधारित है।

स्वास्थ्य विभाग में प्राथमिकताएं और योजनाएं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पर मंत्री पटेल कहते हैं कि व्यक्ति के जीवन में भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा तीन मूलभूत आवश्यकताएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उनका उद्देश्य है कि गरीब से गरीब व्यक्ति तक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचें। वे कहते हैं कि बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में डॉक्टरों की आवश्यकता भी बढ़ रही है। प्रदेश के लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। मंत्रिमंडल से लगभग 46 हजार पदों को स्वीकृति मिली है और उनकी भर्ती प्रक्रिया जारी है।




 

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